ताजमहल पर निबंध। Essay on Tajmahal in Hindi

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ताजमहल पर निबंध। Essay on Tajmahal in Hindi

ताजमहल पर निबंध। Essay on Tajmahal in Hindi

ताजमहल आगरा में है। आगरा में और भी कई ऐतिहासिक इमारतें हैं। परन्तु ताजमहल उन सबसे अधिक प्रसिद्ध है। यह एक मुगलकालीन खूबसूरत कृति है और संसार के अजूबों में से एक है। यह वाकई में आश्चर्यजनक रूप से खूबसूरत है। यह अलग-अलग समय पर अलग-अलग रूप में दिखाई पड़ता है। चन्द्रमा के रौशनी में यह सबसे अधिक खूबसूरत दिखाई पड़ता है। 

हजारों लोग भारत के व भारत के बाहर से ताजमहल को देखने प्रतिवर्ष आते हैं। दुनिया की कोई और इमारत इतनी अधिक रमणीय और सुन्दर नहीं है जितनी की यह इमारत। इसकी इसी खूबसूरती और वैभव को देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। कवियों ने इसकी प्रशंसा में कवितायें लिखी हैं। सम्राट शाहजहां ने ताजमहल को अपनी रही मुमताज महल की याद में बनवाया था। बच्चे के जन्म के समय उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी कब्र यहां बनवाई गयी। यह यमुना नदी के किनारे बना है। यह एक बहुत बड़े लाल चबूतरे पर बना है। ताजमहल सफ़ेद संगमरमर से बना है। इसे बनाने में सत्रह वर्ष लगे। 

फव्वारे व पानी के छोटे-छोटे तालाब ताजमहल के सामने की ओर बने हैं जो की इसकी खूबसूरती को और भी बढ़ाते हैं। पानी में ताज की परछाई बहुत ही खूबसूरत लगती है। ताजमहत के चारों तरफ चार मीनारें हैं। चारों तरफ हरी घास का मैदान है। यह स्थान परियों के देश जैसा लगता है। ताजमहल के भीतर शाहजहां व मुमताज महल की कब्रें हैं। किसी भी विदेश यात्री की भारत यात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक वह ताजमहल ना देख ले। ताजमहल अपनी सुंदरता के कारण पूरी दुनिया में आकर्षण का केंद्र है। 

ताजमहल पर 400 शब्द का निबंध। 


ताजमहल विश्व के सुन्दरतम स्मारकों में से एक है। यह वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है और भारत का गौरव है। यह अद्वितीय स्मारक आगरा के किले से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके तीन ओर सुन्दर बाग़ और चौथी ओर यमुना की स्वच्छ धारा बहती है। इसका प्रवेश द्वार लाल पत्थरों से बना है, जिस पर कुरआन की आयतें सफ़ेद पत्थरों पर लिखी हैं। इसके बाद छोटा सा अजायबघर आता है जिसमें मुग़ल सम्राटों के शस्त्र आदि रखे हैं। तत्पश्चात ताजमहल के सामने की ओर सुन्दर बाग़ का दृश्य देखने को मिलता है, जिसमे फव्वारों से सजे जलकुंड और उनके दोनों ओर सुन्दर वृक्ष बहुत ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत करते हैं। सामने के ओर ताजमहल के पौने तीन सौ फुट ऊँचे गुम्बद के चारों ओर कई छोटे-छोटे गुम्बद बने हैं। मुख्या गुम्बद के ठीक नीचे सम्राट शाहजहां और मुमताज महल की कब्रें बनीं हैं। ये वास्तविक समाधियां नहीं हैं, किन्तु उसी के ठीक नीचे बनीं कब्रों में उन दोनों को दफनाया गया है। इन कब्रों पर बहुमूल्य पत्थरों द्वारा कलाकृतियां बनीं हैं। मोमबत्तियों के प्रकाश में इन समाधियों को पर्यटकों को दिखाया जाता है।  वातावरण धूप एवं अगरबत्तियों से सुगन्धित रहता है। 

इस अद्वितीय स्मारक का निर्माण सन 1631 में आगरा में यमुना नदी के किनारे करवाया गया था। मुग़ल बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रियतमा मुमताजमहल की याद में इस खूबसूरत स्मारक का निर्माण करवाया था। इसके निर्माण में बीस हजार मजदूर एवं कारीगर बीस वर्ष तक निरंतर कार्य करते रहे तब जाकर यह स्मारक पूर्ण हुआ। इस स्मारक प्रयोग किया गया संगमरमर पत्थर राजस्थान की खानों से लाया गया था। 

इस अद्वितीय स्मारक को देखने लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष भारत आते हैं। चांदनी रात में ताजमहल को देखने का आनंद कुछ और ही होता है। चन्द्रमा की रौशनी इसकी छटा को चार गुना बढ़ा देती है एवं अमावस्या की कालिमा में यह सफ़ेद चादर ओढ़े हुए मूर्ती के सामान लगता है एवं चंद्रज्योत्स्ना में इसका शांत एवं सुन्दर स्थिर स्वरुप मंत्रमुग्ध करने वाला होता है। यमुना के शीतल चंचल जल में इसकी प्रतिछाया अत्यंत लुभावनी लगती है। कोई भी विदेशी पर्यटक अपनी भारत यात्रा को तब तक अधूरा मानता है जब तक वह इस सुन्दर स्मारक की यात्रा ना कर ले।  इस का नाम भारत में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में सम्मान एवं आश्चर्य से लिया जाता है। 
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