धोबी का कुत्ता घर का न घाट का मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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धोबी का कुत्ता घर का न घाट का मुहावरे का अर्थ 

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का मुहावरे का अर्थ होता है – जिसका कोई ठिकाना न हो; ना इधर का ना उधर का; कहीं का भी न रहना; किसी काम का न होना। 

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

वाक्य प्रयोग - मैं जल्दबाजी में पुरानी नौकरी से इस्तीफ़ा दे आया और नई नौकरी मिली नहीं। मेरी दशा तो ऐसी हो गई है-धोबी का कुत्ता घर कान घाट का। 

वाक्य प्रयोग - कर्ज के कारण रामू ने अपना खेत बेच दिया। कुछ दिन बाद उसका घर भी नीलाम हो गया। उसका सब कुछ बर्बाद हो गया। अब उसकी स्थिति 'धोबी का कुत्ता घर का न घाट का' वाली हो गई है।

वाक्य प्रयोग - बेटा पढाई कर लिया करो क्योंकि यदि तुम्हारी नौकरी नहीं लगी तो मेरे पास इतने पैसे नहीं कि तुम्हे व्यापार करा सकूँ। फिर तुम्हारी हालत धोबी का कुत्ता घर कान घाट का वाली हो जाएगी। 

वाक्य प्रयोग - सुनीता अपने पति को छोड़कर भाग गयी, और उसके प्रेमी ने भी उसे भगा दिया। अब उसकी स्थिति 'धोबी का कुत्ता घर का न घाट का' वाली हो गई है।

वाक्य प्रयोग - रमेश ने बहकावे में आकर अपना घर बेच दिया और नया घर भी न ले पाया। उसकी जिंदगी तो 'धोबी का कुत्ता घर का न घाट का' वाली हो गई है।

वाक्य प्रयोग - महेश की जिंदगी का तो वही हाल है कि धोबी का कुत्ता घर का न घाट का। बेचारा जाए तो जाए कहाँ?

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का एक प्रसिद्ध लोकोक्ति या हिन्दी मुहावरा है जिसका का अर्थ है – जिसका कोई ठिकाना न हो; ना इधर का ना उधर का; कहीं का भी न रहना; किसी काम का न होना। जब कोई व्यक्ति न इधर का रह जाता है न उधर का अर्थात उसके पास ठिकाना नहीं होता तो उसके लिए इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।

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