लकीर का फकीर होना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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लकीर का फकीर होना मुहावरे का अर्थ

लकीर का फकीर होना मुहावरे का अर्थ होता है– परम्परावदी होना; पुरानी परम्पराओं पर चलना; पुरानी बातों पर चलना; निर्विवेक कोई बात मान लेना; पुरानी रीतियों पर आँख मूंदकर चलना।

लकीर का फकीर होना मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग- रहीम पुरातन परम्परा के आगे आधुनिक पाश्चात्य समाज की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करता है। आधुनिक समाज में वह लकीर का फकीर बना टहलता रहता है। वह आज भी उन्हीं परम्पराओं के आधार पर व्यवहार करता है जिसे आधुनिक समाज स्वीकार नहीं करता है।

वाक्य प्रयोग- संस्कृत विषय पढ़ने वाले सच्चे अर्थ में अपनी परम्पराओं का निर्वहन करते हुये लकीर के फकीर बने रहते हैं।

वाक्य प्रयोग- हमें लकीर का फ़कीर नहीं बनना चाहिए, विवेक से काम लेना चाहिए। 

वाक्य प्रयोग- हर बात में लकीर का फ़कीर होने की आवश्यकता नहीं, कुछ बुद्धि से काम लीजिए। 

वाक्य प्रयोग- समझदार व्यक्ति की पहचान होती है कि वह लकीर का फ़क़ीर नहीं होता, देश, काल और समय के अनुसार खुद को बदलता रहता है। 

वाक्य प्रयोग- मैं सुरेश की तरह लकीर का फ़कीर नहीं हूँ जो बैलों से खेत जोतूं, मैं तो आधुनिक तरीकों से खेती करता हूँ।

लकीर का फकीर होना एक प्रसिद्ध लोकोक्ति या हिन्दी मुहावरा है जिसका का अर्थ है– परम्परावदी होना; पुरानी परम्पराओं पर चलना; पुरानी बातों पर चलना; निर्विवेक कोई बात मान लेना; पुरानी रीतियों पर आँख मूंदकर चलना। मान लीजिये किसी व्यक्ति को अधिक रुपयों की आवश्यकता है और आप उसे कुछ सौ रूपए देते हैं तो यहाँ ऊंट के मुंह में जीरा कहावत का प्रयोग करेंगे।
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