Sunday, 24 July 2022

मेरा शहर कानपुर पर निबंध - Essay on My City Kanpur in Hindi

Essay on My City Kanpur in Hindi : हर किसी का अपने शहर से लगाव होता है। मेरा जन्म कानपुर में हुआ है इसलिए मेरा प्रिय कानपुर है। कानपुर शहर की सबसे खूबी है, यहाँ की बोली। कानपुर शहर के लोगों को कनपुरिया कहा जाता है। मेरा शहर कानपुर पर निबंध / Mera Shahar Kanpur Par Nibandh

    मेरा शहर कानपुर पर निबंध

    मैं कानपुर शहर में रहता हूं। मेरे लिए कानपुर शहर एक ऐसा स्थान है जहां मैंने अपने बचपन का अधिकांश समय गुज़ारा है। मैं यहाँ पैदा हुआ और बड़ा हुआ तथा मुझे इस जगह की हर चीज़ पसंद है। कानपुर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के कानपुर नगर ज़िले में स्थित एक औद्योगिक महानगर है। यह नगर गंगा नदी के दक्षिण तट पर बसा हुआ है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 80 किलोमीटर पश्चिम स्थित यहाँ नगर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। कानपुर महानगर का क्षेत्रफल 403.70 वर्ग किमी है। 

    कानपुर का इतिहास 

    1803 में 24 मार्च को ईस्ट इंडिया कंपनी ने ऐतिहासिक शहर कानपुर को जिला घोषित किया था। साल 1857 के गदर में कानपुर की धरती खून से लाल हुई थी। समय बीता और कानपुर एक औद्योगिक नगरी के तौर पर विकसित होने लगा। कई मिलें खुलीं इनमें लाल इमली, म्योर मिल, एल्गिन मिल, कानपुर कॉटन मिल और अथर्टन मिल काफ़ी प्रसिद्ध हुईं। इसी कारण कानपुर को मिलों की नगरी के नाम से जाने जाना लगा। इतिहास की किताबों में ये कानपुर 'मैनचेस्टर ऑफ़ द ईस्ट' कहलाया जाने लगा। आज़ादी के बाद भी कानपुर ने तरक़्क़ी की. यहां आईआईटी खुला, ग्रीन पार्क इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बना, ऑर्डनेंस फैक्ट्रियाँ स्थापित हुईं. इस सबके बाद कानपुर का परचम दुनिया में फहराने लगा। 

    कानपुर के दर्शनीय स्थल 

    एक औद्यौगिक नगर होने के साथ-साथ कानपूर का ऐतिहासिक महत्व भी है। यहाँ कई ऐसे दर्शनीय स्थल हैं जिनके दर्शन से हमारा ज्ञानवर्धन होता है। 

    (1) जे. के. मंदिर

    यह मंदिर जे. के. मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। बेहद खूबसूरती से बना यह मंदिर जे. के. ट्रस्ट द्वारा बनवाया गया था। प्राचीन और आधुनिक शैली से निर्मित यह मंदिर कानपुर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहता है। यह मंदिर मूल रूप से श्रीराधाकृष्ण को समर्पित है। इसके अलावा श्री लक्ष्मीनारायण, श्री अर्धनारीश्वर, नर्मदेश्वर और श्री हनुमान को भी यह मंदिर समर्पित है।

    (2) नाना राव पार्क

    नाना राव पार्क फूल बाग से पश्चिम में स्थित है। 1857 में इस पार्क में बीबीघर था। आज़ादी के बाद पार्क का नाम बदलकर नाना राव पार्क रख दिया गया।

    (3) कानपुर जूलॉजिकल पार्क

    1974 में खुला यह चिड़ियाघर भारत के सर्वोत्तम चिड़ियाघरों में एक है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा चिड़ियाघर है। यह कानपुर शहर में स्थित है। यहाँ पर लगभग 1250 जीव-जंतु है। कुछ समय पिकनिट के तौर पर बिताने और जीव-जंतुओं को देखने के लिए यह चिड़ियाघर एक बेहतरीन जगह है।

    (4) मोती झील 

    मोती झील का शाब्दिक अर्थ है मोती की झील। भारत में ब्रिटिश शासन के समय इस झील का निर्माण पीने के पानी के स्त्रोत के रूप में किया गया था। बाद में इसके पास बच्चों का पार्क और कलात्मक रूप से बनाया गया उद्यान होने के कारण यह शहर का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया।

    (5) मैस्कर घाट

    यह भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, 1857 से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ पर 1857 में क्रांति के दौरान क्रांतिकारियों ने बहुत से अंग्रेजी अफसरों को गंगा नदी में नाव से इलाहबाद जाते समय गोलियों से भून दिया था। 


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