Tuesday, 26 March 2019

टेलीविजन और आधुनिक युग में उसकी उपयोगिता

आधुनिक युग में टेलीविजन की उपयोगिता

विज्ञान ने मानव को मनोरंजन के अनेक साधन प्रदान किये हैं। टेलीविजन विज्ञान की मानव को एक नवीनतम देन है। टेलीविजन के माध्यम से हम सुदूर घटित होने वाले दृश्यों को तत्क्षण देख सकते हैं। टेलीविजन रेडियो का विकसित रूप है, जो आनन्द हमारे कानों को रेडियो से प्राप्त होता है, वही आनन्द हमारी आँखों को टेलीविजन से मिलता है। इस प्रकार टेलीविजन बेतार संवाद प्रेषण का नवीनतम् चमत्कार है।

टेलीविजन का आविष्कार सन् 1926 ई० में इंग्लैण्ड के वैज्ञानिक जॉन एल० बेयर्ड ने किया था, किन्तु भारत में टेलीविजन का प्रचलन सन् 1965 ई० में हुआ, आजकल तो घर-घर में टेलीविजन दिखलाई पड़ता है और इसकी लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। टेलीविजन की कार्य-प्रणाली काफी सीमा तक रेडियो की कार्य-प्रणाली से मिलती-जुलती है। टेलीविजन में जिस व्यक्ति अथवा वस्तु का चित्र प्रेषित करना होता है उसे  एक विशेष कैमरे से प्रतिबिम्बित किया जाता है। फिर टेलीविजन कैमरे से बने चित्र को हजारों बिन्दुओं में विभक्त कर दिया जाता है। तत्पश्चात् एक-एक बिन्दु के प्रकाश और अन्धकार को विद्युत तरंगों में परिणत कर दिया जाता है। इसके फलस्वरूप चित्र से प्रकाश के स्थान पर विद्युत तरंगें उत्पन्न होती हैं, किन्तु काले भाग में ऐसा नहीं होता। फिर ये विद्युत तरंगें रेडियो तरंगों में परिणित कर दी जाती हैं। टेलीविजन का एन्टीना इन तरंगों को ग्रहण कर लेता है और टेलीविजन में लगे हुए यन्त्र उन तरंगों को विद्युत तरंगों में बदल देते हैं। इन विद्युत तरंगों द्वारा टेलीविजन में लगी एक नली (ट्यूब) में इलेक्ट्रॉन की धारा उत्पन्न हो जाती है। इस ट्यूब का सामने वाला चपटा भाग टेलीविजन की स्क्रीन (पद) का काम करता है। इस ट्यूब के सामने वाले भाग में पीछे की ओर एक ऐसा पदार्थ लगा होता। है, जो इलेक्ट्रॉन के प्रभाव से चमक उठता है। इस प्रकार टेलीविजन प्रेषण केन्द्र से जिस व्यक्ति या वस्तु का चित्र प्रसारित किया जाता है, एण्टीना की सहायता से उसका प्रतिरूप दूर स्थित टेलीविजन सेट की स्क्रीन पर तत्क्षण दिखलाई पड़ने लगता है। टेलीविजन कार्यक्रमों का प्रसारण ट्रांसमीटरों की सहायता से किया जाता है।

भारत में प्रथम टेलीविजन केन्द्र की स्थापना सितम्बर, 1951 ई० को दिल्ली में हुई थी। परन्तु टेलीविजन का सार्वजनिक प्रसारण अगस्त, 1965 ई० से आरम्भ हुआ। 1 अगस्त, 1975 ई० से देश में उपग्रह की सहायता से टेलीविजन कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाने लगा। सन् 1982 से देशभर में रंगीन टेलीविजन अधिक लोकप्रिय होता जा रहा है।

टेलीविजन की उपयोगिता मनोरंजन और सामूहिक शिक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। रेडियो से हम केवल समाचार व गाने आदि ही सुन सकते हैं और सिनेमा से हम यद्यपि देखने व सुनने दोनों सुख प्राप्त कर सकते हैं, फिर भी जो आनन्द अपने घर के कमरे में बैठकर टेलीविजन कार्यक्रम देखने में मिलता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।


पश्चिमी देशों में टेलीविजन ने शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रान्ति ला दी है। आस्ट्रेलिया में तो टेलीविजन शिक्षा प्रदान करने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम बन गया है। ब्रिटेन में टेलीविजन की सहायता से लाखो विद्याथा उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वहां लीड्स विश्वविद्यालय का टेलीविजन शैक्षिक कार्यक्रम काफी लोकप्रिय माना जाता है। कुछ देशों ने टेलीविजन द्वारा किसानों को कृषि सम्बन्धी महत्त्वपूर्ण बातों की शिक्षा दी है। इस दिशा में जापान का कृषि कार्यक्रम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। विकसित देशों में टेलीविजन की सहायता विद्यार्थियों को सर्जरी का ज्ञान दिया जाता है और विद्यार्थी किसी ऑपरेशन को प्रत्यक्षतः देखकर विपुल ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में अन्वेषण के कार्य को टेलीविजन ने काफी सरल बना दिया है। क्योंकि टेलीविजन कैमरे की सहायता से समुद्र तल की वस्तुओं, पानी में डूबे हुये जहाजों, समुद्री वनस्पति आदि का पता लगाया जा सकता है। अन्तरिक्ष का ज्ञान प्राप्त करने में भी मनुष्य को टेलीविजन से बड़ी सहायता मिलती है। टेलीविजन की सहायता से मनुष्य ने सुदूर स्थित ग्रहों का ज्ञान प्राप्त किया है। इतना ही नहीं कृत्रिम उपग्रहों को भेजने और उन पर नियन्त्रण रखने का कार्य भी टेलीविजन की सहायता से सम्भव हो पाया है।

हमारे देश में टेलीविजन की उपयोगिता काफी महत्त्वपूर्ण हैं। सर्वप्रथम तो भारतीय समाज में टेलीविजन प्रतिष्ठा व सम्मान का प्रतीक माना जाने लगा है, आज जिन घरों में टेलीविजन नहीं है, वे परिवार हेय दृष्टि से देखे जाते हैं। शादी के अवसर पर टेलीविजन देना या लेना एक मामूली-सी बात हो गई है।

प्रारम्भ में लोगों का विचार था कि टेलीविजन की सहायता से भारत में व्याप्त निरक्षरता को दूर किया जा सकेगा। इसीलिये देश भर में टेलीविजन केन्द्रों का जाल-सा बिछा दिया गया, परन्तु विगत दो दशकों के अनुभवों से यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में टेलीविजन अपने लक्ष्यों की पूर्ति में असफल रहा है। हमारे देश में टेलीविजन शिक्षा का माध्यम बनने के बजाय धनी वर्ग के मनोरंजन का साधन बन गया है। आजकल टेलीविजन पर प्रसारित अनेक कार्यक्रमों में चलचित्र, नाटक, नृत्य आदि ही मनुष्य के आकर्षण के केन्द्र हैं, जब कोई वार्ता, भाषण या शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है, तो लोग टेलीविजन सैट बन्द कर देते हैं। वास्तव में यदि टेलीविजन के कार्यक्रमों को शिक्षाप्रद व लोकप्रिय बनाया जाये, तो यह ज्ञान-विज्ञान के प्रसार का महत्त्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

इन सब बातों के बावजूद भी आधुनिक युग में टेलीविजन की व्यापक उपयोगिता को भुलाया नहीं जा सकता। इसीलिये हमारे देश में टेलीविजन प्रसारण के विस्तार की एक विराट योजना बनाई गई है। जिसके फलस्वरूप निकट भविष्य में देश के प्रत्येक नागरिक को टेलीविजन कार्यक्रम देखने का अवसर मिल सकेगा। इस प्रकार टेलीविजन भारत में शिक्षा प्रसार, कृषि की उन्नति, स्वास्थ्य रक्षा व परिवार नियोजन आदि के प्रचार में एक भूमिका निभाने में सफल होगा।

सरकारी संस्थान होने के कारण सत्तारुढ़ पाटी द्वारा इस सशक्त माध्यम के दुरुपयोग की संभावना बनी रहती थी। अतः एन० डी० ए० सरकार ने टेलीविजन कार्यक्रमों को निजी हाथों में हस्तांतरित कर दिया। अब इसके 100 से भी अधिक चैनल हैं और उनका स्वामित्व भी अनेक उद्योगपतियों अथवा संचार संस्थाओं के अधीन है । प्रायः सभी चैनल दिन-रात अर्थात् 24 घंटे प्रसारण करते हैं और उपभोक्ता अपनी-अपनी पसंद के कार्यक्रम देखकर अपना मन बहलाते हैं। किन्तु प्रसारण कम्पनियाँ प्रसारित होने वाले कार्यक्रम की अपेक्षा विज्ञापन प्रसारण को अधिक महत्त्व देती हैं क्योंकि यही तो उनकी आय का साधन हैं। एक और कष्टदायक बात यह भी है कि प्रसारण कर्ता अपने दर्शकों की रुचि के अनुसार भारतीय संस्कृति की सीमाओं का अतिक्रमण करते दिखाई देते हैं। जो कार्यक्रम प्रदर्शित होते हैं उनमें न सामाजिक मूल्य दिखाई देता है, न भारतीय परंपराओं का कोई स्थान होता है और न धार्मिक भावनाओं का। भौतिकवाद की चरम सीमा देखने को मिलती है। नृत्य कला में भारतीयता को खोजते रहिये आपको निराशा ही हाथ लगेगी। यदि आपको समाचार सुनने है तो समाचार दर्शन का पूरा समय एक ही समाचार के प्रसारण में व्यतीत हो जाएगा और जो समाचार आप सुनना चाहते हैं उसकी प्रतीक्षा करते-करते आप थक जाएँगे। यह परिणाम हुआ है टेलीविजन के निजीकरण का।
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