Tuesday, 21 June 2022

रोगी और वैद्य का संवाद लेखन - Rogi aur Vaidya ke Beech Samvad Lekhan

रोगी और वैद्य के बीच संवाद लिखिये : In This article, We are providing रोगी और वैद्य का संवाद लेखन and Rogi aur Vaidya ke Beech Samvad Lekhan for Students and teachers.

    रोगी और वैद्य का संवाद लेखन

    रोगी : वैद्य जी नमस्कार, आपके बारे में बहुत सुना था फलाने जी से...अब हर जगह से निराश हो चुके हैं आप ही कुछ देखिये शायद आयुर्वेद से कुछ हो जाये।

    वैद्य : जी आराम से आइये कुर्सी पर बैठ पाएंगे? दिक्कत हो तो टेबिल पर लेट भी सकते हैं

    रोगी : नहीं-नहीं बैठ जाएंगे।

    वैद्य : बताइये कबसे और क्या-क्या तकलीफ है?

    रोगी : अब क्या बताये डाकटर साहब, 10 साल से पैरों में दर्द है, सरकारी-प्राइवेट सभी तरह के बड़े-बड़े अस्पतालों में दिखा लिया लाखों रुपये खर्च हो गए, हर बार नए टेस्ट और दवाई होती है लेकिन परेशानी कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है।

    वैद्य : अच्छा दिखाइये अपने पर्चे और रिपोर्ट्स।

    रोगी : हाँ, ये लीजिये वैद्य जी, कल ही पूरे शरीर की जांच करवा ली है।

    वैद्य : कुछ और दिक्कत हो तो बताइये।

    रोगी : नहीं-नहीं वैद्य जी यही सब हैं, आप देखकर जाँच करिये बाकी तो।

    वैद्य : पेट साफ रहता है?

    रोगी : अरे कहाँ वैद्य जी 7 दिन में चूर्ण का पूरा डब्बा खर्च हो जाता है। लेकिन अब उससे भी कुछ नहीं होता।

    वैद्य : काम कैसा है आपका, बैठा रहने का या खड़े रहने का? शराब या मांस-मछली लेते हैं क्या?

    रोगी : बस साहब दुकान है अपनी तो खड़ा तो रहना ही पड़ता है और शराब तो महीने में कभी-कभी होती है बस! बाकी शुद्ध शाकाहारी हैं, आप यह बताओ आयुर्वेद से सही हो जाएगा न? 

    वैद्य : (थोड़े से गंभीर स्वर में इन प्रश्नों के बाद उस रोगी से बोले) अभी जिन विशेषज्ञ डॉक्टर्स से आप इतने वर्षों से उपचार ले रहे हैं उन्होंने कितने दिन की गारंटी ली थी ?

    रोगी : अरे मत पूछो साहब, बस बिल बनता है जांच होती है और कुछ न सुनते है ज्यादा न कहते हैं कुछ बस यही दवाइयां खाओ कहते हैं।

    वैद्य : देखिए आपका क्या ट्रीटमेंट चला उसे अब एक किनारे रख दीजिए, अब यदि कुछ परहेज व सही से उपचार लेंगे तो लाभ होगा, गारंटी यह है कि आप करेंगे तो सही हो जायेंगे अन्यथा भगवान ही मालिक है। 

    रोगी : जी आप जैसा कहेंगे वैसा ही होगा। आप बस शीघ्र ही इलाज शुरू करें। 


    Rogi aur Vaidya ke Beech Samvad

    रोगी - (औषधालय में प्रवेश करते हुए) वैद्यजी, नमस्कार!

    वैद्य - नमस्कार! आइए, पधारिए! कहिए, क्या हाल है ?

    रोगी - पहले से बहुत अच्छा हूँ। बुखार उतर गया है, केवल खाँसी रह गयी है।

    वैद्य - घबराइए नहीं। खाँसी भी दूर हो जायेगी। आज दूसरी दवा देता हूँ। आप जल्द अच्छे हो जायेंगे।

    रोगी - आप ठीक कहते हैं। शरीर दुबला हो गया है। चला भी नहीं जाता और बिछावन (बिस्तर) पर पड़े-पड़े तंग आ गया हूँ।

    वैद्य - चिंता की कोई बात नहीं। सुख-दुःख तो लगे ही रहते हैं। कुछ दिन और आराम कीजिए। सब ठीक हो जायेगा।

    रोगी - कृपया खाने को बतायें। अब तो थोड़ी-थोड़ी भूख भी लगती है।

    वैद्य - फल खूब खाइए। जरा खट्टे फलों से परहेज रखिए, इनसे खाँसी बढ़ जाती है। दूध, खिचड़ी और मूँग की दाल आप खा सकते हैं।

    रोगी - बहुत अच्छा! आजकल गर्मी का मौसम है; प्यास बहुत लगती है। क्या शरबत पी सकता हूँ?

    वैद्य - शरबत के स्थान पर दूध अच्छा रहेगा। पानी भी आपको अधिक पीना चाहिए।

    रोगी - अच्छा, धन्यवाद! कल फिर आऊँगा।

    वैद्य - अच्छा, नमस्कार।


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