प्रवास का अर्थ ,परिभाषा एवं प्रकार तथा प्रवास को प्रभावित करने वाले करक बताइये।

साधारण रूप में प्रवास का अर्थ आवागमन या देशान्तरण से लगाया जाता है। मनुष्य एक स्थान से दूसरे स्थान को आता-जाता रहता है जिसके परिणामस्वरूप उसका सामान्य

प्रवास का अर्थ ,परिभाषा एवं प्रकार तथा प्रवास को प्रभावित करने वाले करक बताइये। 

    प्रवास का अर्थ एवं परिभाषा (Migration : Meaning and Definition) 

    साधारण रूप में प्रवास का अर्थ आवागमन या देशान्तरण से लगाया जाता है। मनुष्य एक स्थान से दूसरे स्थान को आता-जाता रहता है जिसके परिणामस्वरूप उसका सामान्य निवास बदल जाता है। जनसंख्या के निवास स्थान के परिवर्तन (Displacement of Population) की इस घटना को देशान्तरण या प्रवास कहते हैं। प्रवास से जनसंख्या में परिवर्तन बहुत कम समय में भी सम्भव है। 

    प्रवास का अर्थ है अपने स्वाभाविक निवास को परिवर्तित कर देना। प्रवास निवास स्थान को परिवर्तित करते हुए एक भौगोलिक इकाई से अन्य भौगोलिक इकाई में विचरण का एक स्वरूप है। उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट होता है प्रवास के अन्तर्गत निवास स्थान में परिवर्तन हो जाता है तथा यह परिवर्तन अल्पकालीन न होकर दीर्घकालीन एवं स्थायी होता है। इसके साथ ही देशान्तरण में भौगोलिक इकाई को पार करना भी आवश्यक होता है।

    इसके अन्तर्गत अपने ही देश में प्रवास दो रूपों में हो सकता है आन्तरिक प्रवास (In-Migration) एवं वाह्य प्रवास (Out-Migration) लेकिन जब देश में परिवर्तन होता है तो दूसरे देश में जाने को उत्प्रवास (Emigration) व दूसरे देश से अपने देश में आने पर अप्रवास (Immigratiion) कहा जाता है।

    प्रवास के प्रकार - Types of Migration in Hindi

    प्रवास या देशान्तरण का वर्गीकरण सामान्य रूप में निम्न रूप में किया जाता है :1. आन्तरिक प्रवास (Internal Migration) 2. अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration) 

    1.आन्तरिक प्रवास – जब किसी देश के निवासी अपनी देश की सीमाओं के अन्तर्गत एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाते हैं तो उनका यह प्रवास आन्तरिक प्रवास कहलाता है। उदाहरण - मुम्बई का कोई व्यक्ति इलाहाबाद में बस जाता है तो यह आन्तरिक देशान्तरण या प्रवास कहलायेगा। 

    • आंतरिक प्रवास कई प्रकार का होता है 
    • वैवाहिक प्रवास (Marital Migration) 
    • अंतरप्रांतीय प्रवास (Inter-State Migration) 
    • अन्तर्जनपदीय प्रवास (Inter-District Migration) 
    • ग्राम-शहर प्रवास (Rural-Urban Migration)
    • सम्बद्धता जन्म प्रवास या सह प्रवास (Accompanied Migration) 

    2. अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास - अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास का से आशय अपने देश से किसी अन्य देश या किसी दूसरे देश से अपने देश के बीच होने वाले गमनागमन से लगाया जाता है। वस्तुतः आन्तरिक या अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास में कोई मौलिक अन्तर नहीं है मात्र राष्ट्रों की भौगोलिक सीमाओं को ही अन्तर का आधार कहा जा सकता है। प्रो0 डोनाल्ड जे0 बोगके अनुसार आन्तरिक प्रवास के लिए हमें In-Migration तथा बर्हिगमन के लिए Out-Migration शब्द का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन भारत का कोई व्यक्ति यदि अमेरिका या जर्मनी में बस जाता है तो प्रवजन (Emigration) जबकि किसी बाहरी देश जैसे इंग्लैंड या रूस का कोई व्यक्ति यदि भारत आकर बस जाता है तो इसे आव्रजन (Immigration) कहा जायेगा।

    प्रवास को प्रभावित करने वाले घटक या कारक 

    प्रवास को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं (1) आकर्षक कारक (Pull Factors), (2) विकर्षण कारक (Push Factors)

    1.आकर्षक कारक (Pull Factors) - आकर्षक कारक वो करक हैं जिनसे प्रभावित होकर व्यक्ति अपना निवास स्थान छोडकर अन्यत्र आकर्षित करने वाले स्थान में बसता है। 

    कुछ प्रमुख आकर्षक कारक निम्नवत् हैं :

    • रोजगार एवं व्यवसाय के श्रेष्ठ अवसर (Better Employment) 
    • अधिक अच्छी शिक्षा (Better Education) 
    • आवास की अच्छी सुविधा। 
    • मनोरंजन के अच्छे साधनों की उपलब्धता। 
    • स्वास्थ्यप्रद जलवायु।
    • उन्नत नागरिक जीवन। 

    2.विकर्षण कारक (Push Factors) - विकर्षण कारक वो कारक हैं जिनसे प्रभावित होकर व्यक्ति अपना निवास छोड़ने को विवश होता है। वो ही कारक प्रवास हेतु उपरोक्त वाह्य करते हैं। 

    कुछ प्रमुख विकर्षण तत्व निम्नवत् हैं :

    1. निवास स्थल पर रोजगार के अवसरों का अभाव। 
    2. शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, प्रशिक्षण सुविधा का अभाव। 
    3. मनोरंजन सुविधा का अभाव।
    4. उन्नति के अवसरों का न होना। 
    5. सामाजिक बहिष्कार। 
    6. सामाजिक माहौल प्रतिकूल होना। 
    7. आतंकवाद।
    8. राजनीतिक, सामाजिक, जातिगत एवं धार्मिक भेदभाव। 

    आकर्षण एवं विकर्षण कारकों को जानने के बाद अब आप अध्ययन के दृष्टिकोण से प्रवास को प्रभावित करने वाले तत्वों को निम्न रूपों में रखकर और जान सकते हैं। 

    1.प्राकृतिक कारक (Natural Factors) - प्राकृतिक अथवा भौगोलिक कारकों से प्रायः लोग प्रवास करते हैं। इसके अन्तर्गत जलवायु सम्बन्धी परिवर्तन, प्राकृतिक प्रकोप, सूखा, बाढ़, दुर्भिक्ष, महामारियाँ, सुनामी, भूकम्प, ज्वालामुखी, बादल फटने से आयी अचानक बाढ़ की तबाही आदि घटनाएँ आती हैं जो देशान्तरण या प्रवास को प्रभावित करती हैं। 

    2.आर्थिक कारक (Economic Factors)- प्रवास को प्रभावित करने वाले कारकों में आर्थिक कारक सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। लोग बेहतर जीवन की लालसा में अपना मूल निवास छोड़कर अन्यत्र देश में जा सकते हैं। कुछ प्रमुख आर्थिक कारक इस प्रकार हैं -

    1. कृषि योग्य भूमि का अभाव ।
    2. औद्योगीकरण। 
    3. नगरीकरण। 
    4. यातायात की सुविधाएँ।
    5. सामान्य जीवन हेतुं आर्थिक स्थिति ठीक करना। 

    3.राजनीतिक कारक (Political Factors)- राजनीतिक कारक भी प्रवास को प्रभावित करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यागों की स्थापना एक राजनीतिक निर्णय के आधार पर होता है जिससे ग्रामीण से शहरी प्रवास पर नियंत्रण होता है। नोएडा, गीडा, सीडा, इत्यादि औद्योगिक क्षेत्र भारत में इसी उद्देश्य से बनाए गये हैं। देशों का राजनैतिक बंटवारा या शरणार्थियों का गमनागमन इसका प्रमुख उदाहरण हैं जो भारत में विभाजन एवं बंगलादेश के परिप्रेक्ष्य में कहा जा सकता है। 

    4.सामाजिक कारक (Social Factors) - प्रवास के लिए सामाजिक रीति-रिवाज भी उत्तरदायी कारक होते हैं। इसके अन्तर्गत वैवाहिक प्रवास (यथा - विवाह के बाद लड़कियों का अपने पति के घर को प्रवास) एवं सह प्रवास (पिता के स्थानांतरण या प्रवास के कारण परे परिवार का साथ जाना) प्रमुख कारक हैं। महत्वाकांक्षायें एवं शीघ्र विकास की कामनायें गाँवों से नगरों की ओर प्रवास को प्रोत्साहित करते हैं। 

    5.जनांकिकी कारक (Demographic Factors) - जिन स्थानों पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है उस स्थान से कम या विरल जनसंख्या की ओर प्रवास होता है। प्रवास पर जन्म-दर तथा मृत्यु-दर का भी प्रभाव पड़ता है। जहाँ पुरूष विशिष्ट जन्म-दर (Male Specific Birth rate) कम है तो सन्तुलन बनाये रखने के लिए प्रवासी बनकर युवाओं को दूसरे क्षेत्र से आना होगा। युद्ध के कारण कई बार यह देखा गया है कि पुरूषों की संख्या घटने के कारण जनसंख्या असंतुलित हो गयी फलतः विश्व के अन्य देशों के युवाओं को बसने के लिए आकर्षित करना पड़ा।

    6.धार्मिक एवं सांस्कृतिक कारक - धर्म प्रचार तथा प्रसार के उद्देश्य से विभिन्न धर्मों के अनुयायी विश्व के विभिन्न भू–भागों में प्रवास करते हैं। सांस्कृतिक सम्पर्क भी प्रवास को प्रोत्साहित करता है। प्रो० थाम्पसन एवं लेविस का मानना है कि प्रवास के लिए उत्तरदायी कारक आर्थिक तथा गैर आर्थिक कारक दोनों ही हो सकते हैं परन्तु इन दोनों प्रकार के कारकों में आर्थिक कारक ही अधिक महत्वपूर्ण है। देशान्तरण या प्रवास में बाधक तत्व भी जानने योग्य हैं जो निम्न हैं - दूरी, भाषा संस्कृति एवं रीति-रिवाज, वर्तमान व्यवसाय व स्थान से लगाव, मार्ग व्यय, प्रवास क्षमता, प्रवासी का स्वास्थ्य, आयु एवं इच्छाशक्ति।

    प्रवास के प्रभाव – परिणाम प्रवास के प्रभाव या परिणाम सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों हो सकते हैं। सकारात्मक प्रभाव के अन्तर्गत भूमि पर जनसंख्या का दबाव कम होना, श्रमिकों की मांग एवं पूर्ति में सामंजस्य, एकता की भावना का विकास, नगरीकरण के विभिन्न लाभ इत्यादि आते हैं। जनांकिकी दृष्टिकोण से भी लाभ होता है। जीवन स्तर ऊँचा उठता है। देशान्तरण के नकारात्मक प्रभाव भी होते हैं यथा - मानसिक असन्तोष बढ़ना, अन्तर वैयक्तिक सम्बन्धों का हास, वर्ग भेद, सांमजस्य की समस्या एवं जनसंख्या वृद्धि व जनघनत्व में वृद्धि की समस्या आदि। आन्तरिक प्रवास के प्रभावों में इस रूप में परिणामों का अध्ययन कर सकते हैं कि जो प्रवासी हैं उस पर क्या प्रभाव पड़ रहे हैं, जहाँ से प्रवास हो रहा है एवं जिस स्थान को प्रवासी प्रवास कर रहा है वहाँ पर पड़ने वाले प्रभावों - परिणामों का अध्ययन महत्वपूर्ण है। नगरीकरण होने से उसके लाभ एवं हानि दोनों पक्ष जानने योग्य होते हैं। 

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