राजनीतिक सिद्धांत से सम्बन्धित आनल्ड बैश्ट की व्याख्या पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

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राजनीतिक सिद्धांत से सम्बन्धित आनल्ड बैश्ट की व्याख्या पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

बैश्ट ने केवल वैज्ञानिक राजनीतिक सिद्धांत का समर्थन किया है। तदनुसार सिद्धांत, 'एक ऐसी प्रस्तावना या प्रस्तावनाओं का समूह है जो विषय-सामग्री के सन्दर्भ में, प्रत्यक्षतः पर्यवेक्षित अथवा अप्रकट अन्तःसम्बन्धों या किसी विषय की व्याख्या करता है। उसके अनुसार विज्ञान ‘अन्तःवैयक्तिक संचारणीय ज्ञान' (inter subjectively transmissible knowledge) है। उसके कथन का तात्पर्य यह है कि विज्ञान ऐसा विशेष और विश्वसनीय ज्ञान है जिसे एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को समझा सकता है। वह स्वयं या दूसरों के द्वारा देखी गयी घटनाओं पर आधारित होता है। फिर भी उसे अन्तिम या पूर्ण सत्य नहीं माना जाता, क्योंकि नई घटनाओं के संदर्भ में उस ज्ञान में सुधार या परिवर्तन करने के लिए प्रत्येक विज्ञानी को तैयार रहना पड़ता है। वह विज्ञान के व्यापक एवं संकुचित दो अर्थ बताता है।

व्यापक अर्थों में विज्ञान में शुद्ध तर्क, अन्तर्ज्ञान (intuition), स्वयं साक्ष्य (selfevidence), धर्म-प्रकाशन (religious revelation) आदि शामिल किये जा सकते हैं।

संकुचित अर्थों में विज्ञान केवल वैज्ञानिक पद्धति, आनुभविक पर्यवेक्षण, तर्कपूर्ण युक्तियों आदि पर ही आधारित हो सकता है। वह राजनीति विज्ञान को विज्ञान का स्तर प्रदान करने के लिए केवल संकुचित अर्थों को स्वीकार करता है तथा इसी आधार पर राजनीतिक सिद्धांत के निर्माण की आयोजना प्रस्तुत करता है। व्यापक अर्थों में अन्तिम नैतिक मूल्य स्वतः शामिल हो जाते हैं। उन्हें वैज्ञानिक पद्धति द्वारा सिद्ध नहीं किया जा सकता। इस दृष्टि से विशुद्ध वैज्ञानिक राजनीति सिद्धांत तभी सम्भव है जबकि उसके द्वारा प्रतिपादित वैज्ञानिक मूल्य-सापेक्षवाद (scientific value relativism) को मूलाधार बनाया जाये।

इस दृष्टि से वैज्ञानिक सिद्धांत एक अन्तर्सम्बन्धित व्याख्यात्मक प्रस्तावनाओं की व्यवस्था है। औरन आर० यंग (Oran R. Young) ने लिखा है कि 'वैज्ञानिक' सिद्धांत सामान्यतः परिवयों (अंतपंइसमे) का विवरण, परिवयों के मध्य सम्बन्धों तथा परिवयों की अन्तःक्रियाओं (interactions) के पूर्वकथित परिणामों का विचार-क्रम है।' डहल ने उसे 'परिवों के अन्तर्सम्बद्धता-विषयक सामान्यीकृत विवरण के रूप में स्वीकार किया है।'

गिडियन सौबर्ज एवं रोजर नेट (Gideon Sjoberg and Roger Nett) ने उसे तर्क-संगतिपूर्ण अन्तर्सम्बन्धित प्रस्तावनाओं या विवरणों का सेट माना है जो कि अनुभवात्मक दृष्टि से अर्थपूर्ण (meaningful) हो तथा शोधकर्ता की उन मान्यताओं से मेल खाता हो जिन्हें वह अपनी पद्धति और विषय-सामग्री के सन्दर्भ में ग्रहण करता है। इस प्रकार वैज्ञानिक सिद्धांत एक सत्यापित (verified) प्राक्कल्पना है जिसके सत्यापन का प्रमुख आधार (1) निगमनात्मक (deductive), एवं (2) प्रत्यक्षात्मक (positive) पद्धति को प्रमुख आधार बनाता है। इनसे प्राप्त सामान्यीकरणों के आधार पर निगमन-पद्धति का प्रयोग किया। 

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