अल्बर्ट केमस का जीवन परिचय Albert Camus Biography in Hindi

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अल्बर्ट केमस का जीवन परिचय Albert Camus Biography in Hindi

अस्तित्ववादी चिंतन के विकास में सार्च के बाद सबसे अधिक रचनात्मक योगदान अलबर्ट केमस का है। वह एक उपन्यासकार और नाटककार था जिसे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सोरेन किर्केगार्द और सार्त्र के समान ही अलबर्ट केमस के सारे चिंतन का आधार मानव के व्यक्तित्व पर टिका हुआ है।

अल्बर्ट केमस का जीवन परिचय

नामअल्बर्ट केमस
जन्म7 नवंबर 1913, मोंडोवी फ्रेंच अल्जीरिया
पुरस्कारनोबेल प्राइज (1957)
मृत्यु4 जनवरी 1960

अलबर्ट केमस का जन्म 1913 में अल्जीरिया के मोंडोवी (वर्तमान में ड्रेआन) में हुआ। उसने अल्जीरिया विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की। सन् 1934 से 1939 तक उसने एक थियेटर मण्डल के लिए नाटक लिखे। बाद में अलबर्ट केमस ने पेरिस के समाचार पत्रों में लिखना प्रारंभ किया 1942 में उसका प्रसिद्द उपन्यास स्ट्रेजर प्रकाशित हुआ जिससे साहित्य जगत में उसे अपूर्व ख्याति मिली। उसका लेख 'सिसफुस की परिकल्पना भी बहुत चर्चित रहा। 1947 में उसका प्रसिद्ध उपन्यास 'प्लेग' प्रकाशित हुआ। 1957 में उसे साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। 1960 में एक बार दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई।

शास्त्रीय अर्थों में अलबर्ट केमस एक दार्शनिक नहीं माना जा सकता फिर भी उसकी रचनाएं दार्शनिक विचारों से ओत-प्रोत है। उसके दो प्रसिद्ध निबंध 'सिसफुस की परिकल्पना' और 'विद्रोही' उसके नैतिक दृष्टिकोण की व्याख्या करते है। इसी नैतिक दृष्टिकोण को उसने अपने उपन्यासों और नाटकों में अभिव्यक्ति दी है।

अलबर्ट केमस की समस्त रचनाओं में चाहे वह साहित्यिक कृतियां हों अथवा दार्शनिक ग्रन्थ, हमें सूत्र में जो विचार मिलता है वह जीवन की निरर्थकना का विचार है। सिसफुस के मिध का विषय यह है कि यह आश्चर्य करना आवश्यक और वैध है कि क्या जीवन का कोई अर्थ है और इसीलिए यह प्रश्न भी वैध है कि क्या जीवित रहना चाहिए या आत्महत्या कर लेनी चाहिए। सभी अनर्विरोधों के बावजूद भी इस प्रश्न का उत्तर यह है कि ईश्वर के होते हुए भी, जीवन के अर्थहीन होते हुए भी, आत्महत्या करना वैध नहीं है।

सार्त्र की दृष्टि में जीवित रहना एक अर्थहीन और थका देने वाला कार्य है। जीवन का एक बंधा-बंधाया क्रम है। सबेरे उठना, ट्राम या बस पकड़ना, चार घण्टे दफ्तर या कारखाने में काम करना, दोपहर का भोजन, फिर ट्राम या बस की यात्रा, फिर चार घण्टे काम करना और उसके बाद रात्रि का भोजन और सो जाना और यह क्रम निरन्तरता से चलता रहता है। लेकिन एक दिन ऐसा भी आता है जब व्यक्ति थककर और हैरानी के साथ अपने से पूछता है कि यह सब वह आखिर क्यों कर रहा है? उसे जीवन की निस्सारता प्रतीत होती है और उसके सामने तीन विकल्प रह जाते हैं—आत्महत्या करना, आशावान होना और जीवन को जीते चले जाना। अलबर्ट केमस ने इन तीनों मागों की व्याख्या करते हुए कहा है कि आत्महत्या इस समस्या का समाधान नहीं है। अलबर्ट केमस दूसरे मार्ग अर्थात् जीवन के दृष्टिकोण को आशावान बनाने के विकल्प का विश्लेषण करता है और उसे इसमें नया आत्महत्या में कोई अन्तर दिखलाई नहीं देता है। अतः वह तीसरे विकल्प को मानव की स्थिति का मूल तत्व मानता है और कहता है कि व्यक्ति के सामने एक ही रास्ता है कि वह जीवित रहे और वह भयंकर संघर्ष की वास्तविकता को स्वीकार करे।

अलबर्ट केमस भी सार्त्र की भांति यह कहता है कि चूंकि मनुष्य स्वतन्त्र है. इसलिए अपने उत्तरदायित्व से वह बच नहीं सकता। राजनीतिक व्यवस्था जिस प्रकार की भी हो, की बात सुनी जाए या नहीं, उसका कुछ प्रभाव हो या नहीं. फिर भी प्रामाणिक व्यक्ति अपनी नैतिक अभिव्यक्ति अवश्य करेगा। हमारे विरोध या समर्थन की परिणामहीनता में हमारे उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं कर सकती।

वह एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था का समर्थन करता है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के अपने मूल्य हों, जिन्हें यथासम्भव सार्वजनिक साधनों द्वारा सुरक्षित रखा जाए। राज्य व्यक्तिगत साधनों की पूर्ति के लिए सार्वजनिक साधन होना चाहिए।

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