आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत की प्रमुख प्रवृत्ति की विवेचना कीजिए।

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आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत की प्रमुख प्रवृत्ति की विवेचना कीजिए।

  • आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत की तीन प्रवृत्तियाँ बताइए।
  • राजनीतिक सिद्धांत की नवीन प्रवृत्तियाँ ।
  • आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत की दो प्रमुख प्रवृत्तियाँ।

आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत की प्रवृत्तियाँ

(1) अध्ययन मुक्तता - आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत अध्ययन मुक्त हैं। राजनीतिक तथ्य और घटनाएँ जहाँ उपलब्ध हों, चाहें वे समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, धर्म के विषय में हों अथवा व्यक्ति, परिवार, राष्ट्र और विश्व से सम्बन्धित हों अब राजनीतिक अध्ययन के विषय बन गए हैं। राज सिद्धान्ती की यह भावना रहती है कि वास्तविक परिस्थितियों का अध्ययन किया जाए और उन्हीं को वास्तविकता प्रकट करने वाली अवधारणाओं का आधार बनाया जाए।

(2) अनुभवात्मकता - आधुनिक राज सिद्धांत यथार्थवादी है और व्यवहारवादी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देता है। अधिकांश अध्ययन अनुभवात्मक हैं जो कि पर्यवेक्षण, माप, तार्किक यक्तियक्तता आदि तकनीकों पर आधारित हैं। वस्तुपरकता ने आत्मपरकता का स्थान ग्रहण कर लिया है।

(3) शोध एवं सिद्धांत में घनिष्ठ सम्बन्ध - वैज्ञानिक पद्धति के प्रयोग द्वारा अब राजवैज्ञानिक साधारणीकरणों, व्याख्याओं एवं सिद्धांतों के निर्माण में लगे रहते हैं। अब मिलान निर्माण कठोर शोध प्रक्रियाओं पर आधारित है। शोध और सिद्धांत अब एक-दूसरे के बिना निरर्थक माने जाते हैं।

(4) अन्तः अनुशासनात्मक - अब राजनीतिक सिद्धांत का आचारशास्त्र और दर्शनशास्त्र से सम्बन्ध टूट चुका है। अधिकांश सिद्धांतशास्त्री इस धारणा पर चल रहे हैं कि अगर वैज्ञानिक तरीकों को अपना लिया जाए तो विस्तृत दार्शनिक तकनीकों की जरूरत नहीं होगी। नई प्रवृत्ति यह है कि राजनीति के अध्ययन को अर्थशास्त्र, समाज विज्ञान और मनोविज्ञान जैसे सामाजिक विज्ञानों से सम्बद्ध किया जाय ताकि इस विषय के नियमों को व्यवहारपरक जांच-पड़ताल के आधीन रखा जा सके।

(5) मूल्य सापेक्षवाद - आधुनिक राज सिद्धांत वैज्ञानिक पद्धति को प्रमुखता देता है। उसी के साथ वैज्ञानिक मूल्य-सापेक्षवाद जुड़ा हुआ है जिसका मूल अर्थ यह है कि शोधकर्ता अपने अनुसन्धान से स्वयं के मूल्यों एव धारणाओं को अलग रखता है तथा इनका अपने अध्ययन पर किसी प्रकार प्रभाव नहीं पड़ने देता। उसके आचरण में बौद्धिक निष्पक्षता एवं सत्यनिष्ठा पाई जाती है।

आधुनिक राजनीतिक सिद्धांत के बारे में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें व्यवहारवाद और उत्तर-व्यवहारवाद दोनों के चरण आते हैं।

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