Thursday, 16 April 2020

Hindi Essay on Family Planning, "परिवार नियोजन पर टिप्पणी", "लेख", "निबंध" for Class 5, 6, 7, 8, 9 and 10

इस लेख में जानिये परिवार नियोजन का अर्थ, परिवार नियोजन की आवश्यकता, परिवार नियोजन के फायदे तथा परिवार नियोजन के उपाय।

Hindi Essay on Family Planning, "परिवार नियोजन पर टिप्पणी", "लेख", "निबंध" for Class 5, 6, 7, 8, 9 and 10

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित बढ़ती जनसंख्या के प्रति चिंता जताते हुए परिवार नियोजन की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटा परिवार रखना भी देशभक्ति होती है। नि:संदेह जनसंख्या वृद्धि पर लगाम कसने का सबसे सरल उपाय परिवार नियोजन ही है। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या को हम जागरूकता के माध्यम से ही नियंत्रित कर सकते हैं। जनसंख्या विस्फोट एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। आज भारत-चीन समेत विश्व के अधिकांश देशों में जनसंख्या की विस्फोटक बढ़ोत्तरी को एक घोर अभिशाप करार देकर उस पर नियंत्रण पाने के अनेक प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं। ताकि उत्पन्न मानव नामक प्राणियों का भावी जीवन सन्तलित होकर सुविधापूर्वक जिया जा सके।
Hindi Essay on Family Planning, "परिवार नियोजन पर टिप्पणी", "लेख", "निबंध" for Class 5, 6, 7, 8, 9 and 10
परिवार नियोजन का अर्थ : परिवार नियोजन से तात्पर्य एक ऐसी योजना से है, उपयुक्त समय पर और एक आदर्श संख्या में सन्तानों को जन्म दिया जाए। जिससे कि परिवार छोटा रहे और बच्चों के बीच पर्याप्त अन्तर हो।

जनसंख्या वृद्धि : भारत जब स्वतंत्र हआ था, उस समय इसकी जनसंख्या 32-33 करोड़ से अधिक नहीं थी। सन् 1971 की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसंख्या 62-63 करोड़ तक पहुँच चुकी थी। जो 2011 में बढ़कर लगभग 121.5 करोड़ हो गई तथा साल 2018 तक हमारे देश की कुल आबादी लगभग 133 करोड़ से अधिक आंकी जा रही है। देश की कुल आबादी में 62.31 करोड़ जनसंख्या पुरुषों की एवं 58.47 करोड़ जनसंख्या महिलाओं की है। सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जहां की कुल आबादी 19.98 करोड़ है तो वहीं न्यूनतम आबादी वाला राज्य सिक्किम है जहां की कुल आबादी लगभग 6 लाख है। एक अनुमान है कि यदि जन्म-दर इसी प्रकार बढ़ती रही, तो सन् 2021 तक यह जनसंख्या 150 करोड़ तक हो जायेगी। वैज्ञानिकों का अनुमान यह भी है कि जनोपयोगी उत्पादनों का प्रतिशत बढ़ती हुई जनसंख्या की औसत में बहुत कम है। यह हालत केवल भारत में ही नहीं, सारे विश्व में है। यदि जनसंख्या की निरन्तर बढ़ोतरी को रोककर जीवन के उपलब्ध स्रोतों-साधनों के साथ उसका सन्तुलन न बिठाया जा सका, तो एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब आदमी घास-पत्ती पाने के लिए भी आपस में लड़ने-मरने लगे।इससे भी बढ़कर पेट भरने के लिए आदमी आदमी को खा जाने के लिए विवश हो जाये-ओह ! उस दिन की कल्पना मात्र ही आज भयावह तथा रोंगटे खड़े कर देने वाली लगती है।

परिवार नियोजन की आवश्यकता :
भविष्य में आने वाली इन कठिनाइयों का पूर्वानुमान तथा वर्तमान की विषमताओं को प्रत्यक्ष देख-सुनकर ही आज सारे विश्व में जनसंख्या-वद्धि को रोकने के लिए परिवार-नियोजन के अनेक प्रकार के व्यावहारिक और वैज्ञानिक उपाय किये जाने लगे हैं। जीवन को ढंग से जीने के लिए सन्तुलित या छोटा परिवार आवश्यक है। आज के आर्थिक दबावों और महंगाई की निरन्तर वृद्धि वाले युग में छोटा परिवार ही एक सुखद वरदान कहा जा सकता है। इसी कारण भारत में 'हम दो, हमारे दो' जैसे मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक नारों की ईजाद की गयी है। परिवार कल्याण की कई योजनाएं बनायी गयी और बनायी जा रही हैं। लोगों को समझाया जा रहा है कि परिवार नियोजन का जितना आर्थिक दृष्टि से महत्त्व है,उससे कहीं अधिक मानवीय दृष्टि से भी महत्त्व और आवश्यकता है। अधिक सदस्यों का परिवार या अधिक सन्तानों की उत्पत्ति अपने पर तो बोझ बनती ही है,राष्ट्र और मानवता पर भी बोझ होती है। अधिक जनों का सुव्यवस्थित भरण-पोषण, सुशिक्षा और भविष्य की व्यवस्था न तो व्यक्ति के स्तर पर ही सम्भव हआ करती है और न राष्ट्रीय अथवा मानवीय स्तर पर ही। अतः अपने राष्ट्र और मानवता के हित में परिवार-नियोजन अत्यन्त आवश्यक है। इसी से हम सभी का जीवन स्तर ऊपर उठ सकता है। संयुक्त राष्ट्र संघ भी मानवीय दृष्टि से ही परिवार नियोजन को बढावा देने की दिशा में विशेष सक्रिय है।

परिवार नियोजन के फायदे : 
जनसंख्या वृद्धि रोकने में जनता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सीमित जनसंख्या में हम बेहतर और अधिक संसाधनों के साथ आरामदायक जीवन जी सकते हैं, जबकि जनसंख्या वृद्धि के कारण यही आराम संघर्ष में परिवर्तित होकर शांति-सुकून को छीनने का काम करता है। शिक्षित समुदाय जनसंख्या की समस्या से भलीभांति अवगत है। यदि कोई अनभिज्ञ है तो वह अशिक्षित और अनपढ़ वर्ग जिसे जनसंख्या के बढ़ने के हानिकारक पहलुओें से रूबरू कराना बेहद जरूरी है।

जनसंख्या वृद्धि से हानि : 
असन्तुलित या लम्बे चौड़े परिवार के होने से और भी कई हानियाँ हैं। सभी का उचित ध्यान रख पाना सम्भव नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप जीवन-स्तर गिरकर व्यक्ति को अनैतिक, अराजक, विक्षुब्ध और हीन बना देता है। सरकार या समाज सभी के लिए उचित एवं सम्मानजनक रोज़गार की व्यवस्था नहीं कर पाते, सभी के भरण-पोषण की सम्भव व्यवस्था नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप कुपोषण का शिकार जीवन और समाज तन-मन से रोगी और अराजक हो जाया करता है। जीवन एक जीवन्त नरक बन जाता है। जनसंख्या को बढ़ाकर हम अपने आने वाले कल को ही खतरे में डाल रहे हैं। वस्तुत: बढ़ती जनसंख्या के कारण भारी मात्रा में खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो रहा है। जिसके कारण देश में भुखमरी, पानी एवं बिजली की समस्या, आवास की समस्या, अशिक्षा का दंश, चिकित्सा की बदइंतजामी एवं रोजगार के कम होते विकल्प आदि समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। असन्तुलित जनसंख्या के लक्षण मारक रूप से आज चारों ओर प्रगट होने लगे हैं। सभी स्तरों पर सावधानी आवश्यक है कोई भी धर्म यह नहीं कहता कि बच्चे जनते जाओ और जानवरों के बच्चों के समान उन्हें भटकने के लिए आवारा छोड़ दो या नागिन के समान उन्हें स्वय ही खा जाओ। सही पालन-पोषण न कर पाना आप खाने के समान ही तो है । अतः कुछ लोग जो धर्म आदि की दुहाई देकर परिवार नियोजन का विरोध करते हैं,वे वास्तव में अपने शत्रु तो हैं ही; देश, जाति और मानवता के भी शत्रु हैं। ऐसे लोगों के बहकावे में न आकर जीवन में वास्तविक सुख और आनन्द पाने केलिए सभी प्रकार के परिवार नियोजन के उपायों को काम में लाकर सन्तुलित परिवार बनाने,जनसंख्या की दर घटाने का पावन कार्य सभी को करना चाहिए। ऐसा करना उदात्त मानवधर्म का पालन करना तो है, राष्ट्रीय कर्तव्य भी है।

परिवार नियोजन के उपाय 
परिवार-नियोजन के कई उपाय सुझाये गये हैं। जैसे निरोधक साधनों को अपनाना,विवाह की आयु को बढ़ाना, एक-दो बच्चों के जन्म के बाद ऑपरेशन करा देना, संयम बरतना आदि। एक अन्य उपाय के रूप में सन् 1971 से गर्भपात को भी इसीलिए वैधता प्रदान की गयी,ताकि जीवन का स्वाभाविक आनन्द भोगते हुए भी बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण पाया जा सके। आपातकाल में तो परिवार नियोजन के लिए युद्ध स्तर पर काम किया गया। अनेक प्रकार की सुविधाएँ और इनाम घोषित किये गये। आज भी ऐसा सब किया जा रहा है। पर परिणाम को सुखद या उत्साहवर्द्धक नहीं कहा जा सकता। फिर भी यह एक सुखद तथ्य है कि पढ़े-लिखे और समझदार लोग अब जनसंख्या वृद्धि से होने वाले विस्फोटक परिणामों को समझने लगे हैं। अतः उपयोगी और सम्भव उपाय भी काम में लाने लगे हैं। लोगों की अपनी सूझ-बूझ से ही यह कार्य सम्भव और सफल हो सकता है,जोर-जबरदस्ती या कानून के बल पर नहीं। अतः ज़रूरत है सूझ-बूझ जगाने की, धार्मिक अंध धारणाओं से ऊपर उठकर वास्तविकता पहचानने की। तभी जनसंख्या वृद्धि के भावी विस्फोट को रोका जा सकता है। तभी अपना वर्तमान और सारी मानवता का भविष्य सुरक्षित हो सकता है।

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