Tuesday, 25 December 2018

पुस्तक मेला पर निबंध। Essay on Book Fair in Hindi

पुस्तक मेला पर निबंध। Essay on Book Fair in Hindi

प्रस्तावना- पुस्तक मेले हमारे लिए वरदान हैं । ये पाठकों और लेखकों के संगम होते हैं । यहां पर सभी विषयों पर सभी प्रकार की पुस्तकें सरलता से मिल जाती हैं। सन् 2002 ई. को नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इण्डिया द्वारा पुस्तकों का वर्ष घोषित किया गया। प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेला आयोजित हुआ।

देखने के लिए उत्साह- इस आयोजन के बारे में हमें समाचार पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से पता चला था। मैं और मेरा मित्र इस महान पर्व को देखने के लिए उत्साहित थे। बचपन से ही मुझे पुस्तकें पढ़ने का बहुत पसंद है इसलिए मुझे इस मेले में जाने की बहुत इच्छा हुई इसलिए मैंने और मेरे मित्रों ने इस मेले में जाने की योजना बनाई. 

देखने योग्य कार्यक्रम- पुस्तक मेला देखने योग्य कार्यक्रम था। प्रत्येक स्थान पर विज्ञापन लगे थे। हर स्थान पर पुस्तकें ही पुस्तकें थीं। प्रत्येक हॉल अनेक स्टॉल में विभाजित था। हमारे देश में पब्लिशर्स की संख्या में वृद्धि हो रही है। हमारे यहाँ स्थानीय पब्लिशर्स, राष्ट्रीय पब्लिशर्स और अन्तर्राष्ट्रीय पब्लिशर्स हैं। इस पुस्तक मेले में बड़ी मात्रा में पुरुष, महिलाएँ और बच्चे थे।

आकर्षक घेरा- प्रत्येक घेरे को देखने का एक अलग ही आनन्द था। वे बच्चों की पस्तकें, विषयों की पुस्तकें, साहित्य और भाषाओं की पुस्तके, विज्ञापन, कला, वित्तीय प्रबन्ध, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, औषधियों, आयकर, शिक्षा से सम्बन्धित पुस्तक बेच रहे थे। इसके अतिरिक्त शब्दकोष की पुस्तकें भी थीं।

प्रत्येक घेरा प्रभावशाली था और बैठने की व्यवस्था भी उचित थी। एस चन्द कम्पनी सबको कॉफी बांट रही थी। हम बहुत थक गए थे। कॉफी पीकर हमारी थकान थोड़ी कम हुई। वहाँ बहुत से कैफे और आइसक्रीम पार्लर थे। मैंने कुछ पुस्तकें खरीद जिनकी मुझे आवश्यकता थी। मैं ठीक 8 बजे वहाँ से चल दिया।


उपसंहार- यह मेला देखना बड़ा सुखद अनुभव रहा जिसे मैं सदैव याद रखूंगा। मैं चाहता हूँ कि ऐसे पुस्तक मेले वर्ष में तीन बार आयोजित हों। जिससे हम अधिक से अधिक पढ़कर अपना दृष्टिकोण विस्तृत कर सकें।

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