Friday, 27 July 2018

महाराणा प्रताप का चरित्र चित्रण

महाराणा प्रताप का चरित्र चित्रण

maharana pratap ka charitra chitran
महाराणा प्रताप चित्तौड़ के शासक हैं। उन्होंने अकबर कि अधीनता स्वीकार नहीं की। वे भारतीय संस्कृति के सच्चे संरक्षक हैं। उनके चारित्रिक गुणों को निम्नलिखित बिंदुओं के रूप में समझा जा सकता है।

एक आदर्श भारतीय : महाराणा प्रताप भारतीय नायक के रूप में प्रस्तुत हुए हैं। उनके विशिष्ट एवं उत्कृष्ट गुणों के कारण मेवाड़ की जनता उन्हें एक जनप्रिय शासक मानती है। उच्च गुणों एवं मानवीय भावनाओं से संपन्न महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व अनुकरणीय है।

दृढ़ प्रतिज्ञ एवं कर्तव्यनिष्ठ : राणा प्रताप दृढ़निश्चयी एवं अपने कर्तव्य के प्रति अत्यधिक निष्ठावान हैं। वह अपने कर्तव्यों का पालन हर परिस्थिति में करते हैं।

स्वतंत्रता-प्रेमी : महाराणा प्रताप जीवन पर्यंत देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। दर-दर की ठोकरें खाने को विवश होने के बावजूद उन्होंने विदेशी मुगल शासकों की अधीनता स्वीकार नहीं की। आन के रक्षक राणा प्रताप एक सच्चे क्षत्रिय थे, जिन्होंने अपनी आन, मान और शान के आगे प्रत्येक वस्तु को तुच्छ समझा। इसी आन ने उन्हें अकबर से संधि नहीं करने दी और उनके इस गुण की प्रशंसा स्वयं अकबर ने भी की।

पराक्रमी योद्धा : राणा प्रताप वीर थे। हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध उनके शौर्य की गाथा गाते नहीं थकता। वह साक्षी है महाराणा प्रताप के पराक्रम का, उनकी युद्ध कुशलता एवं वीरता का।

भारतीय संस्कृति के रक्षक : महाराणा प्रताप भारतीय संस्कृति के सच्चे रक्षक एवं उसके पोषक हैं। अतिथि सत्कार की भारतीय परंपरा को वह अपने जीवन की विकट विषम परिस्थितियों में भी नहीं भूलते हैं। सन्यासी के रूप में अकबर के पहुंचने पर वह उसके सम्मुख कुछ प्रस्तुत नहीं कर पाने से दुखी हैं, क्योंकि उनके पास केवल घास की रोटियां उपलब्ध हैं।

इस प्रकार कहा जा सकता है की धैर्यवान, वीरता एवं शौर्य के प्रतीक, स्वतंत्रता के परम उपासक, अद्वितीय कष्ट सहिष्णु एवं श्रेष्ठ आचरण वाले महाराणा प्रताप एक आदर्श भारतीय नायक है।


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