Saturday, 6 May 2017

अम्बर की ऊंचाई POEM ON MOTHER

POEM ON MOTHER


अम्बर की ऊंचाई, धरती की ये गहराई
तेरे मुंह में है समाई, माई ओ माई,

तेरा मन
अमृत का प्याला, येही काबा येही शेवाला
तेरी ममता पावन दाई, माई ओ माई,


जी चाहे तेरे साथ रहूँ मैं बनके तेरा हमजोली
तेरे पास ना आऊं छुप जाऊं, यूँ खेलूं आँख मिचोली,


परियों की कहानी सुना के, कोई
मीठी लोरी गा के
कर दे सपने सुखदाई, माई ओ माई,


संसार के ताने बाने से घबराता है मन मेरा
इन झूठे रिश्ते नातों में, बस प्यार है सच्चा तेरा,


सब दुःख सुख में ढल जाएँ तेरी बाहें जो मिल जाएँ
मिल जाये मुझे खुदाई, माई ओ माई,


फिर कोई शरारत हो मुझसे नाराज करूँ फिर तुझको
फिर गल पे थापी मार के सीने से लगा ले मुझ को,


बचपन की प्यास बुझा दे अपने हाथ से खिला दे
पल्लू में बंधी मिठाई, माई ओ माई....  


कविता का श्रेय लेखक को जाता है। 

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Author:

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