Saturday, 13 May 2017

माँ पर कविता mother's hindi poem

माँ पर कविता Mother's hindi poem


मुझको हर हाल में बख़्शेगा उजाला अपना
चाँद रिश्ते में तो लगता नहीं मामा अपना



मैंने रोते हुएपोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना



हम परिन्दों कीतरह उड़ के तो जाने से रहे
इस जनम में तो न बदलेंगे ठिकाना अपना



धूप से मिल गए हैं पेड़ हमारेघर के
हम समझते थे कि काम आएगा बेटा अपना



सच बता दूँ तो ये बाज़ार-ए-मुहब्बत गिर जाए
मैंने जिस दाम में बेचा है ये मलबा अपना



आइनाख़ाने में रहने का ये इनआम मिला
एक मुद्दत से नहीं देखा है चेहरा अपना



तेज़ आँधी में बदल जाते हैं सारे मंज़र
भूल जाते हैं परिन्दे भी ठिकाना अपना

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1 comment:

  1. ईश्वर की अनमोल कृति ''माँ'' को नमन।

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