विपथगा कहानी का शिल्प और चरित्र चित्रण

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विपथगा कहानी का शिल्प और चरित्र चित्रण

विपथगा कहानी का शिल्प और चरित्र चित्रण: विपथगा कहानी की पृष्ठभूमि रूसी है। चारित्रिक विश्लेषणपूर्ण कथानकों वाली कहानियों में एकांतिक रूप से किसी चरित्र के अन्तर्बाह्य विश्लेषण पर कथानक का आरम्भ एवं विकास आधारित रहता है। ऐसी कहानियों के कथानक प्रायः मनोवैज्ञानिक एवं व्यक्ति चरित्र के आश्रित होकर रह गए हैं। कोई नितांत गौण घटना मानस प्रेरित कर देती है और कहानीकार उसके अन्तर्बाह्य विशलेषण के द्वारा कथानक का निर्माण करता जाता है। उस मनोविश्लेषण में उक्त चरित्र के गत जीवन की कतिपय अन्य घटनाएं भी उद्घाटित हो जाती है जो कथानक को गति प्रधान करती है । विपथगा ऐसी ही एक कहानी है।

अज्ञेय मूलतः कवि हैं, अतः उनकी दृष्टि एकांतिक रूप से व्यष्टिपरक दृष्टि है। अतः उनकी कहानियों के चरित्र प्रमुख रूप से व्यक्ति चरित्र होते है । 'विपथगा कहानी की 'मेरिया जीवन के विभिन्न स्तरों से अपनी आत्मा में व्याप्त विद्रोह के स्वर को बुलन्द करती है। इस कहानी में कथावाचक से आरंभ होता है और मेरिया इवानोठना इस कहानी की प्रमुख पात्र है । 

मेरिया इवानोवना का चरित्र चित्रण

मेरिया इवानोवना का चरित्र चित्रण :- 'विपथगा एक क्रांति संबंधी कहानी है। यह एक क्रांतिकारी स्त्री मेरिया इवानोठना की कहानी है। एक सशक्त और जीवंत और साहसी क्रांतिकारी स्त्री मेरिया इवानोठना अपने देश रूस की दुर्दशा पर क्षुब्ध है। मेरिया कातिल है, खूनी क्रांति की पक्षधर है । कहानी की नायिका 'मेरिया इवानोठना है, जो ऐसे परिवार की लड़की है जिसमें क्रांतिकारी अपनी साथियों पर विश्वास करते हैं, किन्तु वे सदस्य पर विश्वास नहीं करते, जो शोषक समाज के परिवार का अंग रहा हो। मेरिया अपने वंश में पहली क्रांतिकारिणी है, फिर भी क्रांतिकारियों में परित्यक्ता सी बनी रहती है। जैसे उसे त्याग दिया हो ऐसा बर्ताव उसके साथ होता रहता है। वह अपने साथियों में विश्वसनीय तब बनती है जब उसका सौभाग्य नष्ट हो जाता है। वह किसी का आधार बनकर भी निराधार बन गई। उसे अपने पिता की हत्या करनी पड़ी ।

मेरिया के अनुसार क्रांति आन्दोलन, सुधार, परिवर्तन कुछ भी नहीं है। क्रांति विश्वासों का, रूढ़ियों का, शास और विचार प्रणालियों का घातक, विनाशकारी और भयंकर विस्फोट है। इसका न आदर्श और न ध्येय है। क्रांति एक विपथगा है। 'विपथगा' कहानी में कथानक 'अशांति के बीज को बोने के साथ समाप्त हो जानी चाहिए, परन्तु मेरिया इस कहानी में अशांति का बीज बोकर इस कहानी को आगे बढ़ाती है। वह उस अशांति के बीज़ को अंत तक दबा नहीं सकती। मेरिया निस्वार्थ भाव से अपने राष्ट्र के लिए कार्य करती है। वह किसी को बताये बिना अपने क्रांतिकारी साथियों को बचाने में प्रयासरत रहती है। अंत में अपनी जान गंवाकर, राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति देती है । 

कथोपकथन की दृष्टि से अज्ञेय की कहानी परम श्लाघनीय है तथा अज्ञेय एक समर्थ एवं सफल कथोपकथन लेखक है। कहानी में दार्शनिकतापूर्ण कथोपकथन पर्याप्तरूपेण उपलब्ध है। 'विपथगा' कहानी का देशकाल रूस का है। इसमें पाश्चात्य राजनीतिक - क्रांतिपूर्ण वातावरण को अंकित किया गया है।

भाषा के माध्यम से कहानीकार अपनी रचनाओं का निर्माण करता है। उसकी भाषा उसकी संवेदना, प्रयोजन और संस्कार के अनुरूप स्पष्ट होती है। अज्ञेय की इस कहानी में तत्सम तद्भव, देशी और विदेशी शब्दों का प्रयोग मिलता है। 'विपथगा' में तत्सम शब्दावली प्रयुक्त हुई है - लावण्य, भीषण, तुषारमय, अस्त्र, शस्त्र, झंझावत, भावातिरेक, सदिच्छा, विध्वंसिनी हेमवर्ग, विषादयुक्त आदि ।

विपथगा कहानी में तद्भव शब्दों का भी प्रयोग हुआ है कविता (सं० काव्य) तुम (सं त्वम), गला (सं-ग्रीवा)।

'विपथगा कहानी में – फैशन, ओवरकोट, लेक्चरर, टेलीफोन आदि अंग्रेजी शब्दावली प्रयुक्त हुई है।

अतः विपथगा कहानी क्रांति संबंधी एक सर्वश्रेष्ठ रचना है। इस कहानी में हिंसा का विरोध हुआ है। कथा के अनुसार भाषा का प्रयोग हुआ है।

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