Friday, 3 June 2022

Hindi Essay on Ayurveda, "आयुर्वेद पर निबंध", "Ayurveda par Nibandh" for Students

Hindi Essay on Ayurveda, "आयुर्वेद पर निबंध", "Ayurveda par Nibandh" for Students

आयुर्वेद पर निबंध - Essay on Ayurveda in Hindi

आयुर्वेद पर निबंध : आयुर्वेद चिकित्सा की एक प्राकृतिक प्रणाली है, जिसकी उत्पत्ति 3,000 साल से भी पहले भारत में हुई थी। आयुर्वेद शब्द संस्कृत के शब्द आयु (जीवन) और वेद (विज्ञान या ज्ञान) से बना है। इस प्रकार आयुर्वेद का अर्थ है आयु को बढ़ाने वाला ज्ञान। आयुर्वेदिक उपचार टिकाऊ होता है। ये रोग की गहराई में जाकर उसे जड़ से खत्म करती है। 

आयुर्वेद पर निबंध - Essay on Ayurveda in Hindi

कहा जाता है कि आयुर्वेद को देवताओं ने ऋषियों और योगियों तक पहुंचाया। ऋषियों ने अपने ज्ञान को अपने शिष्यों को हस्तांतरित कर दिया। आयुर्वेद एक स्वदेशी चिकित्सा प्रणाली है जो वैदिक युग से इस हद तक लोकप्रिय और प्रचलित थी कि यह भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग बन गई। चरक संहिता के अनुसार आयुर्वेद का प्रयोजन है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य का संरक्षण करना एवं यदि व्यक्ति रुग्ण हो जाता है तो उसकी चिकित्सा करना।

आयुर्वेद का सिद्धांत पांच मूल तत्वों के अस्तित्व पर आधारित है, जो पूरे ब्रह्मांड के साथ-साथ हमारे शरीर के जीवन का आधार हैं। इन पांच तत्वों को ईथर (आकाश), वायु (हवा), अग्नि (तेजस); पानी (जल); पृथ्वी (धरती) के रूप में जाना जाता है। ये सिद्धांत हमारे पूरे शरीर विज्ञान को नियंत्रित करते हैं।

प्राचीन ऋषियों ने इन पांच तत्वों को 3 प्रकारों में वर्गीकृत किया - जिन्हें दोष कहा जाता है।

(1) वात (अंतरिक्ष और वायु के तत्वों का एक संयोजन);

(2) पित्त (अग्नि और जल का मिश्रण) और

(3) कफ (पानी और पृथ्वी का एक संयोजन)।

वात सिद्धांत (पवन) शरीर के संचार और गति को संचालित करता है। पित्त (अग्नि) शरीर में चयापचय प्रक्रियाओं से संबंधित है। यह अंतःस्रावी तंत्र (हार्मोन) और पाचन तंत्र (एंजाइम) के लिए जिम्मेदार है। पित्त के मुख्य अंग छोटी आंत, यकृत और ग्रहणी हैं, जबकि कफ शरीर की संरचना से संबंधित है जिसमें 7 शारीरिक ऊतक, हड्डियां और मांसपेशियां शामिल हैं।

आयुर्वेद प्रकृति के अनुसार जीवन जीने की सलाह देता है। आयुर्वेद कहता है कि पहला सुख निरोगी काया। भोजन को यदि उत्तम भावना और प्रसन्नता से पकाकर और उसी भावना से खाया जाए तो वह अमृत के समान गुणों का हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार भोजन को यदि उत्तम भावना और प्रसन्नता से पकाकर और उसी भावना से खाया जाए तो वह अमृत के समान गुणों का हो जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार भोजन को यदि उत्तम भावना और प्रसन्नता से पकाकर और उसी भावना से खाया जाए तो वह अमृत के समान गुणों का हो जाता है। इस प्रकार, आयुर्वेदिक उपचार में बीमारियों को रोकने के लिए व्यक्ति की जीवन शैली और खानपान की आदतों को बदलने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, साथ ही साथ दोषों में संतुलन बहाल करने के लिए शमन चिकित्सा (शांति या दर्दनाशक उपचार) और शोधन चिकित्सा (शुद्धि उपचार) भी की जाती है।


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