Thursday, 23 June 2022

दो महिलाओं के बीच बढ़ती महंगाई पर संवाद - Do Mahilaon ke Beech Badhti Mehangai par Samvad Lekhan

दो महिलाओं के बीच बढ़ती महंगाई पर संवाद लिखिये : In This article, We are providing बढ़ती महंगाई दो महिलाओं के बीच पर संवाद लेखन and Do Mahilaon ke Beech Badhti Mehangai par Samvad Lekhan for Students and teachers.

    बढ़ती महंगाई दो महिलाओं के बीच पर संवाद

    अनीता : मंजू, आजकल महंगाई कितनी बढ़ गई है।

    मंजू : सही कह रही हो अनीता, कोई भी खर्चा करने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है कि बहुत जरूरी हो तो ही करें।

    अनीता : सीधा-सादा खाना है और पढाई में ही इतना खर्चा हो जाता है कि और कुछ खर्चा करने की तो सोची भी नहीं जाती।

    मंजू : बिलकुल ठीक। पहले तो छुट्टी में कभी आसपास इधर-उधर चले जाते थे पर अब तो पेट्रोल और डीजल ही इतने महंगे हो गए हैं कि अब तो घूमने जाने की हिम्मत ही नहीं होती।

    अनीता : वो तो है ही। बाहर जायेंगे तो पेट्रोल-डीजल तो लगेगा ही, साथ में बाहर निकल कर बच्चों की फरमाईश भी शुरू हो जाती है। अब हर चीज के लिए बच्चों को मना भी तो नहीं किया जाता।

    मंजू : ऐसे में तो यही लगता है कि बस बच्चों को अच्छी पढ़ाई मिल जाये वही बहुत है। स्कूल की फीस भी तो कुछ कम नहीं हैं । ऊपर से ट्यूशन का खर्चा अलग।

    अनीता : हम तो पति-पत्नी दोनों कमाते हैं तो यह हाल है। जहाँ केवल एक जना ही कमाता हो तो सोचो वहाँ क्या हाल होंगे ?

    मंजू : सही बात है अनीता । महंगाई तो रुकने का नाम ही नहीं लेगी हमें ही अपने शौक छोड़ने पड़ेंगे। पर कभी-कभी बच्चों को समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

    अनीता : उन्ही के लिए हम लोग दिन-रात एक किये रहते हैं।


    दो महिलाओं के बीच बढ़ती महंगाई पर संवाद

    रचना : अलका बहन नमस्ते! कैसी हो?

    अलका : नमस्ते रचना, मैं ठीक हूँ पर महँगाई ने दुखी कर दिया है।

    रचना : ठीक कहती हो बहन, अब तो हर वस्तु के दाम आसमान छूने लगे हैं।

    अलका : मेरे घर में तो नौकरी की बँधी-बधाई तनख्वाह आती है। इससे सारा बजट खराब हो गया है।

    रचना : नौकरी क्या रोज़गार क्या, सभी परेशान हैं।

    अलका : हद हो गई है कोई भी दाल एक सौ बीस रुपये किलो से नीचे नहीं है।

    रचना : अब तो दाल-रोटी भी खाने को नहीं मिलने वाली।

    अलका : बहन कल अस्सी रुपये किलो तोरी और साठ रुपये किलो टमाटर खरीदकर लाई। आटा, चीनी, दाल, चावल मसाले दूध सभी में आग लगी है।

    रचना : फल ही कौन से सस्ते हैं। सौ रुपये प्रति किलो से कम कोई भी फल नहीं हैं। अब तो लगता है कि डाक टर जब लिखेगा तभी फल खाने को मिलेगा।

    अलका : सरकार भी कुछ नहीं करती महँगाई कम करने के लिए। वैसे जनता की भलाई के दावे करती है। जमाखोरों पर कार्यवाही भी नहीं करती है।

    रचना : नेतागण व्यापारियों से चुनाव में मोटा चंदा लेते हैं फिर सरकार बनाने पर कार्यवाही कैसे करे।

    अलका : गरीबों को तो ऐसे ही पिसना होगा। इनके बारे में कोई नहीं सोचता।


    Do Mahilaon ke Beech Badhti Mehangai par Samvad Lekhan

    सीमा : अरे बहन रीना आज के समय में कितनी महंगाई हो गई है।

    रीना : हाँ सीमा महंगाई तो मानो जैसे आसमान को छू रही हो।

    सीमा : कल की ही बात सुन लो कल मैं बाजार गई हफ्ते भर की सब्जियां लेने लेकिन सब्जियां इतनी महंगी थी। कि हफ्ते भर तो दूर 2 दिनों की सब्जियां भी नहीं आ पाई।

    रीना : यह बात तो सही है जहां पहले हफ्ते भर की सब्जियां आ जाती थी अब तो उन पैसों में सिर्फ प्याज ही मिल रहा है।

    सीमा : हाँ प्याज की कीमत तो 150  रुपए किलो हो गई है। इंसान खाए भी तो क्या खाए।

    रीना : जब से प्याज के दाम बढ़े हैं हमने तो प्याज खाना ही छोड़ दिया।

    सीमा : अब क्या कर सकते हैं महंगाई इतनी है।

    रीना : हाँ बात तो सही है तुम्हारी।


    Badhti Mehangai par Do Mahilaon ke Beech Samvad Lekhan

    सविता - बहन, आज पता है क्या हुआ ?

    कविता - क्या हुआ बहन ? बता !

    सविता - मैं आज परिवार के साथ बहुत दिनों के बाद खाना खाने के लिए होटल गई थीं।

    कविता - तो, अच्छी बात हैं न ! इसमें क्या बुराई हैं। 

    सविता - अरे सुन तो, खाने के बाद जब मैंने बिल देने के लिए गई तो बिल देख कर मेरे होश ही उड गए। 6 महीने पहले जो सब्जी 60 रुपये प्लेट थी अब वह बढ़कार 140 रुपये हो गया हैं।

    कविता - हाँ ! यार वह तो हैं। मैं आज सब्जी खरीदने के लिए गई थी तो, प्याज का दाम सुनकर ही चौंक गई। आज के समय में कहाँ 20 रूपये किलो बिकने वाला प्याज 100 रूपय किलों बिक रहा है।

    सविता - क्या 100 रूपये किलो ? अरे यह महंगाई तो आम लोगों की कमर ही तोड़ देगी। पता नहीं आगे क्या होगा।

    कविता - इतना ही नहीं, बढ़ते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिति को और भी ज्यादा खराब कार दे रही हैं।

    सविता - देखते हैं आगे क्या होता हैं !


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