Monday, 21 March 2022

दलितों या अनुसूचित जातियों की समस्याओं के निराकरण के उपाय

दलितों या अनुसूचित जातियों की समस्याओं के निराकरण के उपाय

दलितों के समस्याओं के निराकरण के लिए अनेकों कार्यक्रम या योजनाएं चलायी गयी हैं जिनका वर्णन निम्न प्रकार किया गया है।

  1. संवैधानिक व्यवस्थाएँ (Constitutional Provisions)
  2. स्वयंसेवी प्रयास (Valuntary Efforts) 
  3. कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes) 

1. संवैधानिक व्यवस्थाएँ (Constitutional Provisions) - इसके अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवस्थाएं उल्लेखनीय हैं -

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 के अन्तर्गत धर्म, जाति, लिंग, वंश, जन्म स्थान के आधार पर कोई भेद नहीं किया जायेगा। इनमें से किसी भी आधार पर राज्य द्वारा पोषित संस्थानों के उपयोग के बारे में किसी नियोग्यताओं, निवर्तन या शर्त के अधीन नहीं होगा!
  • संविधान के अनुच्छेद 16 के अन्तर्गत समस्त नागरिकों को समानता प्रदान की गयी, अर्थात धर्म, जाति, वंश, लिंग, जन्म-स्थान एवं निवास आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा।
  • संविधान के अनुच्छेद 17 के अन्तर्गत अस्पृश्यता का अंत कर दिया गया है तथा अस्पृश्यता को दण्डनीय अपराध घोषित किया गया है।
  • संविधान के अनुच्छेद 29 के अन्तर्गत किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्था में धर्म, जाति, वंश एवं भाषा के आधार पर प्रवेश के लिए वंचित नहीं किया जा सकता है।

2. स्वयंसेवी प्रयास (Valuntary Efforts) - दलितों की दयनीय दशा को देखकर प्रत्येक सहृदय व्यक्ति दुखित होता है। दलितों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कार्य महात्मा गाँधी ने किया है उनके राजनैतिक कार्यक्रमों में अनुसूचित जातियों का उत्थान, इनकी समस्याओं के निराकरण का प्रयास गाँधी जी के कार्यक्रमों का अंग रहा है। अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए स्वयं सेवी संगठन निरन्तर प्रयास कर रहे हैं।

3. कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes) - अनुसूचित जातियों के लिए सरकार और अन्य लोगों के द्वारा निराकरण के अनेक उपाय किये गये हैं। अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए राज्य सरकार और केन्द्र सरकार मिलजुल कर अनेक कार्य कर रही है, सरकार ने समस्याओं के समाधान के लिए अनेक योजनाएं बनायी हैं पंचवर्षीय योजना में अनुसूचित जातियों के कल्याण के कार्यक्रम प्रारम्भ किये गये हैं -

(i) संवैधानिक व्यवस्थाएँ (Legal Provisions) - भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों और सरकार द्वारा बनाये विधेयकों द्वारा दलितों के लिए यह व्यवस्था की गयी है कि सार्वजनिक एवं धार्मिक स्थलों के प्रवेश पर कोई पाबन्दी नहीं होनी चाहिए, किसी भी व्यक्ति को धर्म, जाति, वंश, भाषा के आधार पर किसी प्रकार की सुविधा से अलग नहीं किया जायेगा। इस तरह संसदीय अधिनियम में, विधान मण्डल वाले केन्द्र शासित प्रदेशों में किसी भी आरक्षण व्यवस्था से कोई वंचित नहीं रह सकता है।

(ii) आर्थिक सुविधाएँ (Educational Facilities) - दलित वर्ग आर्थिक क्षेत्रों में अत्यधिक पिछड़े थे। इनकी आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए अनेक प्रकार की आर्थिक सुविधाएँ प्रदान की गयी हैं, पंचवर्षीय योजना में आर्थिक विकास के लिए सामुदायिक विकास और लघु उद्योग कार्यक्रम लागू किये हैं, जिसके द्वारा दलितों का कल्याण हो सके। दलितों की आर्थिक उन्नति के लिए भूमि तथा आर्थिक सहायता द्वारा किसानों की तरह व्यवस्थित करने के लिए सरकार द्वारा अत्यधिक जोर दिया गया है। सरकारी नौकरियों मे भी दलितों के लिए 15 से लेकर 16.6 तक स्थान सुरक्षित हैं।


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