उदारवादी विचारधारा किसे कहते हैं? उदारवादी विचारधारा पर टिप्पणी कीजिए।

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उदारवादी विचारधारा किसे कहते हैं? उदारवादी विचारधारा पर टिप्पणी कीजिए। 

  • उदारवाद पर निबंध लिखिए। 
  • उदारवाद की उत्पत्ति किस प्रकार हुई?
  • उदारवाद की परिभाषा बताइए। 

उदारवाद का अर्थ  (The Liberal Ideology)

‘उदारवाद’ शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘‘Liberalism’ का हिन्दी रूपांतर है। Liberalism की उत्पत्ति अंग्रेजी भाषा के ‘Liberty’ शब्द से हुई है जिसका अर्थ है स्वतंत्रता। अतः उदारवाद का अर्थ है ‘व्यक्ति की स्वतंत्रता का सिद्धान्त।’ ‘Liberalism’’ शब्द लेटिन भाषा के ‘‘Liberalis’ शब्द से भी उत्पन्न माना जाता है। इस शब्द का अर्थ भी स्वतन्त्रता से है। उदारवाद को परिभाषित करने से पहले यह जानना भी आवश्यक है कि उदारवाद अनुदारवाद का उल्टा नहीं है, क्योंकि यह अनुदारवादी किसी भी प्रकार के परिवर्तन का तीव्र विरोध करते हैं, जबकि उदारवादी उन परिवर्तनों के समर्थक हैं जिनसे मानवीय स्वतन्त्रता का पोषण होता है। 

उदारवाद के बारे में यह कहना भी गलत है कि यह व्यक्तिवाद है। 19वीं सदी के अन्त तक तो उदारवाद और व्यक्तिवाद में कोई विशेष अन्तर नहीं था तथा व्यक्ति के जीवन में हस्तक्षेप न करने के सिद्धान्त को ही उदारवाद कहा जाता था, लेकिन आज व्यक्ति की बजाय समस्त समाज के कल्याण पर ही जोर देने की बात उदारवाद का प्रमख सिद्धान्त है। इसी उदारवाद को परिभाषित करते हुए 

उदारवाद की उत्पत्ति

18वीं, 19वीं सदी में विश्व में कई क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए और राजव्यवस्था में व्यक्ति व उसके अधिकारों की पुरजोर वकालत  प्रारम्भ हो गयी। इसी परिप्रेक्ष्य में उदारवादी विचारधारा का उदय व विकास हुआ। उदारवादी विचारधारा की प्रमुख मान्यता है कि व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होना ही चाहिए और राज्य को व्यक्ति की स्वतन्त्रता में कोई हस्तक्षेप नहीं करना च इस प्रकार उदारवाद की प्रारम्भिक कारण ने पूंजीवाद को जन्म दिया। इसके तहत समाज में असंतुलित विकास व शोषण प्रारम्भ हो गया। ऐसे में मार्क्सवाद ने उदारवाद को कड़ी चुनौती दी, फलस्वरूप 20 वीं सदी में उदारवाद सकारात्मक उदारवाद व नव-उदारवाद जैसे रूपों में परिवर्तित हो गया। वर्तमान में उदारवादी विचारधारा लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना की पक्षधर है।

उदारवाद की परिभाषा 

डेरिक हीटर के अनुसार-‘‘स्वतन्त्रता उदारवाद का सार है। स्वतन्त्रता का विचार इतना महत्वपूर्ण है कि उदारवाद की परिभाषा सामाजिक रूप में स्वतन्त्रता का संगठन करने और इसके निहिता अर्थों का अनुसरण करने के प्रभाव के रूप में की जा सकती है।’’

इनसाइक्लोपीडिया ऑफ ब्रिटेनिका के अनुसार-‘‘दर्शन या विचारधारा के रूप में, उदारवाद की परिभाषा प्रशासन की रीति और नीति के रूप में समाज के संगठनकारी सिद्धान्त और व्यक्ति व समुदाय के लिए जीवन-पद्धति में स्वतन्त्रता के प्रति प्रतिबद्ध विचार के रूप में की जा सकती है।’’

हेराल्ट लॉस्की के अनुसार-‘‘उदारवाद कुछ सिद्धान्तों का समूह मात्रा नहीं बल्कि दिमाग में रहने वाली एक आदत अर्थात् चित्त प्रकृति है।’’

डॉ0 आशीर्वादम् के अनुसार-‘‘उदारवाद एक क्रमबद्ध विचारधारा न होकर किसी निर्दिष्ट युग में कुछ देशों में व्यक्त की गई विविधतापूर्ण तथा परस्पर विरोधी चिन्तन- धाराओं से युक्त ऐतिहासिक प्रवृत्ति मात्र है।’’

मैकगवर्न ने कहा  है-‘‘राजनीतिक सिद्धान्त के रूप में उदारवाद को पृथक-पृथक तत्वों का मिश्रण है। उनमें से एक लोकतन्त्र है और दूसरा व्यक्तिवाद है।’’

सारटोरी के अनुसार-‘‘उदारवाद व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, न्यायिक सुरक्षा तथा संवैधानिक राज्य का सिद्धान्त तथा व्यवहार है।’’

लुई वैसरमैन के अनुसार-‘‘उदारवाद को भावात्मक तथा वैचारिक दृष्टि से एक ऐसे आन्दोलन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो जीवन के हर क्षेत्र में व्यक्तिगत स्वतन्त्रता की अभिव्यक्ति में समर्पित रहा है।’’

निष्कर्ष : साधारण शब्दों में उदारवाद एक ऐसा दर्शन या विचाधारा है जो सत्ता के केन्द्रीयकरण का प्रतिनिधित्व करने वाली किसी भी व्यवस्था का विरोध तथा व्यक्ति की स्वतन्त्रता का जीवन के प्रत्येक क्षेत्रा में समर्थन करती है। अपने संकीर्ण अर्थ में उदारवाद अर्थशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र जैसे विषयों तक ही सरोकार रखता है जहां पर वस्तुओं और सेवाओं के  उत्पादन व वितरण और शासकों के चुनने व हटाने की वकालत करता है। व्यापक अर्थ में यह एक ऐसा मानसिक दृष्टिकोण है जो मानव के विभिन्न बौद्धिक, नैतिक, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के विश्लेषण एवं एकीकरण का प्रयास करता है। सामाजिक क्षेत्र में यह धर्म निरपेक्षता का समर्थन करके धार्मिक रूढ़िवाद से मानवीय स्वतन्त्रता की रक्षा करता है। आर्थिक क्षेत्र में यह मुक्त व्यापार का समर्थक है। बुर्जुआ उदारवादियों के रूप में यह राज्य को आवश्यक बुराई बताकर व्यक्तिवाद का समर्थन करता है तो समाजवादियों के रूप में यह उत्पादन और वितरण पर राज्य के नियन्त्रण की वकालत करता है। इस तरह उदारवाद दो विरोधी प्रवृत्तियों के बीच में फंसकर रह जाता है। राजनीतिक क्षेत्र में भी यह व्यक्ति को अधिक से अधिक छूट देने का पक्षधर है ताकि व्यक्ति के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण  विकास हो।

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