Friday, 11 January 2019

विश्वनाथ का चरित्र-चित्रण - नए मेहमान

विश्वनाथ का चरित्र-चित्रण - नए मेहमान

‘नए मेहमान’ एकांकी का प्रमुख पात्र विश्वनाथ है। वह आधुनिक नगरों में रहने वाले मध्यमवर्गीय समाज का प्रतिनिधित्व करता है। उसके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं–
उदार व्यक्ति : विश्वनाथ महानगर में रहने वाला एक उदार व्यक्ति है। वह नौकरी करके अपने सीमित साधनों से अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। वह उन सभी समस्याओं से ग्रस्त है, जो आधुनिक नगरों में सीमित साधनों वाले व्यक्तियों को सहन करनी पड़ती हैं, किंतु वह उन सबको सरलता के साथ सहता है। वह अपनी पत्नी एवं बच्चों के सुख-दु:ख का पूरा ध्यान रखता है और अपने अपरिचित मेहमानों के आ जाने पर भी झँुझलाता नहीं है।
मकान की समस्या से पीड़ित : विश्वनाथ बड़े नगर में मकान की समस्या से दु:खी है। वह किराए पर छोटा-सा
मकान लेकर अपने परिवार के साथ जीवनयापन कर रहा है। वह दो वर्ष से हवादार, खुले और अच्छे मकान की तलाश में है। वह पड़ोसिन के दुर्व्यवहार को सहन करता हुआ संघर्षशील व्यक्ति की भाँति अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। मकान की समस्या पर प्रकाश डालता हुआ वह कहता है– ‘‘मकान मिलता ही नहीं। आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ। .......एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी, जो खाली छत पड़ी रहने पर भी बच्चों के लिए एक खाट नहीं बिछाने देते।’’
विनम्र एवं संकोची : विश्वनाथ विनम्र एवं संकोची स्वभाव का है। यही कारण है कि देर रात में आए अपरिचित मेहमानों से वह उनका स्पष्ट परिचय भी नहीं पूछ पाता और उनकी सेवा में लग जाता है। पड़ोसियों के निर्दयी और अशिष्ट व्यवहार पर भी वह उनसे कुछ नहीं कहता और क्षमा माँगते हुए कहता है, ‘‘अनजान आदमी से गलती हो ही जाती है। उसे क्षमा कर देना चाहिए। कल से ऐसा नहीं होगा।’’

समझौताप्रिय : विश्वनाथ परिस्थितियों से समझौता करना अच्छी तरह जानता है। नए मेहमानों के आने पर जब उसकी पत्नी रेवती सिर दर्द के कारण खाना बनाने में असमर्थता प्रकट करती है तो वह उससे कुछ कहे बिना बाजार से खाना लाने को तैयार हो जाता है और मेहमानों की चिंता करते हुए अपनी पत्नी से कहता है– ‘‘क्या कहेंगे कि रातभर भूखा मारा, बाजार से कुछ मँगा दो न!’’
अतिथि-सत्कार करने वाला : विश्वनाथ के हृदय में अतिथियों के प्रति सेवाभाव है। अपने सीमित साधनों में भी वह अतिथियों की सेवा करने की भावना रखता है। अपरिचित अतिथियों को भी वह प्रेम से बैठाता है, बर्फ मँगाकर ठंडा पानी पिलाता है, स्नान का प्रबंध करता है और अपनी पत्नी से खाना बनाने के लिए कहता है, -‘‘ कोई भी हो, जब आए हैं तो जरूर खाना खाएँगे, थोड़ा सा बना लो।’’ तथा गंतव्य स्थान का पता लगने पर अपने बच्चों द्वारा उन्हें सही स्थान पर पहँुचा देता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि विश्वनाथ सभ्य, सुसंस्कृत, संकोची, विनम्र व्यक्ति है। साधनों का अभाव होते हुए भी अतिथि सेवा का भाव उसके अंदर विद्यमान है।

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