Thursday, 10 January 2019

रेवती का चरित्र चित्रण - नए मेहमान

रेवती का चरित्र चित्रण - नए मेहमान

नए मेहमान’ एकांकी की मुख्य स्त्री पात्र विश्वनाथ की पत्नी रेवती है। वह मध्यम वर्ग के परिवार की गृहस्वामिनी का प्रतिनिधित्व करती है। उसके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं–

आवास की समस्या से पीड़ित— रेवती एक मध्यमवर्गीय सामान्य नारी है। उसका छोटा बच्चा बीमार है, मकान छोटा एवं कम हवादार है। वह और उसका बच्चा तेज गर्मी से पीड़ित है। आवास की समस्या से पीड़ित होकर वह झुँझला पड़ती है और कहती है- ‘‘जाने कब तक इस जेलखाने में सड़ना पड़ेगा।’’
पति परायणा एवं सहनशील— अपनी वर्तमान समस्याओं से पीड़ित होते हुए भी वह अपने पति से अत्यंत प्रेम करती है। वह खुद आँगन में लेटकर गर्मी में रात बिताने को तैयार है, परंतु पति को छत पर खुली हवा में सोने को विवश करती है। वह चाहती है कि उसके पति को कोई परेशानी न हो। वह अत्यधिक गर्मी में भी कष्ट उठाकर परिस्थितियों से समझौता कर लेती है। सहनशीलता उसका प्रमुख गुण है।
पड़ोसी के अशिष्ट व्यवहार से पीड़ित— रेवती के प्रति उसके पड़ोसियों का व्यवहार अच्छा नहीं है। वह अपनी पड़ोसन लाला की औरत के विषय में अपने पति से शिकायत भी करती है। विश्वनाथ जब लाला से बात करने को कहता है तो वह कहती है– ‘‘ क्या फायदा? अगर लाला मान भी जाए तो वह दुष्टा नहीं मानेगी।’’

तुनकमिजाज और शंकालु— रेवती परिस्थिति के कारण तुनकमिजाज हो गई है। अपरिचित मेहमानों के आने पर वह खाना नहीं बनाती और उनके प्रति शंका प्रकट करती हुई कहती है-‘‘दर्द के मारे सिर फटा जा रहा है, फिर खाना बनाना, इनके लिए और इस समय? आखिर ये आए कहाँ से हैं?
समझदार स्त्री— रेवती एक समझदार स्त्री है। विश्वनाथ संकोच के कारण मेहमानों से उनका परिचय पूछने में झिझकता है, परंतु रेवती एक समझदार स्त्री की भाँति विश्वनाथ को बार-बार उनका सही परिचय पूछने के लिए प्रेरित करती है। आखिर में पता चलता है कि मेहमान भूल से गलत स्थान पर आ गए हैं।

भाई के प्रति स्नेही— रेवती अपने भाई से बहुत स्नेह करती है इसलिए सिर दर्द होते हुए भी वह भाई के आने पर उसकी आवभगत करती है और खाना बनाने को तैयार हो जाती है और कहती है– मैं खाना बनाऊँगी। भैया भूखे नहीं सो सकते।’’ इस प्रकार हम देखते हैं कि अपने पति से विपरीत स्वभाव वाली रेवती, आधुनिक महिलाओं की भाँति समझदार गृहिणी है। पारिवारिक परिस्थितियों ने उसके स्वभाव को चिड़चिड़ा बना दिया है। उसके माध्यम से उदयशंकर भट्ट जी ने मध्यमवर्गीय नारी का सही चित्रण किया है।

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