Wednesday, 12 December 2018

बूढ़ी काकी कहानी का उद्देश्य। Boodhi Kaki ka Uddeshya

बूढ़ी काकी कहानी का उद्देश्य। Boodhi Kaki ka Uddeshya

Boodhi Kaki ka Uddeshya
कहानी का उद्देश्य - कहानी ही नहीं, मानव का प्रत्येक कर्म कोई न कोई उद्देश्य लिए रहता है। कहानी का उद्देश्य केवल पाठक या श्रोता के मन को आनन्दित करना ही नहीं होता, अपितु जीवन से जुड़ी किसी न किसी समस्या की ओर ध्यान खींचना होता है। उसका एक निश्चित लक्ष्य होता है। मुंशी प्रेमचन्द की कहानी ‘बूढ़ी काकी’ एक उद्देश्यपूर्ण कहानी है। इसमें कहानीकार ने बुद्धिराम जैसे लालची और स्वार्थी लोगों के प्रति समाज में घृणा की भावना पैदा की है और बूढ़ी काकी जैसे वृद्धों के प्रति मानवता का व्यवहार जगाया है। लेखक ने गंभीरता के साथ बूढ़ी काकी के साथ होने वाले जिस उपेक्षापूर्ण व्यवहार को उठाया है, वह अकेली काकी के ही साथ नहीं हैं, अपितु समाज में ऐसे कितने ही वृद्ध हैं। पंडित बुद्धिराम जैसे लालची लोग मीठी-मीठी बातों में बहला-फुसलाकर बूढों से उनकी संपत्ति अपने नाम लिखवा लेते हैं। 
लेखक ने वृद्धों के स्वभाव में खान-पान की प्रवृति दिखाकर बूढ़ी काकी को दोषयुक्त सिद्ध किया है। ‘बूढ़ी काकी’ कहानी में लेखक ने बुद्धिराम के लड़कों द्वारा न केवल उसे चिढ़ाया जाता है, अपितु उसके ऊपर मुंह के जूठे पानी के कुल्ले करना आम बात है। कभी काकी को नोचं कर भाग जाते हैं तो कभी बालों को खींचकर चले जाते हैं, लेकिन बुद्धिराम या उसकी पत्नी रूपा अपने लड़कों को डांटना तो दूर, मना तो नहीं करते। इस कहानी के माध्यम से कहानीकार कहना चाहता है कि आखिर बड़े-बूढों की की भी इच्छा होती है। अतः कहानी का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है कि वृद्धजनों के प्रति उपेक्षापूर्ण व्यवहार अनुचित है। इस प्रकार बूढ़ी काकी सोद्देश्य कहानी है।
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