Wednesday, 28 November 2018

कूड़ा बीनने वाले पर निबंध

कूड़ा बीनने वाले पर निबंध

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प्रस्तावना- कूड़ा बीनने वाला प्रत्येक नगर में पाया जाता है। ये गन्दे वस्त्र पहने होते हैं और इनके कंधे पर थैला लटका होता है। यह गलियों-गलियों में फिरते हैं। इसके हाथ में एक छड़ी होती है। जिससे वह कुत्तों को नियन्त्रित करता है। लोग इन्हें घृणा की दृष्टि से देखते हैं। यह गन्दगी के ढेर से गन्दी वस्तुएँ एकत्रित करता है।

अज्ञात व्यक्तित्व-कूड़ा बीनने वाले, सामान्यतया युवा होते हैं। वे दूर के गाँवों से नगरों में आते हैं। उनके माता-पिता द्वारा उन्हें त्याग दिया जाता है। ये अधिकतर अनाथ होते हैं। शाम को अपनी ये गन्दी वस्तुएँ रुपयों में बेच दे देते हैं और रात को खाना खाने के बाद कहीं भी सो जाते हैं।

जानवरों की तरह व्यवहार- जानवर के समान, वह ग्रीष्म ऋतु, शीत ऋतु में बहादुरी से कूड़े को बीनता है। वह किसी से शिकायत नहीं करता है। उसके आँसुओं को कोई नहीं देखता। उसका मुकाबला अधिकतर कुत्तों से होता है। सड़क के किनारे पर चावल और चपाती बेचने वाले उसके एक मात्र मित्र होते हैं। वो ही उसे कम रुपयों में खाना देते हैं। गन्दा शरीर, गन्दे वस्त्र, गन्दी वस्तुएँ, गन्दी चपातियाँ और गन्दा खाना उसकी सम्पूर्ण दुनिया होते हैं।

सामाजिक प्राणी के रूप में- कूड़ा बीनने वाला भी हमारी और आपकी तरह एक मनुष्य ही होता है। उसके पास भी भावनाएँ होती हैं। वह भी अपने उज्ज्वल भविष्य की सोचता है। उसके स्वप्न कभी महसूस नहीं होते। वह चरस खरीदता है और अपना भविष्य नष्ट कर लेता है। कूड़ा बीनने वाले अधिकतर ग्रीष्म ऋतु में रात को मरे हुए पाये जाते हैं। उस पर कोई ध्यान नहीं देता। अन्त में, उसके मृत शरीर को नदी में फेंक दिया जाता है।

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