Sunday, 17 June 2018

हिंदी कहानी चमत्कारी पत्थर और नन्हा भालू

हिंदी कहानी चमत्कारी पत्थर और नन्हा भालू 

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नन्हा भालू रोज नदी के किनारे टहलने जाता। रास्ते में पड़े सुंदर-सुंदर कंकड़ों को इकट्ठा करता। उसके घर में जहां देखो वहीं कंकड़ पत्थर का ढेर नजर आता। एक दिन उसे लाल रंग वाला एक पत्थर मिला। नन्हा भालू उस खूबसूरत पत्थर को देख कर बहुत खुश हुआ और उसका मजा लेते हुए चल रहा था। 

अचानक बारिश शुरू हुई। अगर बारिश रुक जाती तो कितना अच्छा लगता, नन्हे भालू ने सोचा। हैरानी की बात तो यह हुई कि बारिश तुरंत रुक गई। अरे वाह यह तो कोई चमत्कारी पत्थर लगता है। इसे हाथ में रखकर जैसा सोचते हैं, वैसा ही होता है। मैं इसे मां और पिताजी को दिखाऊंगा। 

नन्हा भालू खुशी-खुशी घर की ओर चल पड़ा। चलते-चलते अचानक नन्हे भालू के पैर रुक गए। बाप रे ! सामने एक शेर खड़ा था। नन्हा भालू काँप उठा। तभी उसे पत्थर की याद आई। उसने सोचा अगर मैं चट्टान बन जाता तो तुरंत ही नन्हा भालू एक चट्टान बन गया। उसके हाथ में जो लाल पत्थर था, वह नीचे गिर गया। अच्छा हुआ कि शेर के पंजों से नन्हा भालू बच गया। लेकिन नन्हा भालू अब फिर से पत्थर से भालू कैसे बने? पत्थर तो हाथ से छूटकर नीचे गिर गया था। 

उधर भालू के माता-पिता चिंता में पड़ गए। अंधेरा हो चुका था और भालू अभी तक घर नहीं लौटा था। उन्होंने पास पड़ोस में पूछताछ की मगर नन्हे भालू का अता-पता किसी को ना मिला। इस तरह कई दिन बीत गए। नन्हे भालू के माता-पिता उसकी तलाश में भटकने लगे। एक दिन वे घूमते-घूमते थक कर चट्टान पर जा बैठे। नन्हे भालू की माँ ने पास में पड़ा हुआ लाल पत्थर उठाया और कहा हमारे नन्हे को कंकड़-पत्थर बहुत पसंद हैं सोचते हुए उसने पत्थर को चट्टान पर रख दिया। चट्टान बने हुए नन्हे भालू ने सोचा काश मैं फिर से भालू बन जाऊं तो कितना अच्छा हो। पत्थर को तो माँ ने चट्टान पर रख दिया था, तुरंत भालू फिर से चट्टान से भालू बन गया। उसे देख उसके माता पिता बहुत खुश हुए और गोद में उठा लिया। खुशी के मारे उसे हवा में उछालने लगे।


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