Friday, 12 January 2018

ईसा मसीह पर निबंध। essay on jesus christ in hindi

ईसा मसीह पर निबंध। essay on jesus christ in hindi

ईसाई धर्म के समस्त अनुयायी ईसा मसीह को ईश्वर का पुत्र मानते हैं। ईसवी सन् की शुरूआत उनके आविर्भाव के बाद से ही हुई थी। उनसे पहले के समय को ईसा पूर्व कहा जाता है। उनका जन्म एक यहूदी परिवार में फिलिस्तीन में हुआ था। ईसाई धर्म की स्थापना भी ईसा मसीह ने की थी। ईसाई धर्म को मानने वाले सभी अनुयायी ईसा मसीह की पूजा करते हैं। उन्हें ईश्वर का अवतार मानते हैं। परंतु मुसलमान ईसा मसीह को पैंगबर मानते हैं वे उन्हें ईश्वर का अवतार नहीं मानते।

ईसा मसीह सत्य, अहिंसा और मानवता के आदर्श प्रतीक थे। वे सदैव सबके कल्याण के लिए उपदेश देते रहते थे। इसलिए वे जहाँ से भी गुजरते थे उनके अनुयायियों की भीड़ लग जाती थी। वे उनके उपदेश सुनने के लिए आतुर रहते थे। वे अक्सर पहाड़ पर चढ़कर उपदेश देते थे जिसे लोग सर्मन आन दी माऊंट कहते हैं। वे हमेशा भड़-बकरियों के साथ रहते थे।

एक बार वे काफिलो के साथ जा रहे थे। उनके आगे लोग थे पीछे भी लोग थे और बीच में वे चल रह थे। तभी एक बीमार वृद्धा उनके दर्शन करने हेतु भीड़ में घुस गई। वह शीघ्रता से उनके नजदीक पहुँच गई और उनसे आगे निकलकर उनके दर्शन करने की लालसा में उसका स्पर्श ईसा मसीह से हो गया। उनका स्पर्श होते ही चमत्कार हुआ। उस महिला का पाप (बुखार) तुरंत ठीक हो गया। अपने आपको स्वस्थ पाकर वह महिला भी चमत्कृत हो गई और उनके पैरों पर गिर पड़ी।

ईसा मसीह ने से सैंकड़ों चमत्कार किए थे तभी लोग उन्हें ईश्वर का पुत्र और ईश्वर का अवतार मानते थे। परंतु रोम का राजा उन्हें एक साधारण मनुष्य ही समझता था। इसलिए उसने उन पर राजद्रोह का आरोप लगा दिया। कदाचित् वह उनकी लोकप्रियात और चमत्कारों को देखकर विचलित हो गया था। अतः रोम के राजा ने ईसा मसीह पर राजद्रोह का आरोप लगाकर जेरूसेलम में उन्हें सूली पर चढ़ा दिया।

ऐसा माना जाता है कि सूली पर चढ़ने के तीन दिन बाद वे पुनः जीवित हो उठे थे। इसलिए लोग उन्हें ईश्वरीय शक्ति से युक्त ईशवर का अवतार¸ ईश्वर का पूत्र और मसीहा मानने लगे थे।

आज संपूर्ण विश्व में ईसाई समुदाय ईसा मसीह के सिद्धांतों¸ उपदेशों और शिक्षाओं का अनुकरण करता है तथा उनके बताए गए रासत् पर चलने का प्रयत्न करता है। ईसा-मसीह निश्चय ही एक महापुरूष थे। केवल ईसाई लोग ही नहीं अपितु सभी धर्म के लोग उन्हें श्रद्धा से नमन करते हैं।   

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