Saturday, 18 February 2017

पेड़ बचाओ कविता ( Save tree poem in hindi)

पेड़ बचाओ कविता ( Save tree poem in hindi)

Save tree poem in hindi)
Save tree poem in hindपेड़ बचाओ कविता
पेड़ का दर्द
कितने प्यार से किसी ने 
बरसों पहले मुझे बोया था
हवा के मंद मंद झोंको  ने
लोरी गाकर सुलाया  था ।

कितना विशाल घना वृक्ष
आज  मैं  हो  गया  हूँ
फल फूलो से लदा
पौधे से वृक्ष हो गया हूँ  ।

कभी कभी मन मेंएकाएक विचार करता हूँ
आप सब मानवों सेएक सवाल करता हूँ  ।
दूसरे पेड़ों की भाँतिक्या मैं भी काटा जाऊँगा
अन्य वृक्षों की भाँतिक्या मैं भी वीरगति पाउँगा ।

क्यों बेरहमी से मेरे सीनेपर कुल्हाड़ी चलाते हो
क्यों बर्बरता से सीनेको छलनी करते हो ।
मैं तो तुम्हारा सुखदुःख का साथी हूँ
मैं तो तुम्हारे लिएसाँसों की भाँति हूँ।

मैं तो तुम लोगों को देता हीं देता हूँ
पर बदले में कछ नहीं लेता हूँ  ।
प्राण वायु  देकर तुम परकितना उपकार करता हूँ
फल-फूल देकर तुम्हेंभोजन देता हूँ।

दूषित हवा लेकरस्वच्छ हवा देता हूँ
पर बदले में कुछ नहींतुम से लेता हूँ ।
ना काटो मुझेना काटो मुझे ये मेरा दर्द है।
यही मेरी गुहार है। यही मेरी पुकार  है।




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