अकाल और उसके बाद कविता की व्याख्या और उद्देश्य

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अकाल और उसके बाद कविता की व्याख्या और उद्देश्य

कवि परिचय : हिंदी के प्रसिद्ध मार्क्सवादी (प्रगतिवाद) कवियों में नागार्जुन का स्थान प्रथम है। जनकवि होने के नाते उनकी रचनाओं में पीड़ित मानवता का दुख दिखाई देता है। 'अकाल और उसके बाद' कविता अकाल की भीषण स्थिति और अकाल के बाद की स्थिति का जीता-जागता चित्रण पाठकों के सामने प्रस्तुत करती है ।

अकाल और उसके बाद कविता

कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास

कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास

कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त

कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त।

दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद

धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद

चमक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद

कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद।

अकाल और उसके बाद कविता की व्याख्या (भावार्थ)

भावार्थ : कविता के प्रारंभ की चार पंक्तियों में कवि ने अकाल की भीषण स्थिति का वर्णन किया है। अकाल की स्थिति इतनी भयावह है कि कई दिनों तक घर में चूल्हा तक नहीं जला, अर्थात घर में खाना नहीं बना। भूख के कारण लोगों का हाल बेहाल है, और घर के लोगों की यह स्थिति देखकर चूल्हा रो रहा है। घर में जो चक्की है वह उदास है, क्योंकि कई दिनों तक चक्की चलाकर दाने नहीं पिसे गए। यहाँ पर कवि ने बड़ी सुंदर शैली में चूल्हे और चक्की का मानवीकारण करके पाठकों के सामने अकाल की भयावह स्थिति का चित्र निर्माण किया है। कई दिनों तक छिपकलियाँ भीत पर गश्त लगाती रही, क्योंकि अकाल के कारण सब कीड़े मकोड़े भी मर गए थे। भूख के कारण कई दिनों तक चूल्हों की भी हालत खराब रही। अकाल इतना भयंकर है कि यहाँ मनुष्य दो वक्त की रोटी का मोहताज था वहाँ पशु पक्षी और प्राणियों की हालत तो कैसे होगी ?

अंतिम चार पंक्तियों में कवि ने अकाल के बाद की स्थिति का वर्णन किया है। अकाल खत्म होने के कारण कई दिनों के बाद घर में दाने आए। अनाज घर में आने से खाना बनाने के लिए चूल्हा जलाया गया। कई दिनों के बाद उस घर में चूल्हा जला और उस चूल्हे का धुआँ घर के ऊपर उठा। अन्न के अभाव के कारण घर के लोग कई दिनों से भूखे थे। पेटभर दो वक्त का खाना बनता देख घर के सभी लोगों की आँखें चमक उठी हैं। रोटी मिलने की उम्मीद से कौए ने भी अपने पंख खुजलाए।

अकाल और उसके बाद कविता का उद्देश्य

उद्देश्य : इस कविता में ग्राम जीवन की कथा बताई है। अकाल के कारण न अनाज उगता है, न सजीवों को खाने के लिए कुछ मिलता है। सर्वत्र एक उदासी मायूसी छाई रहती है। परंतु जैसे ही अकाल खत्म होता है, पूरा वातावरण सजीव हो उठता है । कवि उसी का वर्णन करता है।

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