Sunday, 30 January 2022

हन्ना आरेंट के राजनीतिक विचार का क्या महत्व है ?

हन्ना आरेंट के राजनीतिक विचार का क्या महत्व है ?

हन्ना आरेंट के राजनीतिक विचार

परम्परावादी दार्शनिक विचारधारा में हन्ना आरेंट का महत्व निम्नलिखित विचारों के आधार पर समझा जा सकता है

  1. मानव के मानसिक तथा वैयक्तिक पक्षों पर बल - एक साहित्यकार होने के कारण उन्होंने व्यक्ति के मानसिक अथवा वैयक्तिक पक्षों को अस्तित्ववादियो के समान प्रमुखता प्रदान की है। मानव की वैयक्तिक तथा आन्तरिक समस्याओं को समझने के लिए एक विशेष परिप्रेक्ष्य की आवश्यकता होती है। मनुष्य की चेतना तथा अनुभव हेतु तार्किक अन्वेषण अथवा वैज्ञानिक चिन्तन उपयोगी नहीं होता।

  2. भावना की भौतिक गतिविधि में निष्ठा - आरेन्ट अमूर्त विचारों के प्रति अरुचि अभिव्यक्त करती है तथा भावना की भौतिक गतिविधि में निष्ठा अभिव्यक्त करती है। व्यक्तिनिष्ठ अनुभूति को क्रमबद्ध नहीं किया जा सकता उसको केवल यथार्थ रूप से अनुभव किया जा सकता है। भावना एक आन्भाविक तथ्य है। यह व्यवहारवाद को मशीनी कुशलता का प्रेरक तथा सर्वाधि कारवाद की ओर ले जाने वाली विचारधारा मानती है।

  3. अबौद्धिकतावादी एवं अस्तित्ववादी विचारों का विरोध - आरेन्ट के अनुसार, अबौद्धिकतावादी एवं अस्तित्ववादी विचारकों ने जिन तर्को से मतैक्य द्वारा समर्थित तथा जनसहभाग द्वारा परिचालित जिस उदारवादी राज्य की सम्भावना का विवेचन किया है वह अधिक स्थायी नहीं माना जा सकता। उससे अराजकता का निमन्त्रण प्राप्त होता है तथा सर्वाधिकारी व्यवस्थाओं की स्थापना होती है। इसलिए मूल समस्या यह है कि ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया जाए जो एक साथ ही सार्वजनिक कार्यों में संलग्न व्यक्तियों में एकता के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत जीवन को अर्थ भी प्रदान करें।

  4. रोमन युगीन विचारधारा का समर्थक - रोमन युग में सत्ता, धर्म तथा परम्परा को मिलाकर एक सामाजिक राजनीतिक सम्मिश्रण तैयार किया गया था। इसी त्रयी के प्रति निष्ठा में पश्चिमी मनुष्य के अनेक भयानक संकटों तथा आक्रमणों के होते हए भी अस्तित्व को अर्थ प्रदान किया था। आरेन्ट की दृष्टि से यह अतिकालीन संश्लेषण उच्चतम एकत्व का प्रतीक है। वर्तमान में, हम केवल कान्तियों के समय में ही अपने जीवन को अर्थ प्रदान करने का प्रयास करते हैं। अतीत काल में यह त्रयी जीवन को निरन्तर अर्थ प्रदान करता था। 


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