Saturday, 11 December 2021

श्रीदेवी मुत्सद्दी की जीवन परिचय - Sridevi Mutsaddi Biography in Hindi

श्रीदेवी मुत्सद्दी की जीवन परिचय - Sridevi Mutsaddi Biography in Hindi

श्रीदेवी मुत्सद्दी का विवाह श्रीराम चन्द्र मुत्सद्दी के साथ हुआ था। वे कानपुर में आर्यसमाज भवन के निकट एक दुमंजिले भवन में रहते थे। श्रीदेवी बहुत उदार, स्नेहिल तथा एक सूझ बूझ वाली महिला थीं। उनकी सूझबूझ के कारण कई क्रांतिकारी पकड़े जाने से बच गए थे।

रामचन्द्र का परिचय जब चन्द्रशेखर आजाद से हुआ तो वे कहने लगे कि इसे आप अपना घर ही समझिए और वहाँ पर आते-जाते रहने की कृपा बनाए रखेंगे। आजाद हँसते हुए बोले कि हम लोगों के आते-जाते रहने से कहीं आप मुसीबत में न फंस जाएँ। इस पर श्री देवी ने कहा, मुसीबत! कैसी मुसीबत? आप लोग अपने जीवन को सतत संकट में डाले हुए हैं तो फिर आपके कारण थोड़ा बहुत संकट आयेगा भी तो कौनो बात नाहीं, हम लोग मोम अथवा मिट्टी के तो बने नहीं हैं। आप और आपके सभी साथी अवश्य आएँ। और थोड़ा बहुत दाल-दलिया तो हम जुटा ही सकते हैं। इस प्रकार क्रांतिकारियों के वहाँ आने-जाने का क्रम बना रहा।

एक बार आजाद उनके यहाँ ठहरे हुए थे, रक्षाबंधन का दिन था और श्री देवी थाल सजाकर अपने भाई को राखी बाँधने जा ही रही थी। अचानक दरवाजा बड़ी जोर से खट खटाया गया। आजाद तुरंत समझ गए कि पुलिस वाले आ गए हैं। उन्होंने लपक कर अपनी पिस्तौल उठाकर धोती में छिपा ली। श्रीमती मुत्सद्दी दरवाजा खोलने गईं। दरवाजा खोलते ही पुलिस वाला सीढ़ी चढ़कर ऊपर आ गया। आजाद ने उनसे राम राम की। अब इंस्पेक्टर श्री देवी को समझाते हुए बोला, आजकल गिरफ्तारियों का दौर चल रहा है, जरा श्रीरामचंद्र जी मुत्सद्दी को बता दीजिए कि बचकर रहें। मैं तो इस समय भाई को राखी बाँधने जा रही थी। अब आप आ गए हैं तो पहले आपको ही राखी बाँध दूं। इस प्रकार इंस्पेक्टर की कलाई पर राखी बाँधी और जोर से कहा, अरे! रामू जरा लड्डू तो ला, भाई साहब के रूमाल में लड्डू बाँधकर उनको विदा किया। आजाद, जो रामू बने थे, खिल-खिलाकर हँस पड़े और मुसीबत टल गई।

एक बार क्रांतिकारी लोग कुछ अधिक संख्या में आ गए। खिचडी बनाने का निश्चय हुआ। अब इतना बड़ा कोई बर्तन नहीं था। बाल्टी में खिचड़ी पकाई जा रही थी। उसी समय रामचन्द्र मुत्सद्दी के एक मित्र आ गए। आजाद और उनके साथी कोने में दुबक गए। उन्होंने पूछा, भाभी यह क्या पक रहा है? श्री देवी कहने लगी, खीर बन रही है। वे बाल्टी में झाँकने के लिए अंदर जाने लगे तभी श्री देवी कहने ली, भइया ! उधर मत जाइए। हमारी भाभी आई हुई हैं, बड़ी छूत-छात वाली महिला हैं। अगर उन्हें पता लग गया तो कहीं खीर फेंक ही न दें। इतना सुनकर न तो वे रसोई में गए और न ही वहाँ रुके।

बंबई के गवर्नर को मारने के लिए दर्गा भाभी को तैनात किया गया था। उस समय उनके साथ विश्वनाथ वैशंपायन, सुखदेव राज और पृथ्वीसिंह थे। वैशंपायन को कुछ सलाह-मशविरा के लिए कानपुर में आजाद के पास भेजा। लेकिन कानपुर पहुँचते ही उन्हें हैजा हो गया, उस समय श्री मुत्सद्दी ने ही डाक्टरों को बुलाकर उनका इलाज करवाया और स्वयं उनकी सेवा की।

क्रांतिकारियों को आश्रय देने के कारण मुत्सद्दी परिवार को भी काफी संकटों का सामना करना पड़ा, पुलिस ने काफी तंग किया, किन्तु इसमें भी वे आनंद का अनुभव कर रहे थे।


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