थामस रार्बट माल्थस का जीवन परिचय - Thomas Robert Malthus Ka Jeevan Parichay

थामस रार्बट माल्थस का जीवन परिचय : थामस राबर्ट माल्थस का जन्म सन् 1766 ई0 में इंग्लैण्ड में हुआ था। ये अर्थशास्त्र के प्रतिस्थापक एडम स्मिथ के अनुयायी

थामस रार्बट माल्थस का जीवन परिचय - Thomas Robert Malthus Ka Jeevan Parichay

नामथामस रार्बट माल्थस
जन्म13 फरवरी 1766
जीवनसाथीहेरिएट माल्थस
बच्चेहेनरी माल्थस, एमिली माल्थस, लुसी माल्थस 
शिक्षाकैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
पुरस्काररॉयल सोसाइटी के फेलो
मृत्यु: 23 दिसंबर 1834

जीवन परिचय : थामस राबर्ट माल्थस का जन्म सन् 1766 ई0 में इंग्लैण्ड में हुआ था। ये अर्थशास्त्र के प्रतिस्थापक एडम स्मिथ के अनुयायी और परम्परावादी अर्थशास्त्र के लोक विश्रुत विद्वान अर्थशास्त्री थे। थामस माल्थस के पिता का नाम डिनाइल माल्थस था जो सम्पन्न घराने के थे। माल्थस की शिक्षा-दीक्षा केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में हुई। शिक्षा प्राप्ति के अनन्तर ये स्थानीय गिरजाघर में पादरी नियुक्त हुए। यहीं से उन्होंने विश्व को जनसंख्या वृद्धि के भयंकर परिणामों से अवगत कराने वाला लेख 1798 में लिखा- An essay on the Principle of Population, as it effects the future improvement of the society with remarks on the speculation of Mr. Godwin and other writers". जिसमें आधार स्पष्ट किया, खाद्यान्नो की तुलना में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है जिसके परिणाम भयंकर होंगे। विचारों में निराशावादी इस्टिकोण के साथ माल्थस को आलोचना झेलनी पड़ी। अपने लेखा के समर्थन में उन्हें कई बार यूरोप के दोशों में आंकड़े एकत्र करने के लिए जाना पड़ा। जिसके आधार पर अपने निबन्ध का परिमार्जित संशोधित संस्करण 1803 ई0 में प्रकाशित कराया। जनसंख्या सिद्धान्त से जुड़े उनके छ: निबन्ध प्रकाशित हुए। माल्थस 1807 ई0 में एक कालेज में इतिहास तथा राजनीतिशास्त्र के प्राध्यापक थे। सन् 1834 में उनकी मृत्यु हो गयी। 

प्रेरक तत्व (Influencing Factors) : यदि माल्थस से सम्बन्धित ग्रन्थों एवं लेखों का अध्ययन करें तो आपको स्पष्ट हो जायेगा कि माल्थस के विचारों पर तत्कालीन आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितियों तथा उनके समकालीन एवं पूर्ववर्ती विचारकों के विचारों का प्रभाव पड़ा था। आइये, देखें कि माल्थस को अपने जनसंख्या सम्बन्धी विचारों को लिखने में जिन कारकों ने उन्हें प्रभावित कर प्रेरित किया है वे कौन-कौन हैं एवं उनका स्वरूप कैसा है? 

इंग्लैण्ड की आर्थिक स्थिति (Economic condition of England)

जिस समय माल्थस के जनसंख्या सम्बन्धी विचार परिपक्व हो रहे थे, वह एक ऐसा समय था जिसमें इंग्लैण्ड की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही थी। इंग्लैण्ड एवं निकटवर्ती स्थानों में अकाल, बीमारियाँ, गरीबी, गन्दगी व बेरोजगारी जैसे भयावह संकट चतुर्दिक व्याप्त थे। इंग्लैण्ड की कृषि अर्थव्यवस्था जो 18वीं शती के पूर्वार्द्ध में उन्नत अवस्था में थे उसकी स्थिति उत्तरार्द्ध में दिनोदिन बिगड़ती जा रही थी। एक ओर जहाँ जनसंख्या के बढ़ने से समाज पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा था वहीं कृषि की बिगड़ती हुई दशा ने अनेक संकटों को जन्म देकर सामाजिक जीवन को परेशानियों से भर दिया था। आयरलैण्ड में भयानक अकाल पड़ा था। भूमि पर जनसंख्या का दबाव बढ़ता जा रहा था। लगातार कई वर्षों से फसलों को क्षति पहुंच रही थी। युद्ध की विभीषिका के कारण आयात बन्द होने से अनाज के मूल्यों में वृद्धि अधिक हो गयी थी। भोजन की कमी के कारण इंग्लैण्ड ने अनाज नियम (corn laws) पारित किये थे। फिर भी शासन की अकर्मण्यता के कारण स्थिति संभालने में अपने को विवश पा रहा था। थॉमस ग्रीन ने इंग्लैण्ड की इस स्थिति से इस तरह वर्णित किया है। "कुशासन के अभिशाप के साथ-साथ दरिद्रता का अभिशाप भी जुड़ गया था और यह दरिद्रता देश की जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के साथ बढ़ती गई, जिसके फलस्वरूप दुर्भिक्ष ने देशों को एक नरक कुण्ड में परिवर्तित कर दिया।" माल्थस ने अनेक देशों का भ्रमण किया तथा इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि जनसंख्या के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। इस बिगड़ती हुई स्थिति ने माल्थस को विवश किया वह बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण एवं निवारण पर चिन्तन करे। 

औद्योगिक क्रान्ति (Industrial Revolution)

माल्थस का युग औद्योगिक क्रान्ति का युग था। जिस समय माल्थस अपने ज्ञान-चक्षु को खोल रहा था उस समय औद्योगिक क्रान्ति का सूत्रपात हो चुका था। कृषि क्षेत्र की बिगड़ती हुई दशा और उद्योगों में होने वाली वृद्धि ने आर्थिक असन्तुलन और अवस्था को और विषमपूर्ण स्थिति में कर दिया था। औद्योगिक क्रान्ति और पूंजीवादी व्यवस्था के समस्त दोष समाज में उभर कर सामने आ गये थे। पूंजीपति वर्ग श्रमिको का शोषण कर रहा था। औद्योगिक विकास ने पूंजीपतियों, धनिक वर्गों तथा समाज के शक्तिशाली व्यक्तियों के प्रभुत्व को बढ़ा दिया लेकिन दूसरी ओर निर्धन एवं श्रमिकों में बेरोजगारी, बीमारी, धन के असमान वितरण एवं निर्धनता की समस्या को घटाने के स्थान पर और बढ़ा दिया। इन स्थितियों का माल्थस पर गहरा प्रभाव पड़ा। माल्थस ने अनुभव किया कि देश की जनता जनसंख्या और खाद्य सामग्री के असंतुलन से पीड़ित है। औद्योगिक क्रान्ति उसका निराकरण करने के स्थान पर गरीबी एवं अमीरी की खाई को गहरी और चौड़ी करती जा रही है। उन सब समस्याओं का चिन्तन एवं निराकरण माल्थस ने अपने लेखों में किया। 

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