Friday, 13 October 2017

टेलीविजन पर निबंध। Essay on Televishin in Hindi

टेलीविजन पर निबंध। Essay on Televishin in Hindi

टेलीविजन पर निबंध। Essay on Televishin in Hindi

टेलीविजन एक महान आविष्कार है। यह विज्ञान का बहुत ही महत्वपूर्ण उपहार है। इसका आविष्कार सन 1926 में जे. एल. बर्ड द्वारा किया गया। थोड़े ही समय में दूरदर्शन लोगों के बीच बहुत ही लोकप्रय हो गया। इसमें विभिन्न चैनल्स और चौबीसों घंटे कार्यक्रम आते रहते हैं। हम अपनी पसंद के अनुसार कोई भी चैनल चुनकर देख सकते हैं। दूरदर्शन के माध्यम से हम अपने घर में आराम से बैठकर सम्पूर्ण विश्व की जानकारी पलभर में ले सकते हैं। 

यह शिक्षा का एक बहुत ही सस्ता और प्रभावी साधन है, साथ ही इससे सभी का मनोरंजन भी होता है। पहले जब टेलीविजन बना था तब यह ब्लैक एंड व्हाइट हुआ करता था। परन्तु आज रंगीन टी.वी. चलन में हैं। टी.वी. पर ख़बरें, खेलकूद, फ़िल्में, गाने, जादू के कार्यक्रम, धार्मिक कार्यक्रम, व बच्चों के लिए कार्टून चैनल्स प्रसारित किये जाते हैं। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी के लिए टेलीविजन पर कुछ न कुछ जरूर आता है। 

ये सभी चैनल अलग-अलग भाषाओं में भी उपलब्ध होते हैं। टी.वी ने कुछ हद तक भाषायी सीमाओं को ख़त्म कर दिया है। आज हम अंग्रेजी की कार्यक्रमों को भी हिंदी या अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में देख सकते हैं। इसमें विकल्पों की कोई सीमा नहीं है। घरेलु स्त्रियों के लिए भी कुकिंग चैनल्स व कार्यक्रम आते हैं। आजकल सभी लोग अपना ज्यादा से ज्यादा समय टी.वी. देखकर व्यतीत करना पसंद करते हैं। बच्चों के लिए अलग से एजुकेशनल चैनल आते हैं, जिससे बच्चें खेल-खेल में ही बहुत कुछ सीख सकते हैं। 

टीवी पर प्रसारित कोई भी सन्देश व खबर उसी क्षण हजारों-लाखों लोगों तक पहुँच जाती है। दूरदर्शन ने प्रत्येक व्यक्ति तक शिक्षा के महत्व को पहुंचा दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में टीवी का योगदान अतुलनीय है। आज टी.वी. की पहुँच देश के कोने-कोने तक है। यह हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। इसके द्वारा लोगों में जागरूकता आयी है, साथ ही इसने अंधविश्वासों को ख़त्म करने में भी सराहनीय भूमिका निभाई है। 

टेलीविजन का एक दूसरा पक्ष भी है। जहां एक ओर इसने सस्ता मनोरंजन उपलब्ध कराया है तो वहीँ दूसरी ओर इसकी वजह से लोगों की खेल-कूद और अन्य शारीरिक क्रियाओं पर बुरा प्रभाव भी डाला है। घंटों लोग टी.वी. के सामने बैठ कर अपना कीमती समय गंवा देते हैं। टी.वी देखने से हमारा दिमाग भी सुस्त हो जाता है व आँखें कमजोर हो जाती हैं। बच्चे टेलीविजन के कारण पढ़ने से जी चुराते हैं। कुछ कार्यक्रम व फ़िल्में तो ऐसी होती है जिन्हे देखकर हमारी भावी पीढ़ी बिगड़ रही है। 

टेलीविजन देखना चाहिए परन्तु उसका एक निश्चित समय होना चाहिए। टीवी का आदी नहीं बनना चाहिए क्योंकि कहा गया है की टी.वी. एक अच्छा सेवक है, परन्तु बुरा मालिक है। हद से ज्यादा टी.वी देखना हानिकारक हो सकता है। 

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