Thursday, 27 September 2018

छोटे भाई को बुरी आदतों में सुधार के लिए पत्र।

छोटे भाई को बुरी आदतों में सुधार के लिए पत्र

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16बी कृष्णा नगर
लखनऊ
दिनांक 7 मई 2018
प्रिय विकास,
विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि आजकल आप अपनी तथा घर की परिस्थिति को भूलकर कुसंगति में फंस गए हैं और हमें दिए गए आश्वासनों को भुला बैठे हैं। आपकी बहुत से व्यसनों को अपना कर अपने भावी जीवन के लिए अपने हाथों से कांटे बो रहे हैं। आपने सिगरेट, मांस और मदिरा जैसी घृणित और जीवननाशक वस्तुओं को अपनाकर अपने वंश का नाम कलंकित करना शुरू कर दिया है। अपना स्वास्थ्य भी चौपट कर दिया है। आप को अच्छी प्रकार से विदित है कि हमारे परिवार में इन वस्तुओं का नाम लेना भी बुरा माना जाता है। भैया, मुझे आप जैसे समझदार बालक से यह आशा कदापि न थी। आपका 9वी श्रेणी में अनुत्तीर्ण होना, इन्हीं दुर्व्यसनों का परिणाम है, यह बात अब अच्छी तरह समझ में आ गई है।

प्रिय भाई, आप स्वयं समझदार हैं। आज पूज्य पिताजी की छत्रछाया सिर पर ना होने के कारण परीक्षा की यह घड़ियां हम पर आई हैं। मुझे आजीविका प्राप्त करने के लिए घर से सैकड़ों मील दूर रहना पड़ रहा है और आप पर इस छोटी आयु में घर की देखभाल का उत्तरदायित्व आ पड़ा है। इस अवसर पर हमारे साहस और समझदारी की परीक्षा हो रही है। यदि हम अपने मनोविकारों पर नियंत्रण पा लेंगे, तो जीवन भर प्रशंसा के पात्र बने रहेंगे। यदि आज हम इन विकारों में बह जाते हैं, तो आयु भर रोना-पछताना ही हमारे भाग्य में लिख जाएगा।

मुझे पूर्ण आशा है कि आप अपनी भूल का अनुभव करेंगे और जीवन को सुधार कर उज्जवल बनाने का प्रत्येक संभव प्रयत्न करेंगे। सुबह का भूला यदि शाम को लौट आए, तो उसे भूला नहीं कहते।
आपका भाई
कमल किशोर

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