दीपावली पर निबंध हिंदी में: दीपावली, जिसे दीपोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को
दीपावली पर निबंध हिंदी में (दिवाली पर निबंध) / Essay on Deepawali in Hindi for Class 5. 6, 7, 8, 9 & 10
प्रस्तावना: दीपावली, जिसे दीपोत्सव या दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का सबसे प्रमुख और आनंदमय त्योहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है। 'दीप' का अर्थ है दीपक और 'आवली' का अर्थ है पंक्ति। इस प्रकार दीपावली का शाब्दिक अर्थ है दीपकों की माला या पंक्ति, क्योंकि इस दिन अनगिनत दीये जलाकर अंधकार को मिटाया जाता है और प्रकाश का स्वागत किया जाता है। यह त्योहार अधर्म पर धर्म की तथा दुख पर सुख की विजय का प्रतीक है।
दीपावली का धार्मिक और पौराणिक महत्व: दीपावली से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान राम (Lord Rama) से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब भगवान राम लंकापति रावण का वध करके चौदह वर्षों के वनवास (exile) के बाद अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर शहर को आलोकित कर दिया। तभी से यह पर्व “दीपावली” के रूप में मनाया जाता है।
पद्मपुराण के अनुसार इस दिन विष्णु भगवान ने माता लक्ष्मी से विवाह किया था। इसके अलावा, महाभारत के अनुसार पांडवों का 12 वर्ष का वनवास समाप्त होकर वे अपने राज्य लौटे थे। यह दिन जैन धर्म में भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर (Lord Mahavira) ने निर्वाण प्राप्त किया था।
दीपावली के पांच दिन: दीपावली का उत्सव पांच दिनों तक चलता है। प्रथम दिन धनतेरस होता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि (Lord Dhanvantari) का जन्म हुआ था, जो आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं। लोग इस दिन सोना, चाँदी या बर्तन खरीदते हैं। द्वितीय दिन नरक चतुर्दशी पर यमराज की पूजा होती है। यह दिन भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं और लोग स्नान करके पूजा करते हैं। नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है।
तीसरे दिन मुख्य दीपावली यानि बड़ी दिवाली मनाई जाती है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। लोग दीपक जलाकर अपने घरों को रोशन करते हैं और मिठाइयाँ बाँटते हैं। यह दिन समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
अगले दिन लोग भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं, जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठाकर वृंदावनवासियों को वर्षा और बाढ़ से बचाया था। कई स्थानों पर इस दिन अन्नकूट बनाया जाता है — जिसमें अनेक प्रकार के भोजन भगवान को अर्पित किए जाते हैं। और पांचवे दिन भाई दूज मनाया जाता है। यह पर्व बहन और भाई के प्रेम का प्रतीक होता है। इस दिन बहनें भाइयों की आरती उतारकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं।
दीपावली मनाने का तरीका: बड़ी दीपावली के दिन लोग प्रातःकाल स्नान कर अपने घरों की सजावट में लग जाते हैं। घरों की दीवारें, दरवाज़े और आँगन रंगोली, फूलों की माला और दीपों से सुसज्जित किए जाते हैं। इस दिन विशेष रूप से मिट्टी के दीये (earthen lamps) जलाए जाते हैं, जिनकी रोशनी अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। आधुनिक समय में विद्युत झालरें (electric lights) भी घरों और सड़कों को आलोकित करती हैं।
शाम को लक्ष्मी पूजन किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य एकत्र होकर धन की देवी लक्ष्मी और विघ्नहर्ता गणेश की आराधना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी जी घर में प्रवेश करती हैं, इसलिए घर को स्वच्छ, सुसज्जित और प्रकाशमान रखना शुभ माना जाता है। पूजन के बाद परिवार के लोग मिठाइयाँ बाँटते हैं, बच्चों को उपहार दिए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएँ देते हैं।
पटाखों की आतिशबाजी: जब सूर्य अस्त हो जाता है और रात्रि का अंधकार धरती पर उतरता है, तब दीपावली की असली छटा देखने लायक होती है। जैसे ही अंधेरा फैलता है, पूरा आकाश दीपों और आतिशबाज़ी की रोशनी से जगमगा उठता है। शहरों में सड़कों, मंदिरों, बाजारों और घरों की छतों पर दीपों की पंक्तियाँ जल उठती हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो धरती पर तारे उतर आये हों।
आकाश में रंग-बिरंगी पटाखों (fireworks) की चमक से एक अद्भुत नजारा बनता है। हाथों में फुलझड़ियाँ (sparklers) चमकती हैं, अनार से उठती रंगीन लपटें आसमान में नृत्य करती हैं, और रॉकेट रात के अंधेरे को चीरते हुए आसमान तक जा पहुँचते हैं। छोटे बच्चे अपने माता-पिता के साथ ख़ुशी और उत्साह से इन नज़ारों का आनंद लेते हैं। बुजुर्ग आँगन में बैठकर दीपों की लौ के साथ अपनी यादों को ताज़ा करते हैं।
हालाँकि, आज के समय में यह भी समझ बढ़ी है कि अत्यधिक आतिशबाज़ी से पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। इसीलिए अब कई लोग हरित (green) या ईको-फ्रेंडली दीपावली मनाने की पहल कर रहे हैं, जिसमें दीयों, फूलों और पारंपरिक संगीत से ही उल्लास व्यक्त किया जाता है।
दीपावली का आर्थिक प्रभाव (Economic Impact of Diwali): दीपावली का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। यह व्यापार (business) और खरीदारी (shopping) का सबसे व्यस्त मौसम होता है। कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाइयाँ, गहने, उपहार — सबकी बिक्री तेजी से बढ़ती है। छोटे व्यापारियों और कारीगरों को भी इस समय अच्छी आमदनी होती है।
इस त्योहार से लाखों लोगों को रोजगार (employment) मिलता है — चाहे वे दीये बनाने वाले कुम्हार हों, मिठाई बेचने वाले हों या सजावट का सामान तैयार करने वाले हों।
उपसंहार: निष्कर्षतः दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, प्रकाश और सकारात्मकता (positivity) का भाव है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, यदि हम सच्चाई और भलाई के मार्ग पर चलते रहें, तो विजय अवश्य प्राप्त होगी। इसलिए हमें दीपावली को केवल बाहरी उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति के पर्व के रूप में मनाना चाहिए।
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