टूटा हुआ पहिया कविता की व्याख्या और उद्देश्य

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टूटा हुआ पहिया कविता की व्याख्या और उद्देश्य

टूटा हुआ पहिया कविता की व्याख्या और उद्देश्य

कवि परिचय : धर्मवीर भारती नई कविता के प्रमुख कवि हैं। वे एक श्रेष्ठ कवि, नाटकाकर, उपन्यासकार और विचारक रहे हैं। 'टूटा पहिया, कविता सात गीत वर्ष' संग्रह से ली गई है। महाभारत की पौराणिक कथा में चक्रव्यूह में फँसे वीर अभिमन्यु ने रथ के टूटे पहिए के द्वारा ब्रह्मास्त्रों से लोहा लिया था। यह प्रसंग आज भी प्रासंगिक है। इसमें अंकित अभिमन्यु आज की नई पीढ़ी के युवकों का प्रतीक है। वह सत्य, मूल्य और चरित्र रूपी टूटे हुए पहिए लेकर बड़ों के द्वारा रचे गए चक्रव्यूह को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।

टूटा हुआ पहिया कविता की व्याख्या

व्याख्या/भावार्थ : कवि कहता है कि आज का समय भी वैसा ही है। न जाने कब इन दृष्ट लोगों के द्वारा रचित चक्रव्यूह में आज का कोई दुस्साहसी युवक आकर घिर जाए। अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी ये सारे बड़े-बड़े लोग पैसा, राजनीति, पुलिस, गुंडे, व्यवस्था आदि अपने शस्त्रों से उसे कुचल देना चाहेंगे। तब सत्य, चरित्र, मूल्य, नैतिकता रूपी टूटे हुए पहिए से बड़ी-बड़ी सत्ता का सामना कर सकते हैं।

कवि कहता है आज चरित्र टूट रहा है मूल्य टूट रहे हैं, नैतिकता टूट रही है। पर हमें इसे फेंकना नहीं चाहिए। इतिहास में हम देखते हैं कि जब-जब अधर्मी लोगों ने सत्य को कुचल देना चाहा है। उन्हें पराजित करने के लिए टूटा पहिया काम आ सकता है। अर्थात मूल्य, सत्य ही मदद कर सकते हैं।

टूटा हुआ पहिया कविता का उद्देश्य

कविता का उद्देश्य : कवि युवकों से करना चाहता है कि संघर्ष का सामना करते समय टूटा पहिया याने गौण चीज भी काम आ सकती है। अपनी नीतिमता, चारित्र्य के बलपर युवक असत्य का सामना कर सकते हैं।

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