लोककथा और पौराणिक कथा में अंतर

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लोककथा और पौराणिक कथा में अंतर

लोककथा और पौराणिक कथा में अंतर: पौराणिक कथा और लोककथा आदिकालीन मानव के मौखिक परंपरागत साहित्य हैं। दोनों में एक कथानक होता है, लेकिन उस कथानक का आधार पृथक होता है। पौराणिक कथाएं पुराणों में पाई जाती हैं। प्राचीन होने के कारण भी इन्हें पौराणिक कहा जा सकता है। इनमें सृष्टि की उत्पत्ति, देवी-देवताओं का वर्णन और जल, आकाश, वायु, सूर्य, अग्नि आदि प्राकृतिक तत्वों का निरूपण होता है। इनका लक्ष्य सृष्टि के गंभीर रहस्य को सुलझाना होता है। आदिकालीन मानव के धार्मिक विधि-विधानों का रहस्य पौराणिक कथाओं में ही अंतर्निहित है। लोककथाओं का उद्देश्य मनोरंजन है। उनमें कल्पना की प्रधानता होती है। पौराणिक कथा में धार्मिकता की आवश्यकता है, लेकिन लोककथा में यह आवश्यक नहीं। पौराणिक कथाएं सत्य मानी जाती हैं, लेकिन लोककथाएं नहीं। 

एक बात और ज्ञातव्य है कि पौराणिक शब्द का तात्पर्य पुराणों से नहीं है। इसका अर्थ 'प्राचीन' अधिक समीचीन है। युग-युगांतर से जनजाति या समाज की सृष्टि की रचना तथा उत्पत्ति के संबंध में मूल धारणा को पौराणिक कथा कहा जाता है। जिन कथानकों में सृष्टि की उत्पत्ति, रचना, विकास, नाश आदि का वर्णन हो, दैवी घटना या देवी-देवताओं का वर्णन हो, जिसे जनजाति सत्य मानती हो और प्राचीन काल में घटित मानी जाती हो, उन्हें पौराणिक कथा कहा जाता है।

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