भगत की गत कहानी का सारांश - Bhagat ki Gat Summary in Hindi

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भगत की गत कहानी का सारांश - Bhagat ki Gat Summary in Hindi

भगत की गत कहानी का सारांश - उस दिन भगत जी की मृत्यु हुई याने भगतजी स्वर्गवासी हो गए। लेकिन उन्हें तो नरक की प्राप्ति हुई, वे नरकवासी हो गए। सारा मुहल्ला उन्हें याद करता है। भगत जी मंदिर में आधी रात तक भजन करते थे। किसी श्रद्धालु से लाउड—स्पीकर लगवाकर कीर्तन करवाते थे । एक अखंड कोलाहल मचा रहता था। मुहल्लोवालों ने इसका विरोध किया तो उन्होंनें भक्त को इकट्ठा किया और वे दंगा करने उतारू हो गए। ऐसे ईश्वर भक्त नरक कैसे पहुँचेंगे... स्वयं उनकी आत्मा को यह मंजूर नहीं था। अतः वे भगवान से पूछने के लिए स्वर्ग के द्वारा पर पहुँचे। चौकीदार ने उन्हें रोका और टोका। बिना टिकट अंदर जाना मना था। भगत जी आज तक बिना टिकट ही यात्रा करते, सिनेमा देखते थे। आखिर वे दफ्तर पहुँचे जहाँ बड़े देवता पाप-पुण्य की फाइलें लेकर बैठे थे। भगत जी उनकी चापलूसी और खुद की प्रशंसा करने लगें। अधिकारी को यह मामला पेचीदा - सा लगा। पाप-पुण्य पर तो स्वर्ग-नरक मिलनेवाला था। भगतजी को विश्वास था कि उन्हें केवल स्वर्ग ही मिलेगा। वे अपने पुण्य का हिसाब गिनने लगे। अब तक उन्होंने केवल भगवान भक्ति की, भजन किए। कभी न झूठ कहा न कभी चोरी की। पर स्त्री को माता के समान माना, कभी न किसी की हत्या की न पाप किया। भगत की यह आत्मस्तुति उनके अहं की दया द्योतक थी। अधिकारी ने भगत को भगवान के सामने पेश किया। अब वे भगवान की स्तुति करने लगे। जिससे भगवान बोर हो गए भगवान ने भगत की गलतफहमी को दूर किया। लाउड स्पीकर लगाकर भगवान की पूजा करना भगवान को मंजूर नहीं था। उन्होंनें कहा कि वे बहरे नहीं हैं और भक्ति का विज्ञापन किया नहीं जाता। भगत का पहला अपराध था कि वह मोहल्लावालें की नींद हराम करते थे उनके मोहल्ले में रहनेवाले रमानाथ बीमार थे आवाज के कारण उनकी तबीयत बिगड गई। वे स्वर्ग पहुँचे। दूसरा अपराध उनके मुहल्ले में रहनेवाला सुरेंद्र नाम का छात्र परीक्षा में फेल हुआ और उसने आत्महत्या की। वास्तव में उसने भगत को प्रार्थना की थी कि परीक्षा के दिनों में वे लाउड स्पीकर मत लगाए। इस तरह भगतजी ने अप्रत्यक्ष रूप में दो हत्याएँ की। भक्ति के नाम पर पांखड करते हुए सामाजिकता को हानि पहुँचाई। भगवान ने उन्हें नरक भेजने का आदेश दिया। भागते हुए भगत को यमदूतों ने पकड़कर सीधा 'नरक' भेज दिया। एक धार्मात्मा बनने का शौक रखनेवाले भगत की यही गत हो गई। 

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