Wednesday, 14 September 2022

अधजल गगरी छलकत जाय मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

अधजल गगरी छलकत जाय मुहावरे का अर्थ - अल्पज्ञानी द्वारा अधिक ज्ञान का प्रदर्शन, अधकचरा व्यक्ति अधिक इतराता है, ओछा व्यक्ति अधिक दिखावा करता है, कम ज्ञान होने पर भी अधिक दिखावा करना।

Adhjal Gagri Chalkat Jaye Muhavare ka Arth - Alpgyani dwara adhik gyan ka pradarshan, Adkachra Vyakti Adhik Itrata hai, Ochha vyakti adhik dikhava karta hai, kam gyan hone par bhi adhik dikhava karna.

अधजल गगरी छलकत जाय मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग: अंग्रेजी का ज्ञान न होने के बावजूद विजय अंग्रेजी में बात करता है जिसके कारण उसे देखकर लोग अधजल गगरी छलकत जाय का उदहारण देने लगे हैं। 

वाक्य प्रयोग: थोड़ा सा पैसा आने पर इंसान कितना बदल जाता है, तभी कहा गया है अधजल गगरी छलकत जाय।

वाक्य प्रयोग: थोड़ी से कविताओं को याद क्या कर लिया, खुद को बहुत बड़ा कवि समझने लगे। ठीक ही कहा गया है कि अधजल गगरी छलकत जाय, भरी गगरिया चुपके जाय। 

वाक्य प्रयोगराजू महात्मा गाँधी के विषय में बहुत देर से बोलता जा रहा था कि अचानक किसी ने पूछा गाँधी जी का जन्म कब हुआ था तो वह शर्मिंदा हो गया। इसी को कहते हैं अधजल गगरी छलकत जाय। 

यहाँ हमने अधजल गगरी छलकत जाय मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग समझाया है। अधजल गगरी छलकत जाय मुहावरे का अर्थ होता है अल्पज्ञानी द्वारा अधिक ज्ञान का प्रदर्शन, अधकचरा व्यक्ति अधिक इतराता है, ओछा व्यक्ति अधिक दिखावा करता है, कम ज्ञान होने पर भी अधिक दिखावा करना। इस प्रकार जब किसी बर्तन में कम जल होता है तो वह छलकता है वैसे ही अल्पज्ञानी मनुष्य भी ज्ञान का अधिक दिखावा करता है। 


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