Thursday, 21 July 2022

फूल और कांटे के बीच संवाद लेखन - Phool aur Kaante ke Beech Samvad Lekhan

फूल और कांटे के बीच संवाद लिखिए। : In This article, We are providing फूल और कांटे के बीच संवाद लेखन and Phool aur Kaante ke Beech Samvad Lekhan for Students and teachers.

    फूल और कांटे के बीच संवाद लेखन

    फूल : कांटे भाई, सुबह से क्या सोचे जा रहे हो ?

    काँटा : बन्धु मैं यही सोच रहा था कि तुम्हें अत्याचार सहना करना पड़ता है। 

    फूल : तुम्हे ऐसा क्यों लगता है भाई ?

    काँटा : माली तुम्हें निर्दयतापूर्वक भरी जवानी में तोड़ ले जाता है। माला बनाने के लिए सुई में तुम्हारा पत्तियाँ छेदता है। यह अत्याचार नहीं तो और क्या है ?

    फूल : ( चिढ़कर कहा ) मैं अपने को भाग्यवान मानता हूँ। माली का कृतज्ञ हूँ। जिसने मेरे नगण्य से अस्तित्व को देवताओं और महामानवों के गले का हार बना दिया।

    काँटा : तुम चाहे जो भी कहो पर मैं जानता हूँ कि जब माली या बच्चे तुम्हे तोड़ते हैं तो तुम्हे कितना दर्द होता है। 

    फूल : मुझे छोडो और अपनी सोचो। इतने सुन्दर पौधे में जन्में होने पर भी तुम्हें काँटे का कलेवर मिला जिसने भी छुआ तुम्हें कोसा और अपशब्द कहे। सोचो तुम्हारा जीवन कितना दुर्भाग्यपूर्ण है। 

    काँटा : मैं किसी को तुम्हें नहीं छूने देता। जब कोई तुम्हारे ऊपर हाथ डालता है तो मैं उसे दण्डित करता हूँ इसलिए यदि मैं अपने भाई की जीवन रक्षा करने के कारण यदि बदनाम होता हूँ तो ज्यादा भाग्यवान कौन होगा। 

    फूल : मुझे माफ़ कर दो भाई, मैं अपनी सुंदरता के कारण अहंकारी हो गया था। 


    Phool aur Kaante ke Beech Samvad Lekhan

    फूल : अरे भाई कांटे आज तुम आधे अधूरे क्यों लग रहे हो?

    काँटा : हां भाई मैं अधूरा इसलिए लग रहा हूं क्योंकि मैं टूट गया हूं ।

    फूल : कैसे तुम्हें किसने चोट पहुंचाई ?

    कांटा : आज सुबह एक शैतान बच्चा तुम्हें तोड़ने के लिए आया था । उसी दौरान में उसके हाथ में चल गया जिस वजह से उसने मुझे ईट से मारा । और जब उसके हाथ से खून आया तो वह चला गया।

    फूल : अच्छा तो इसका अर्थ यह हुआ कि तुम मुझे बचाते हुए घायल हो गए मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ ।

    काँटा : नहीं नहीं ! इसमें तुम्हें दुखी होने की जरूरत नहीं है यह तो मेरा फर्ज है ।

    फूल : मुझे समझ नहीं आ रहा मैं किस प्रकार तुम्हारा आभार व्यक्त करूं धन्यवाद काटा भाई।  


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