Tuesday, 26 July 2022

मेरा प्रिय शहर लखनऊ पर निबंध - My City Lucknow Essay in Hindi

मेरा प्रिय शहर लखनऊ पर निबंध : हर किसी का कोई न कोई प्रिय शहर होता है। इसी प्रकार मेरा प्रिय शहर है लखनऊ। मेरे लिए लखनऊ वह शहर है जहाँ मैंने अपना बचपन बिताया। मैं इस शहर की गली-गली से परिचित हूँ। इसी कारण मुझे मेरा शहर लखनऊ अतिप्रिय है। My City Lucknow Essay in Hindi

मेरा प्रिय शहर लखनऊ पर निबंध - My City Lucknow Essay in Hindi

हर किसी का कोई न कोई प्रिय शहर होता है। इसी प्रकार मेरा प्रिय शहर है लखनऊ। मेरे लिए लखनऊ वह शहर है जहाँ मैंने अपना बचपन बिताया। मैं इस शहर की गली-गली से परिचित हूँ। इसी कारण मुझे मेरा शहर लखनऊ अतिप्रिय है। 

लखनऊ गोमती नदी के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है। लखनऊ शहर यह उत्तर प्रदेश की राजधानी है। यहां अधिकांश लोग हिंदी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो विश्वप्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। लखनऊ भारत में शिया इस्लाम का केंद्र है जिसमें भारत में सबसे ज्यादा शिया मुस्लिम आबादी है।

मेरा प्रिय शहर लखनऊ पर निबंध

लखनऊ की स्थापना नवाब आसफ-उद-दौला द्वारा की गयी थी। उन्होंने इसे अवध के नवाबों की राजधानी के रूप में पेश किया। लखनऊ को आज 'अदब और नवाबों का शहर' कहा जाता है। लखनऊ को नवाबों का शहर कहने का एक मात्र कारण यह है कि18वीं और 19वीं सदी में लखनऊ पर नवाबों का राज था। आज भी आपको लखनऊ में ऐसे लोग मिल जाएंगे जो नवाबों के तरह रहते हैं।

इस शहर का इतिहास सूर्यवंशी के काल का है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण को यह क्षेत्र सौंप दिया था। लक्ष्मण ने गोमती नगर के तट पर एक नगर बसाया, जिसे लक्ष्मणावती, लक्ष्मणपुर या लखनपुर के नाम से जाना गया। यही नाम बाद में बदल कर लखनऊ हो गया। नगर के पुराने भाग में एक ऊंचा टीला है, जिसे आज भी 'लक्ष्मण टीला' कहा जाता है। 

लखनऊ की चिकनकारी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। चिकन के वस्त्र विश्व के बहुत से देशों में लोगों को बहुत पसंद आते हैं।लखनऊ का नॉनवेज बहुत प्रसिद्ध है। खास तौर पर यहां के कबाब और बिरयानी बहुत प्रसिद्ध हैं। विदेशी पर्यटक भी लखनऊ आने पर उन्हें खाना चाहते हैं। लखनऊ-हरदोइ राजमार्ग पर ही मलिहाबाद गांव है, जहां के दशहरी आम विश्व प्रसिद्ध हैं। दिल्ली के ही कनॉट प्लेस की भांति यहां का हृदय हज़रतगंज है। यहां खूब चहल-पहल रहती है। प्रदेश का विधान सभा भवन भी यहीं स्थित है। 

लखनऊ अपनी विरासत में मिली संस्कृति को आधुनिक जीवनशैली के संग बड़ी सुंदरता के साथ आज भी संजोये हुए है। यहां के समाज में नवाबों के समय से ही 'पहले आप' वाली शैली समायी हुई है। हालांकि वक्त के साथ अब बहुत कुछ बदल चुका है, लेकिन यहां की एक तिहाई जनसंख्या इस तहजीब को आज भी संभाले हुए है। इसके अलावा लखनवी पान तो यहां की संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। इसके बिना तो लखनऊ अधूरा सा लगता है। 

वास्तव में लखनऊ दुनिया का एक ऐसा शहर जो अपने नवाबी कल्चर, चिकन वर्क, लज़ीज़ कबाब और तहजीब के लिए जाना जाता है। वैसे तो भारत में कई ऐसे शहर हैं, जहां की अपनी एक अलग संस्कृति है लेकिन लखनऊ की तहजीब और यहां का व्यंजन, ऐतिहासिक इमारतें देश भर में अपनी अलग पहचान रखती हैं। यहां का रहन सहन, खाना-पानी, तौर तरीके, भाषा, इमारतें-पार्क, पहनावा आदि। सब कुछ में राजसी जीवन की झलक दिखाई देती है।

बड़ा इमामबाड़ा

बड़ा इमामबाड़ा, एक विशेष धार्मिक स्‍थल है। इसे आसिफ इमामबाड़ा के नाम से भी जाना जाता है क्‍योंकि इसे 1783 में लखनऊ के नबाव आसफ-उद-दौला द्वारा बनवाया गया था। इमामबाड़ा, लखनऊ की सबसे उत्‍कृष्‍ट इमारतों में से एक है। एक परिसर में एक श्राइन, एक भूलभूलैया - यानि भंवरजाल, एक बावड़ी या सीढियोंदार कुआं और नबाव की कब्र भी है जो एक मंडपनुमा आकृति से सुसज्जित है।

ब्रिटिश रेजीडेंसी

रेजीडेंसी, लखनऊ के सबसे महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक स्‍थलों में से एक है। इसका निर्माण नवाब आसफ-उद- दौला ने 1775 में शुरू किया करवाया था और 1800 ई. में इसे नवाब सादत अली खान के द्वारा पूरा करवाया गया। रेजीडेंसी के नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि यह एक निवासस्‍थान है, यहां ब्रिटिश निवासी जनरल का निवास स्‍थान था, जो नवाबों की अदालत में ब्रिटिश सरकार का प्रतिनिधित्‍व किया करते थे।

रूमी दरवाजा

रूमी दरवाजा को तुर्कीश द्वार के नाम से भी जाना जाता है, जो 13 वीं शताब्‍दी के महान सूफी फकीर, जलाल-अद-दीन मुहम्‍मद रूमी के नाम पर पड़ा था। इस 60 फुट ऊंचे दरवाजे को सन् 1784 में नवाब आसफ-उद-दौला के द्वारा बनवाया गया था।

कैसरबाग़ पैलेस

कैसरबाग पैलेस को 1847 में अवध के नवाब वाजिद अली शाह के द्वारा बनवाया गया था। यह महल नवाब का ड्रीम प्रोजेक्‍ट था और वह इसे दुनिया का आठवां आश्‍चर्य बनाना चाहते थे। छत्‍तर मंजिल के पूर्वी भाग में स्थित, कैसरबाग पैलेस तरवली कोठी, रोशन-उद-दौला कोठी और चौलखी कोठी के पास स्थित है।


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