Sunday, 24 July 2022

मेरा शहर दिल्ली निबंध - Mera Shehar Delhi Essay in Hindi

मेरा शहर दिल्ली निबंध - Mera Shehar Delhi Essay in Hindi

Mera Shehar Delhi Essay in Hindi: प्रत्येक व्यक्ति को अपना शहर प्रिय होता है। जो दिल्ली में रहते हैं उनका प्रिय शहर दिल्ली होगा। इसी प्रकार लखनऊ के निवासी को लखनऊ सबसे प्रिय शहर लगेगा। मेरा प्रिय शहर दिल्ली है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं यहीं पला-बढ़ा। दूसरे इण्डिया की राजधानी होने के कारण भी दिल्ली मेरा प्रिय शहर है। 

    मेरा शहर दिल्ली निबंध 100 Words

    भारत में कई प्रसिद्ध शहर है परन्तु मेरा प्रिय शहर दिल्ली है। मैं पिछले 10 वर्षों से दिल्ली में रह रहा हूँ। ये मेरा शहर है। मेरा जन्म भी दिल्ली में ही हुआ है और अब मैं यहाँ अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहा हूँ। मुझे दिल्ली से बहुत प्यार है। दिल्ली शहर से मेरी यादें जुडी हैं इसलिए यह शहर मेरे ह्रदय में बसा है। 

    दिल्ली सिर्फ एक शहर ही नहीं बल्कि भारत की राजधानी भी है। चाहे 15 अगस्त हो या 26 जनवरी, सभी पर्व यहाँ धूम-धाम से मनाये जाते हैं। दिल्ली की रामलीला तो विश्व प्रसिद्ध है। वास्तव में दिल्ली एक हलचल से भरा शहर है। यहाँ भारत का अंतर्राष्ट्रीय इंदिरा गाँधी हवाई अड्डा है। इसलिए दिल्ली सिर्फ एक शहर न होकर भारत की पहचान है। 

    मेरा शहर दिल्ली निबंध 200 Words

    दिल्ली भारतवर्ष की ऐतिहासिक राजधानी है और मेरा प्रिय शहर है। वास्तव में दिल्ली एक ऐसा शहर है जो प्रत्येक भारतवासी को प्रिय है क्योंकि यह हमारी आजादी का प्रतीक है। यह पूरे देश की राजनीति का केंद्र है। संसद भवन भी दिल्ली में ही है। मेरे शहर “दिल्ली”में अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, रूस, फ्रांस, इटली, जापान, चीन जैसे सभी प्रमुख देशो के दूतावास बने हुए है। यमुना नदी के तट पर बसे दिल्ली शहर का इतिहास बड़ा प्राचीन है। प्राचीन काल के सभी सम्राटों ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाने में गौरव का अनुभव किया। महाभारत कालीन इंद्रप्रस्थ यही था। 

    मेरा शहर दिल्ली निबंध - Mera Shehar Delhi Essay in Hindi

    मेरा जन्म भी यहीं हुआ इसलिए दिल्ली शहर से मेरा लगाव स्वाभाविक है। मेरे पिताजी पिछले 30 सालो से यहाँ नौकरी कर रहे हैं। इस शहर ने मुझे और मेरे परिवार को बहुत कुछ दिया है। यहीं मेरे पिता जी को सरकारी नौकरी मिली। 

    आधुनिक दिल्ली एक सुविधाओं से परिपूर्ण शहर है। दिल्ली में अनेक अच्छे कॉलेज है जहाँ देश भर से छात्र छात्राएं पढ़ाई करने आते हैं। दिल्ली में मनोरंजन के पर्याप्त साधन मौजूद है। यहाँ पीवीआर, बिग सिनेमास, कार्निवाल सिनेमा, सिनेपोलिस और आईनोक्स जैसे सिनेमाघर हैं जहाँ पर आप हिंदी, इंग्लिश कोई भी फिल्म देख सकते है।

    दिल्ली में कई ऐतिहासिक महत्व के दर्शनीय स्थल भी है। यहाँ लाल किला, क़ुतुब मीनार, और हुमायूँ का मकबरा, साथ ही राजघाट जहाँ महात्मा गांधी की समाधि है। शॉपिंग के लिए दिल्ली बहुत मशहूर है इसीलिए दिल्ली मेरा प्रिय शहर है। 

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    Mera Shehar Delhi Essay in Hindi

    भारत एक विशाल देश है, जिसके कई बड़े शहर विश्व में अपनी ख्याति रखते है। दिल्ली ऐसा ही एक सुंदर, सभ्य एवं भारत का दिल कहा जाने वाला राजधानी शहर है, मेरा सौभाग्य है कि दिल्ली मेरा गृह नगर हैं। वर्तमान में दिल्ली शहर दो भागों में विभक्त है ये हैं - प्राचीन दिल्ली व नई दिल्ली नई दिल्ली शहर भारत देश की राजधानी हैंजो बेहद आकर्षक तरीके से निर्मित की गई हैं वही पुरानी दिल्ली का निर्माण मुगलों के शासनकाल में हुआ था. ये बेहद भीड़भाड़ वाला शहर हैं. इसमें एतिहासिक महत्व की कई प्राचीन ईमारते खड़ी हैं.

    नई दिल्ली में कई आकर्षक पार्क व उद्यान बने हुए हैं. यहाँ नेहरु पार्क, तालकोटरा गार्डन, लोदी गार्डन और बुद्ध पार्क बना हुआ हैं. प्राचीन काल से दिल्ली न केवल एक राजधानी शहर के रूप में फली फूली बल्कि यह भारत का एक महत्वपूर्ण शिक्षा एवं व्यापार केंद्र भी था. आज भी करोल बाग़, चांदनी चौक कनाट प्लेस और लाजपत नगर के बाजार लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

    दिल वालों के शहर दिल्ली के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल यथा कुतुब मीनार, लाल किला, जामा मस्जिद, संसद भवन, राष्ट्रीय संग्रहा लय, गुरुद्वारा सीस गंज, इंडिया गेट और चिड़ियाघर इन स्थानों को देखने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं. मेरे शहर दिल्ली में मेट्रो सेवा ने इसके दौड़ने की गति को बढ़ाया हैं. मुझे अपने शहर का एक शहरवासी पर गर्व हैं. मेरा सपना है कि एक दिन दिल्ली विकसित होकर विश्वस्तरीय शहर का दर्जा प्राप्त करे.

    दिल्ली के दर्शनीय स्थल

    यहाँ पर कनाट प्लेस, चिड़िया घर, जंतर- मन्तर, लोटस टेम्पल, लाल किला, हुमाऊं का मकबरा, कुतुबमीनार, इंडिया गेट, अक्षर धाम मन्दिर, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, लोदी गार्डन, पुराना किला, चाँदनी चौक, लक्ष्मीनारायण मन्दिर, कैथेड्रल चर्च आफ रिडेम्पशन, इस्कॉन मन्दिर, जामा मस्जिद, नेशनल म्यूजियम, राज घाट, शांति भवन, नेशनल रेल म्यूजियम जैसी जगह है जो देखने के लिए बहुत उपयुक्त है।

    राजनीति का केंद्र 

    मेरा शहर दिल्ली भारत देश की राजधानी है। यह पूरे देश की राजनीति का केंद्र है। यहाँ पर केंद्र सरकार है जो पूरे देश को चलाती है। संसद भवन में देश भर से सांसद आते है जो देश के विकास और तरक्की, सुविधाओं, समस्याओं, आने वाली सरकारी योजनाओं के बारे में चर्चा करते है। विभिन्न तरह के कानून बनाये जाते है। केंद्र सरकार के द्वारा विभिन्न राज्यों को खर्च के लिए बजट दिया जाता है इसलिए दिल्ली का महत्व कभी भी कम नही हो सकता है।

    मनोरंजन के पर्याप्त साधन

    मेरे शहर “दिल्ली” में मनोरंजन के पर्याप्त साधन मौजूद है। यहाँ देश के सर्वश्रेष्ठ तकनीक वाले सिनेमघर है जहाँ पर आप कोई भी फिल्म देख सकते है। पीवीआर, बिग सिनेमास, कार्निवाल सिनेमा, सिनेपोलिस, आईनोक्स जैसे सिनेमास है जहाँ पर आप हिंदी, इंग्लिश कोई भी फिल्म देख सकते है।

    इसके अलावा घूमने और शॉपिंग के लिए यहाँ पर 100 से भी अधिक माल्स है जहाँ पर आप देशी से लेकर विदेशी ब्रांड तक की चीजे, कपड़े, जूते, गहने, खाने-पीने की चीजे, खिलौने, किताबे, सब कुछ खरीद सकते है। अगर आप प्रकृति के पास जाना चाहते है तो दिल्ली के चिड़िया घर में जाकर आप विभिन्न तरह के पशु- पक्षी और जानवर देख सकते है।

    स्वास्थ्य सुविधायें

    मेरे शहर में हर तरह की स्वास्थ्य सुविधा है। आल इंडिया इंस्टिटयूट ऑव मेडिकल साइंसेज़ (ऐम्स), सफदरजंग अस्पताल, सर गंगाराम, राममनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग, होली फैमिली, फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट, माता चन्नन देवी, लोक नायक अस्पताल, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, अपोलो, जी बी पंत, गुरु तेग बहादुर, रेड क्रास सोसाइटी, दीनदयाल उपाध्याय जैसे अच्छे अस्पताल है जहाँ पर आप किसी भी रोग का उपचार करवा सकते हैं।

    दिल्ली में देश भर से असाध्य रोगी इलाज करवाने के लिए आते है। यहाँ पर सबसे अच्छी दवायें, मशीने, दवायें और अन्य संसाधन मौजूद है। इसके अलावा चिकित्सा क्षेत्र में नई नई रिसर्च भी यहाँ के अस्पतालों में होती रहती है। देश भर से छात्र छात्राएं यहाँ डॉक्टरी की पढ़ाई करने आते हैं।

    अंतराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र

    मेरे शहर “दिल्ली”में सभी बड़े देशों जैसे रूस, अमेरिका, जापान, कनाडा, चीन जर्मनी, फ्रांस, जैसे सभी प्रमुख देशो के दूतावास बने हुए है। विदेशो से राजनयिक यहाँ आते है और इस तरह भारत का विदेशी देशो से सम्बन्ध और मजबूत होता है।

    इस तरह कह सकते है की दिल्ली अंतराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र है। विदेश व्यापार, नीतियों आदि के बारे में चर्चा की जाती है। पासपोर्ट ऑफिस में जाकर लोग पासपोर्ट बनवा सकते है। इसके अलावा किसी भी देश के दूतावास पर जाकर वीसा प्राप्त कर सकते हैं।

    शिक्षा का प्रमुख केंद्र

    दिल्ली में अनेक अच्छे कॉलेज है जहाँ पर बेहतर शिक्षा पाने के लिए विद्दार्थी देश भर से आते हैं। यहाँ का सेंट स्टीफेंस कॉलेज, लेडी श्री राम कॉलेज ओंफ कॉमर्स, हिंदू कॉलेज, हसंराज कॉलेज, मिरांडा हाउस कॉलेज, शहीद सुखदेव कॉलेज, रामजस कॉलेज, इन्द्रप्रस्थ कालेज, किरोड़ीमल कॉलेज, दौलतराम कॉलेज जैसे प्रसिद्द कालेज है जहाँ पर हर तरह का कोर्ष और पाठ्यक्रम पढ़ा जा सकते है। यहाँ पर विदेशी भाषाये भी सिखाई जाती है।

    फैशन का केंद्र

    दिल्ली में राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलोजी संस्थान है। इतना ही नही सभी नये तरह के वस्त्र, परिधान, साजो सामानो, लक्सरी वस्तुऐ सबसे पहले यही पर लांच किये जाते है। दिल्ली के फैशन को पूरे देश में फालो किया जाता है। सभी लड़के- लड़कियाँ यहाँ के कपड़ों को पहनना पसंद करते है।

    दिल्ली शहर पर हिंदी निबंध in 1000 words

    प्रस्तावना

    दिल्ली हमारे प्यारे देश भारतवर्ष की राजधानी है। दिल्ली भारत का हृदय स्थल है इसीलिए कहा भी गया है कि "दिल्ली है दिलवालों की"। यहां के हर स्थल देखने योग्य हैं। आज दिल्ली में केंद्र सरकार के सभी बड़े कार्यालय विद्यमान है। भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा अन्य मंत्रियों के प्रधान कार्यालय नई दिल्ली में ही स्थित हैं। दिल्ली का प्राचीनतम उल्लेख महाभारत नामक महापुराण में मिलता है जहाँ इसका उल्लेख प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के रूप में किया गया है। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। इसलिए अतीत से सभी राजा महाराजा यहां रहने के लिए लालायित रहते आए हैं। कवियों और शायरों ने सदैव दिल्ली के रूप रूप सौंदर्य की प्रशंसा की है। वर्तमान समय में दिल्ली सभी आधुनिक सुविधाओं से संपन्न है और सारे भारत का दिल है।

    दिल्ली का इतिहास

    भारत के प्राचीन इतिहास के साथ दिल्ली का इतिहास जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल के सभी सम्राटों ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाने में गौरव का अनुभव किया है। इसका अत्यंत प्राचीन नाम योगिनीपुर था। महाभारत कालीन इंद्रप्रस्थ यही था। इतिहासिक दृष्टि से पृथ्वीराज ने इसको महाराज अनंगपाल से प्राप्त किया था। पृथ्वीराज का राज पिथौरागढ़ महरौली में स्थित था।

    कुछ विद्वानों के मतानुसार पृथ्वीराज ने ही इसको समस्त समृद्धियों का द्वार समझकर देलही नाम दिया जो बाद में बदल कर दिल्ली बन गया।  कुतुबुद्दीन आदि गुलाम वंश का शासन भी यहीं पर था। बाद में मुगलों ने इस देश को जीतकर आगरा को अपनी राजधानी बनाया। लेकिन वह भला दिल्ली को अपने दिल से क्यों ना रख रखते। बाद में शाहजहां ने इस को अपनी राजधानी बनाया। अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर तक राजधानी दिल्ली में ही रहा।

    अंग्रेजों ने भारत पर अपना अधिकार जमा लिया और कलकत्ता को अपनी राजधानी बनाया। उन्होंने भी दिल्ली का महत्व समझ कर सन 1912 से दिल्ली को ही ब्रिटिश भारत की राजधानी बनाया। बाद में उन्होंने नई दिल्ली की स्थापना की जहां पर राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय, आदि का निर्माण किया गया। भारत के स्वतंत्र होने पर केंद्र सरकार की राजधानी नई दिल्ली को ही बनाया गया।

    दिल्ली के दर्शनीय ऐतिहासिक स्थल

    दिल्ली कितनी बार उजड़ी और कितनी बार पुनः बसी इस का निश्चय कर पाना असंभव है। दिल्ली के हर कोने पर पुराने खंडहर अपने अस्तित्व वैभव की याद दिलाते हैं, इसलिए दिल्ली के प्रत्येक स्थल दर्शनीय हैं। यहां के ऐतिहासिक स्थल अपने मुख भाषा में अपने वैभव व संस्कृति की कहानी सुनाते हैं। जिनकी भाषा को कुशल मर्मज्ञ इतिहासकार ही समझ सकता है। दिल्ली का विशालकाय पुराना किला जिसको पांडवों का किला भी कहते हैं। प्राचीन वैभव व शेरशाह के शासन की याद दिलाता है।

    महरौली के पास आसपास पुराने खण्डहर व गगनचुंबी कुतुबमीनार, विशाल लोह स्तंभ, मौर्य वंश, पृथ्वीराज का पिथौरागढ़, व गुलाम वंश के शासकों की स्मृति को ताजा करते हैं। दिल्ली गेट के पास फिरोज शाह कोटला तुगलक वंश का स्नेह दिलाता है। पुरानी दिल्ली के दस दिशाओं के द्वार लाल पत्थरों से निर्मित भव्य लाल किला मुग़ल सम्राटो शानो – शौकत व स्थापत्य कला की याद दिला रहे हैं।

    दिल्ली का पुराना सचिवालय अंग्रेजों के प्रारंभिक शासन का प्रतीक है। इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन, केंद्र सचिवालय, संसद भवन, आदि अंग्रेजी साम्राज्य की व्यापकता को प्रदर्शित करते हैं। यहाँ पर एक राष्ट्रीय संग्रहालय देखने को योग्य है जो पाषाण युग से आज तक के मानव इतिहास पर प्रकाश डालता है, इस प्रकार दिल्ली इतिहासिक स्थलों से भी जुड़ी है जो सब दर्शनीय है।

    दिल्ली के दर्शनीय धार्मिक स्थल

    यह प्राचीन काल से विविध धर्मों का केंद्र रहा है। आज भी यहां पर विविध धर्मों संप्रदायों जातियों के लोग मिलजुलकर निवास करते हैं। यहां पर हिंदू धर्म के अनेक मंदिर विद्यमान हैं, जिनमें लक्ष्मी नारायण मंदिर जिसको बिरला मंदिर भी कहते हैं विशेष रूप से दर्शनीय है।

    लक्ष्मी नारायण मंदिर, जिसे बिड़ला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक है और एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। उद्योगपति श्री जेके बिड़ला द्वारा 1939 में निर्मित यह खूबसूरत मंदिर कनॉट प्लेस के पश्चिम में स्थित है। बिरला मंदिर संगमरमर का बना हुआ है, जिसमें विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां दर्शनीय है। 

    दिल्ली में मुस्लिम धर्म के पूजा स्थलों में सैकड़ों मस्जिद विद्यमान है जो धार्मिक प्रतीक के साथ साथ ऐतिहासिक भी हैं। दिल्ली की शाही जमा मस्जिद प्रमुख मुस्लिम पूजा स्थल व ऐतिहासिक है जिसको शाहजहां ने बनवाया था।

    दिल्ली का जन्तर मन्तर एक खगोलीय वेधशाला है। इसका निर्माण महाराज जयसिंह द्रितीय ने 1724 में करवाया था। यह इमारत प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है| दिल्ली का जंतर-मंतर समरकंद की वेधशाला से प्रेरित है। मोहम्मद शाह के शासन काल में हिन्दु और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी।

    व्यापारिक क्षेत्र

    दिल्ली में चांदनी चौक, सदर बाजार, पहाड़गंज, करोल बाग, कनॉट प्लेस ,आदि क्षेत्रों में अनेक प्रकार की वस्तुओं का क्रय विक्रय होता है। इन व्यापारिक क्षेत्रों में दिनभर इतनी भीड़ होती है कि आने जाने के लिए रास्ता भी नहीं मिलता। यहां पर दैनिक उपयोग की प्रत्येक वस्तु में उचित दाम पर उपलब्ध होती हैं।

    यहां भारत के दूर के क्षेत्रों से लोग सामान खरीदने आते हैं। दिल्ली का सदर बाजार हर प्रकार के सामान की बिक्री का प्रधान केंद्र है। कनॉट प्लेस में आधुनिक फैशन की वस्तुएं उपलब्ध है। यहां पर प्रतिदिन देश विदेश के सारे विश्व भर के लोग दिखाई देते हैं। यहां पर अनेक पंचतारा होटल हैं जिनमें अनेक विदेशी लोग आकर ठहरते हैं।

    उपसंहार

    दिल्ली प्राकृतिक जलवायु की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल है जो भी एक बार दिल्ली रहने लगता है तो वे दिल्ली से लौटना नहीं चाहता। यह दिल्ली की ही विशेषता है जो बार-बार उजाड़ जाने पर पुनः बसाई गई है। दिल्ली में कई राजाओं के साम्राज्य के उदय तथा पतन के साक्ष्य आज भी विद्यमान हैं। सच्चे मायने में दिल्ली हमारे देश के भविष्य, भूतकाल एवं वर्तमान परिस्थितियों का मेल-मिश्रण हैं। 


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