Tuesday, 26 July 2022

मेरा प्रिय शहर जयपुर पर निबंध - Mera Priya Shahar Jaipur Essay in Hindi

Mera Priya Shahar Jaipur Essay in Hindiजयपुर मेरा प्रिय शहर है क्योंकि यहीं मेरा जन्म हुआ है। जयपुर सिर्फ मेरा ही नहीं बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का भी प्रिय शहर है क्योंकि यहाँ की अनूठे महल और हवेलियां सभी को आकर्षित करते हैं। जयपुर का भोजन भी अत्यंत स्वादिष्ट है इसलिए भी ये मेरा प्रिय शहर है। 

मेरा प्रिय शहर जयपुर पर निबंध - Mera Priya Shahar Jaipur Essay in Hindi

जयपुर मेरा प्रिय शहर है क्योंकि यहीं मेरा जन्म हुआ है। जयपुर सिर्फ मेरा ही नहीं बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का भी प्रिय शहर है क्योंकि यहाँ की अनूठे महल और हवेलियां सभी को आकर्षित करते हैं। जयपुर का भोजन भी अत्यंत स्वादिष्ट है इसलिए भी ये मेरा प्रिय शहर है। 

जयपुर राजस्थान का सबसे बड़ा शहर और राजधानी है। इसे गुलाबी शहर के नाम से जाना जाता है। महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18 नवंबर, 1727 को शहर की स्थापना की। वह आमेर के शासक थे। शहर का नाम उनके नाम पर जयपुर रखा गया था। इस शहर के सभी स्मारकों और अन्य महत्वपूर्ण इमारतों को लाल रंग से रंगा गया है।

मेरा प्रिय शहर जयपुर पर निबंध - Mera Priya Shahar Jaipur Essay in Hindi

जयपुर शहर, अपने किलों, महलों और हवेलियों के विख्‍यात है, दुनिया भर के पर्यटक भारी संख्‍या में भ्रमण करने आते है। जयपुर में कई अद्भुत स्मारक हैं। उनमें से कुछ हवा महल, जल महल, सिटी पैलेस, आमेर किला, जंतर मंतर, नाहरगढ़ किला, जयगढ़ किला और जयपुर चिड़ियाघर आदि हैं।

हवा महल का उपयोग राजाओं द्वारा ताजी हवा के लिए किया जाता था। सिटी पैलेस वह स्थान है जहाँ जयपुर के राजा रहते हैं। जंतर मंतर एक वैज्ञानिक स्थान है। इसमें सभी प्रकार के गैजेट हैं जिनका उपयोग समय, अक्षांश, देशांतर को मापने के लिए किया जाता था। जयपुर के चिड़ियाघर में कई शानदार जानवर हैं जो देखने लायक हैं। जयपुर का सबसे प्रसिद्ध जानवर जयपुरियन लंगूर है।

जंतर - मंतर

जंतर-मंतर जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बनवाई गई पाँच खगोलीय वेधशालाओं में सबसे विशाल है, जयपुर की यह वेधशाला। इसे जंतर मंतर कहते हैं। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इसमें बनाए गए जटिल यंत्र, समय को मापने, सूर्य की गति व कक्षाओं का निरीक्षण तथा आकाशीय पिंडों के सम्बन्ध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं।

हवा महल

हवामहल बाहर की तरफ से भगवान कृष्ण के मुकुट जैसा दिखाई देता है। सन् 1799 ई. में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा बनवाया गया यह महल पाँच मंजिला है तथा इसका डिज़ाइन वास्तुकार लालचंद उस्ता द्वारा तैयार किया गया था। हवा महल गर्मी के मौसम में भी इन झरोखों के कारण वातानुकूलित रहता है। गुलाबी शहर का द्योतक हवा महल, बलुआ पत्थर से राजस्थानी वास्तुकला और मुगल शैली का मिश्रण है। इसकी दीवारें सिर्फ डेढ़ फुट चौड़ी हैं तथा 953 बेहद सुन्दर आकर्षक छोटे छोटे कई आकार के झरोखे हैं। इसे बनाने का मूल उद्देश्य था कि शहर में होने वाले मेले-त्यौहार तथा जुलूस को महारानियाँ इस महल के अन्दर बैठकर देख सकें। 

जल महल

मानसागर झील के बीच में बना अद्भुत जलमहल, पानी पर तैरता प्रतीत होता है। इसकी पाल (किनारे) पर रोजाना स्थानीय तथा विदेशी पर्यटक मनमोहक नजारा देखने आते हैं। रात के समय जलमहल रंग बिरंगी रौशनी में परी लोक सा लगता है। महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा 18वीं सदी में बनवाया गया, ’रोमांटिक महल’ के नाम से भी जाना जाता है। राजा अपनी रानी के साथ इस महल में खास वक्त बिताने आते थे तथा राजसी उत्सव भी यहाँ मनाए जाते थे। इसके चारों कोनों पर बुर्जियां व छतरियां बनी हैं। बीच में बारादरी, संगमरमर के स्तम्भों पर आधारित है।

बिड़ला मंदिर

लक्ष्मी नारायण मंदिर, जो कि बिड़ला मंदिर नाम से अधिक लोकप्रिय है, मोती डूंगरी की तलहटी में स्थित है। ऊँचे भूभाग पर अपेक्षाकृत आधुनिक रूप से निर्मित यह मंदिर पूरी तरह से श्वेत संगमरमर का बना है। मंदिर को 1988 में प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति बिड़ला द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर भगवान विष्णु, जिन्हें नारायण भी कहते हैं, को समर्पित है। उनके साथ ही धन और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी है। यह मंदिर कला की एक नायाब रचना है। 

नाहरगढ़ क़िला

नाहरगढ़ किले से जयपुर शहर का विहंगम, अभूतपूर्व, अद्भुत और मदमस्त नजारा, सारी दुनियां में और कहीं नहीं मिलेगा। सन् 1734 ई. में महाराजा जयसिंह के शासनकाल के दौरान इस किले का निर्माण किया गया, जो कि शहर का पहरेदार मालूम होता है। नाहरगढ़ यानि शेर का किला। इस किले में बनाए गए माधवेन्द्र भवन को ग्रीष्म काल में महाराजा के निवास के रूप में काम में लिया जाता था। रानियों के लिए आरामदेय बैठक तथा राजा के कक्षों का समूह, आलीशान दरवाजों, खिड़कियों और भित्तिचित्रों से सजाया गया, नाहरगढ़ अतीत की यादों को समेटे शान से खड़ा है। 

जयपुर का खाना 

जयपुर, अपने स्‍वादिष्‍ट, मसालेदार और चटपटे भोजन के लिए काफी विख्‍यात है। दाल बाटी - चूरमा, प्‍याज की कचौड़ी, कबाब, मुर्ग को खाटो और अचारी मुर्ग यहां के प्रसिद्ध व्‍यंजन है। फूड लवर्स इन सभी व्‍यंजनों को यहां के नेहरू बाजार और जौहरी बाजार में जाकर खा सकते है, यह दोनो ही बाजार स्‍ट्रीट फूड मार्केट हैं जहां सभी प्रकार के स्‍थानीय भोजन के ठेले सड़क के किनारे लगे रहते है। इसके अलावा जयपुर की प्रसिद्ध मिठाईयां घेवर, मिश्री मावा और मावा कचौड़ी भी देश भर में काफी  लोकप्रिय हैं।

मेले और त्‍यौहार 

जयपुर के कुछ प्रसिद्ध त्‍यौहारों और मेलों में गणगौर महोत्‍सव काफी लोकप्रिय है गणगौर का अर्थ होता है शिव और पार्वती। गण अर्थात् हिंदूओं के भगवान शिव और गौर अर्थात् भगवान शिव की पत्‍नी पार्वती। यह त्‍यौहार वैवाहिक जीवन में खुशी का प्रतीक होता है। यहां के लोकप्रिय वार्षिक त्‍यौहारों में से एक जयपुर विंटेज कार रैली है जिसका आयोजन हर साल जनवरी माह में किया जाता है। यह कार रैली एक प्रमुख आकर्षण केंद्र होती है जो पर्यटकों के बीच खासी प्रसिद्ध है। कार प्रेमी यहां आकर विंटेज कारों जैसे - मर्सिडीज, ऑस्टिन और फिएट  आदि का अद्भभुत संग्रह देख सकते हैं। इनमें से कुछ कारें तो 1900 वीं सदी की है। अन्‍य प्रसिद्ध उत्‍सवों में से एक महोत्‍सव एलीफैण्‍ट फेस्टिवल भी है जिसका आयोजन हर साल होली के अवसर पर किया जाता है।


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