Friday, 10 June 2022

एक मेले का वर्णन करते हुए पिताजी को पत्र

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एक मेले का वर्णन करते हुए पिताजी को पत्र

दिनांक: 20/06/20XX

आदरणीय पिता जी,

सादर चरणस्पर्श।

विषय :  एक मेले का वर्णन करते हुए को पत्र


मैं यहां पर सकुशल हूं और आप सब की कुशलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। आगे समाचार यह है कि इस रविवार दिनांक 15/06/20XX को मैं अपने मित्रों के साथ यहां पर चल रहे एक मेले में गया था। बहुत वर्षों बाद किसी मेले में जाकर बहुत अच्छा लगा। इससे पहले मैं बचपन में आपके साथ मेले में जाता था। वो बचपन की यादें ताजा हो आई।

यहां पर इस मेले में बड़े-बड़े झूले थे। कुछ छोटे झूले भी थे छोटे बच्चों के लिए। कहीं पर जादुगर अपना खेल दिखा रहा था, तो कहीं गुब्बारे फोड़ने की प्रतियोगिता में इनाम जीतने की होड़ लगी थी। एक जगह सर्कस भी लगा हुआ था और लाफिंग गैलरी का तो जवाब ही नहीं, हंस हंस कर लोग लोट-पोट हुए जा रहे थे। एक तरफ़ खाने पीने की दुकानें और खोमचे लगे हुए थे। कहीं बर्फ वाले गोले और कहीं कुल्फी फालूदा की रेहड़ी लगी हुई थी।

लोग अन्दर प्रत्येक स्टाल की टिकटें खरीद कर खेल तमाशा देख रहे थे। एक जगह कुश्ती प्रतियोगिता हो रही थी। अन्त में प्रवेश टिकट पर एक लकी ड्रा भी होना था। मुझे प्रथम पुरस्कार में एक टेडी बेयर इनाम में मिला।

मुझे वहां मेले में बहुत आनन्द आया।

आप सब अपना ख्याल रखना।

आपका पुत्र,

निखिल कुशवाहा


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