Monday, 7 March 2022

राजनीतिक सहभागिता का अर्थ क्या है ? राजनीतिक सहभागिता की परिभाषा बताइये।

राजनीतिक सहभागिता का अर्थ क्या है ? राजनीतिक सहभागिता की परिभाषा बताइये। 

    राजनीतिक सहभागिता का अर्थ

    राजनीतिक सहभागिता किसी भी प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए अनिवार्य मानी जाती है। इसका अर्थ वे स्वैच्छिक क्रियाएँ हैं, जिनके द्वारा किसी समाज के सदस्य शासकों के चयन एवं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जन-नीतियों के निर्माण में भाग लेते हैं। मतदान की प्रक्रिया राजनीतिक सहभागिता है। प्रत्येक प्रकार की राजनीतिक क्रिया अथवा गतिविधि राजनीतिक सहभागिता नहीं होती।

    राजनीतिक सहभागिता का परिभाषा

    नाई तथा वर्बा के शब्दों में-“राजनीतिक सहभागिता सामान्य व्यक्तियों की वे विधि समस्त गतिविधियाँ हैं जिनका उद्देश्य राजनीतिक पदाधिकारियों के चयन तथा उनके द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करना होता है।"

    पाई के शब्दों में- "राजनीतिक सहभागिता नागरिकों के वे कार्य अथवा गतिविधियाँ हैं, जिससे राजनीतिक व्यवस्था की निर्णयकारी प्रक्रिया प्रभावित व निरूपित होती है।"

    राजनीतिक सहभागिता की प्रकृति

    • राजनीतिक क्रिया ही राजनीतिक सहभागिता
    • व्यक्ति राजनीतिक सहभागिता का केन्द्र
    • जनपरियोजना तथा राजनीतिक सहभागिता
    • राजनीतिक सहभागिता सीमित कार्य बोधक वाली संकल्पना
    • राजनीतिक सहभागिता समुच्चयी क्रिया 

    (1) राजनीतिक क्रिया ही राजनीतिक सहभागिता - विद्वानों ने राजनीतिक क्रिया को ही राजनीतिक सहभागिता की संज्ञा प्रदान की है, राजनीतिक सहभागिता में व्यक्ति की सम्पूर्ण राजनीतिक गतिविधियों को सम्मिलित किया जाता है। हित समूहों, दबाव समूहों तथा राजनीति दलों की गतिविधियों को राजनीतिक सहभागिता में सम्मिलित नहीं किया जाता है। ये व्यक्ति की गतिविधियों की राजनीतिक सहभागिता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ये अभिकरण के माध्यम हैं जिनकी सहायता के द्वारा व्यक्ति राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तैयार हो जाता है।

    (2) व्यक्ति राजनीतिक सहभागिता का केन्द्र - राजनीतिक सहभागिता ऐसी संकल्पना है जो व्यक्ति के चारों ओर घूमती है। व्यक्ति राजनीतिक सहभागिता कहा जाता है जो राजनीतिक व्यवस्था की निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करती है। राजनीतिक सहभागिता की स्थिति में व्यक्ति की राजनीति में अपना उलझाव, अपना कृत्य अनिवार्य रूप से होता है।

    (3) जनपरियोजना तथा राजनीतिक सहभागिता - कुछ विद्वानों ने जन-परियोजना तथा राजनीतिक सहभागिता को संयुक्त करके एक व्यापक क्षेत्र का विचार प्रस्तुत किया है, परन्तु जनपरियोजना को राजनीतिक सहभागिता में जनता को प्रवृत करना है। जनपरियोजना तथा राजनीतिक सहभागिता में बहुत कम अन्तर है। राजनीतिक सहभागिता जनपरियोजना ही बाद की स्थिति है। ये दोनों साथ-साथ चलने वाली प्रक्रिया नहीं हैं।

    (4) राजनीतिक सहभागिता सीमित कार्य बोधक वाली संकल्पना - राजनीतिक सहभागिता सीमित अर्थ बोधक वाली संकल्पना है। इसमें व्यक्ति की उन राजनीतिक क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है जो राजनीतिक व्यवस्था में निष्पादित होती हैं। यह नागरिकों की सामूहिकता में निष्पादित गतिविधि नहीं है। राजनीतिक सहभागिता राजनीतिक व्यवस्था की परिधि सीमा में सम्पादित हो जाने वाली क्रियाएँ हैं। पर्यावरण अथवा अन्य व्यवस्थाओं में किए गए संस्थाओं तथा समूहों के क्रम को हम राजनीतिक सहभागिता की श्रेणी में नहीं रख सकते हैं। व्यक्ति की राजनीतिक क्रियाएँ तथा राजनीतिक व्यवस्था के तीन घटक राजनीतिक सहभागिता के निर्णायक आधार माने जाते हैं।

    (5) राजनीतिक सहभागिता समुच्चयी क्रिया - लेस्टर मिलवाथ ने राजनीतिक सहभागिता को समुच्चयी क्रिया के रूप में विवेचित किया है। उसका यह विचार है कि जब एक व्यक्ति राजनीतिक दृष्टि से किसी एक क्रिया में संलग्न रहता है तो वह दूसरी राजनीतिक क्रिया भी करता हुआ प्रतीत होता है। उदाहरण के लिए, मतदान करने वाले व्यक्ति, मतदान के साथ-साथ अन्य क्रियाएँ भी करता है। मतदान के लिए प्रचार करना, धन अथवा तन से सहयोग करना। राजनीति में उलझाव के अन्य तरीकों से राजनीतिक गतिविधि करना आदि भी ऐसी ही क्रियाएँ हैं। 


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