Monday, 21 March 2022

दलित से आप क्या समझते हैं ? भारत में दलितों की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए।

दलित से आप क्या समझते हैं ? भारत में दलितों की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए।

दलित (अनुसूचित जातियाँ) का अर्थ

जिन वर्गों का प्रयोग हिन्दू सामाजिक संरचना सोपान में निरन्तर स्थान रखने वाले समुदायों के लिए किया जाता है, वे दलित या अनुसूचित जातियाँ कहलाती हैं। 'निम्नतम' स्थान का आधार इन जातियों के उस व्यवसाय से जुड़ा है, जिसे अपवित्र कहा गया है। यहाँ पर दलितों की विवेचना अनुसूचित जाति के रूप में की गयी है, क्योंकि भारतीय संविधान में अनुसूचित जाती के रूप में इनके कल्याण हेतु अनेकों संवैधानिक प्राविधान किए गए हैं। इन्हें अछुत, हरिजन और बाह्य जातियाँ भी कहा जाता है। इन्हें संविधान की सूची में सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं राजनीतिक दृष्टि से सुविधाएँ दिलाने के उद्देश्य स शामिल किया गया है। 

प्रश्न 2. भारत में दलितों की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए।

भारत में दलितों की स्थिति

1991 की जनगणना के अनुसार दलितों (अनुसूचित जातियों) का विवरण - 1991 की जनगणना के अनुसार भारत में (जम्मू एवं काश्मीर को छोड़कर) इनकी कुल संख्या 13.82 करोड़ थी। इस प्रकार भारत की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों की संख्या 16.48 है।

भारत के 15 प्रमुख राज्य ऐसे हैं जहाँ भारत की कुल जनसंख्या की 97 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इन राज्यों में अनुसूचित जाति की सबसे अधिक जनसंख्या पंजाब में 28.31 प्रतिशत और असम में सबसे कम जनसंख्या 7.40 प्रतिशत है, पंजाब के अतिरिक्त दो ऐसे प्रमुख राज्य (उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल) हैं। जहाँ पर भारत की कुल जनसंख्या का 20 प्रतिशत से अधिक अनसूचित जाति की जनसंख्या है।

उत्तर प्रदेश और पं. बंगाल में भारत की अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या का एक-तिहाई अनुसूचित जाति की जनसंख्या निवास करती है।

साक्षरता - 1991 की जनगणना के अनुसार 7 वर्ष और उससे अधिक आयु की अनुसूचित जाति की जनसंख्या की साक्षरता दर 37.41 प्रतिशत है। इसमें पुरुषों व स्त्रियों की दर क्रमशः 49.91 प्रतिशत व 23.76 प्रतिशत है। आँकड़ों के अध्ययन से यह पता चलता है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार राज्यों में इसकी साक्षरता दरें सामान्य दरों से काफी निम्न हैं। इन राज्यों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या और कुल जनसंख्या की साक्षरता दरें निम्न प्रकार हैं - उत्तर प्रदेश में 26.85 और 41.06 बिहार में 19.49 और 38.48 तथा राजस्थान में 26.29 और 38.55। यहाँ पर महिलाओं की स्थिति काफी निम्न है। इन तीनों राज्यों में अनसचित जाति की जनसंख्या और कुल जनसंख्या की स्त्री साक्षरता दरें क्रमशः निम्न प्रकार हैं - उत्तर प्रदेश में 10.69 और 25.31, राजस्थान में 8.31 और 20.44 तथा बिहार में 7.07 और 22.89 है।

वर्तमान स्थिति - भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 के अनुसार, 'अस्पृश्यता को अवैध घोषित किया जा चुका है, किन्तु इसका व्यवहार आज भी निरन्तर जारी है। इसका प्रत्यक्ष रूप शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है अपराध (अस्पृश्यता) अधिनियम, 1955 तथा इसका संशोधित रूप नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1976 लागू होने से पिछले दशकों में छुआछत की भावना काफी हद तक परिवर्तित हुई। इस अधिनियम के अन्तर्गत वर्ष 1981 से 1995 के दौरान अस्पृश्यता से सम्बन्धित दर्ज मामलों की कुल सख्या 19,378 थी।


SHARE THIS

Author:

I am writing to express my concern over the Hindi Language. I have iven my views and thoughts about Hindi Language. Hindivyakran.com contains a large number of hindi litracy articles.

0 comments: