तुलनात्मक राजनीति की अवधारणा बताइये तथा तुलनात्मक पद्धति की विशेषताएं बताइये।

Admin
0

तुलनात्मक राजनीति की अवधारणा बताइये तथा तुलनात्मक पद्धति की विशेषताएं बताइये।

    तुलनात्मक राजनीति की अवधारणा

    वर्तमान राजनीति शास्त्र में तुलनात्मक राजनीति ने अपने महत्व के कारण ही एक सम्पूर्ण विषय के रूप में अपने आपको स्थापित किया है। आधुनिक युग में तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन का महत्व निम्न प्रकार समझ सकते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब अनेक देशों की राजनीतिक परम्पराओं तथा व्यवस्थाओं एवं संस्थाओं से संसार का परिचय हआ तो इन सभी व्यवस्थाओं से संसार को और अधिक परिचित कराना परम्परागत दृष्टिकोण से सम्भव नहीं था, क्योंकि परम्परागत दृष्टिकोण में पश्चिमी राजनीतिक व्यवस्था को ही विशेष महत्व दिया गया था। यह दृष्टिकोण प्रजातन्त्र को ही आदर्श राजनीति का एक सही उदाहरण मानता था। इस राजनीतिक व्यवस्था में अनेक परिवर्तनों तथा विविधताओं के समावेश से भी पुरातन व्यवस्था अत्यन्त जटिल हो गयी इसीलिए राजनीति के अध्ययन के लिए इस परम्परागत दृष्टिकोण से अलग हटकर एक नयी अध्ययन प्रणाली की आवश्यकता को अनुभव किया गया जो इन सभी विभिन्नताओं तथा जटिलताओं से अलग हो। इन सभी परिस्थितियों ने आधुनिक तुलनात्मक राजनीति की पद्धति को जन्म दिया।

    आधुनिक तुलनात्मक पद्धति की विशेषताएं

    आधुनिक तुलनात्मक पद्धति की स्वयं की विशेषताओं ने भी इस अध्ययन प्रणाली के महत्व को विकसित किया। इस पद्धति की विशेषताएं निम्नलिखित हैं

    (i) विश्लेषणात्मक वैज्ञानिक विधि - आधुनिक तुलनात्मक पद्धति एक विश्लेषणात्मक वैज्ञानिक पद्धति है। इस पद्धति में समस्त जानकारी को एक व्यवस्थित क्रम में प्रस्तुत किया गया है तथा सामान्यीकरण की स्थिति में राजनीतिक नियमों का निर्माण किया गया है। इस प्रकार इस पद्धति में विश्लेषणात्मक वैज्ञानिक विधि का प्रयोग करने से भी इस पद्धति का महत्व बढ़ गया है।

    (ii) पश्चिमी व्यवस्था से इतर अध्ययन का समावेश - आधुनिक तुलनात्मक पद्धति में पश्चिमी राजनीतिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ गैर पश्चिमी राजनीतिक व्यवस्थाओं तथा संस्थाओं को भी अध्ययन क्षेत्र में शामिल किया गया। इससे तुलनात्मक राजनीति के क्षेत्र में बहुत परिवर्तन हुआ तथा इसका क्षेत्र भी विस्तृत हुआ।

    (iii) अराजनीतिक तत्वों के अध्ययन का समावेश - राजनीतिक व्यवस्थाओं को प्रभावित करने के लिए राजनीतिक व्यवस्थाओं, संस्थाओं के साथ-साथ केवल राजनीतिक तत्वों को ही उत्तरदायी नहीं समझना चाहिए। इनके लिए अराजनीतिक तत्व जैसे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तत्व भी शामिल होते हैं। आधुनिक तुलनात्मक पद्धति में इन गैर राजनीतिक तत्वों के समावेश से भी तुलनात्मक राजनीति के महत्व को बढ़ावा मिला है।

    (iv) प्रजातान्त्रिक व्यवस्था के महत्व की समाप्ति - पुरातन व्यवस्था में राजनीतिक व्यवस्था के अध्ययन का क्षेत्र प्रजातान्त्रिक व्यवस्था को ही समझा जाता था तथा इससे अलग व्यवस्थाओं को समुचित महत्व प्रदान न करने की परम्परा थी परन्तु वर्तमान आधुनिक तुलनात्मक पद्धति में आँकड़ों, राजनीतिक तथा अराजनीतिक तत्वों के आधार पर स्थिति का अध्ययन करके ही नियमों का निर्धारण किया जाता है। जिस व्यवस्था में जितने गण होते हैं उसे उतनी ही श्रेष्ठ राजनीतिक व्यवस्था समझा जाता है चाहे वह किसी भी प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था हो। 

    Post a Comment

    0Comments
    Post a Comment (0)

    #buttons=(Accept !) #days=(20)

    Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
    Accept !