चिपको आंदोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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चिपको आंदोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। 

चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन वृक्षों की कटाई रोकने से सम्बंधित आंदोलन था। 'चिपको आंदोलन' मुख्य रूप से वृक्षों व वनों की सुरक्षा व संरक्षण के उद्देश्य से प्रेरित था। चिपको आंदोलन का आरम्भ वर्तमान उत्तराखण्ड के चमौली जिले के 'रेनी' गाँव में अप्रैल, 1973 ई. को हुआ था। सरकार द्वारा रेणी गाँव और आस-पास के पर्वतीय क्षेत्रों के लगभग 2500 हरे-भरे वृक्षों को काटने हेतु नीलामी की घोषणा की। गाँव वालों ने इस कटान का विरोध करने का निर्णय किया। सर्वप्रथम स्थानीय मजदूरों ने पेड़ों पर आरी चलाने से मना कर दिया। अनुबन्धित ठेकेदारों ने बाहर से मजदर बुलाये और पेड़ों को काटने का कार्य प्रारम्भ करने का प्रयास किया। इस - स्थिति में गाँव की 'महिला मंगल दल' की प्रमुख ‘गौरा देवी' को जब सूचना प्राप्त हुई तो उन्होंने गाँव की 27 अन्य महिलाओं के साथ वृक्षों के पास घेरा बना दिया। ये महिलाएँ छोटे-छोटे समूहों में बँट गयी और चिन्हित वृक्षों से घेरा बनाकर चिपक गयीं। तमाम प्रलोभनों, धमकियों व अपमानजनक बर्ताव के बावजूद इन्होंने हार नहीं मानी और पेड़ों के कटने का कार्य नहीं होने दिया। धीरे-धीरे खबर आस-पास फैल गयी और सभी समीपवर्ती इलाकों में इस बात को समर्थन मिला। यह आंदोलन 4 दिनों तक जारी रहा, अन्ततः ठेकेदारों को वहाँ से हटना ही पड़ा। इस प्रकार अपनी कार्यशैली की विशिष्टता (पेड़ों से चिपकना) के कारण ही यह आंदोलन 'चिपको आंदोलन' के रूप में विश्वविख्यात हुआ। इस आंदोलन से कई नेताओं का की जुड़ाव हुआ जिनमें 'सुन्दरलाल बहुगुणा' का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। यह आंदोलन पर्वतीय इलाकों की हरित सम्पदा के संरक्षण की दृष्टि से अत्यधिक अनूठा एवं अति महत्वपूर्ण आंदोलन माना जा सकता है। 

चिपको आंदोलन के उद्देश्य 

चिपको आंदोलन का उद्देश्य मुख्य रूप से वृक्षों व वनों की को रोकना तथा पर्यावरण की सुरक्षा व संरक्षण की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। 

चिपको आंदोलन के प्रसिद्ध नेता कौन थे?

चिपको आंदोलन के प्रसिद्ध नेता सुंदरलाल बहुगुणा थे जिनका जन्म 9 जनवरी 1927 को सिलयारा, उत्तराखंड में हुआ। वनों की कटाई रोकने के लिए उन्होंने चिपको आंदोलन का नेतृत्व किया तथा “क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार। मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार” का नारा दिया। 

चिपको आंदोलन की विशेषताएं

चिपको आंदोलन के अंतर्गत वृक्षों की कटाई रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं वृक्षों से लिपट जाते थे। इस आंदोलन की मुख्य विशेषता यह थी की चिपको आंदोलन एक पूर्णतः पर्यावरण संरक्षण पर आधारित अहिंसा वादी आंदोलन था। 

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