Thursday, 27 January 2022

राजनीतिक सिद्धांत के निर्माण में राजनीति विज्ञान का क्या महत्व है।

राजनीतिक सिद्धांत के निर्माण में राजनीति विज्ञान का क्या महत्व है।

राजनीतिक सिद्धांत के निर्माण में राजनीति विज्ञान का महत्व

एक सिद्धांत हमें अपने ज्ञान को संगठित करने, शोध की दिशा निर्धारण करने और अपनी खोज की व्याख्या करने में समर्थ बनाता है। यही सिद्धांत एक विज्ञान एक विधि तन्त्र और उद्देश्य की ओर बढ़ने की तकनीक के रूप में एक दर्शन कहा जा सकता है। इसीलिए सिद्धांत उन सामान्य नियमों की अभिव्यक्ति है, जिनके अनुसार मनुष्य को जीना है और राज्य तथा समाज को संगठित किया जाता है। इस प्रकार सिद्धांत अपने आप में एक उद्देश्य बन जाता है। पर जैसा हम जानते हैं कि यह विज्ञान और दर्शन भी है अतः यह उद्देश्य के रूप में दर्शन तथा उस उद्देश्य की प्राप्ति के माध्यम के रूप में विज्ञान है अंशतः दर्शन और अंशतः विज्ञान है इसीलिए राजनीतिक सिद्धांत न तो पूर्ण राजनीतिक दर्शन है और न ही परिपूर्ण विज्ञान। राजनीतिक सिद्धांत को मानवीय समाज के अस्तित्व के क्रम के आलोचनात्मक अध्ययन का नाम देते हुए जर्मिनो घोषणा करते हैं कि, “यह एक विज्ञान है पर ऐसा विज्ञान नहीं, जिसमें सभी प्रकार के नियमों की जाँच करके उन्हें सिद्ध किया जा सके। यह तो समाजशास्त्र की कसौटियों पर खरा उतरने वाला विज्ञान है। यह न केवल तथ्यों की जानकारी से वरन उसकी दृष्टि से भी जुड़ा है। जिसके आधार पर उन तथ्यों की परख और पहचान होती है। दर्शन के रूप में यह केवल कल्पना नहीं है। बल्कि जीवन के सत्य की खोज है विकृतियों, अति-सामान्यीकरणों नारेबाजी और भाषणबाजी की भर्त्सना करते हुए जर्मिनों लिखते हैं कि, “राजनीतिशास्त्र मनुष्य के सामाजिक अस्तित्व से जुड़ी चिरंतन समस्याओं पर पूरी ईमानदारी से अपनी बात कहता है" एक दर्शन के रूप में राजनीतिक सिद्धांत यह जानने का प्रयास करता है कि किसी विशिष्ट स्थिति में सत्य क्या है? और उसके आधार पर यह पूछने का प्रयास किया जाता है कि इससे भिन्न परिस्थिति में सत्य का स्वरूप क्या होगा। फिर यह अपने विचार को पूरे जोश के साथ सब के समक्ष रखता है अतः राजनीतिक सिद्धांत को राजनीति विज्ञान की सदा आवश्यकता रहेगी। क्योंकि जैसे कि प्लमनाज (द यूजिज ऑफ पोलिटिक थ्योरी) कहते हैं, “ यह न तो कल्पना की उड़ान है न ही पूर्वाग्रहों का प्रदर्शन या कोई बौद्धिक खिलवाड़। “राजनीतिक सिद्धांत एक खरा, कठिन तथा उपयोगी उद्यम है और इसकी उतनी ही आवश्यकता है जितनी किसी अन्य विज्ञान की।

ब्रैच कहते हैं, कि." राजनीति-शास्त्री का महत्व इसी बात में है कि वह समाज के राजनीतिक जीवन की तात्कालिक और संभावित समस्याओं को औरों से पहले समझबझ कर राजनीतिज्ञों को समय रहते वैकल्पिक सुझाव दे सके जिनके सभी संभावित परिणामों के विषय में भली प्रकार विचार किया जा चुका हो। यह केवल लच्छेदार वाक्या सुझाना नहीं है बल्कि ज्ञान के सुदढ़ आधार को तैयार करना है जिस पर निर्माण हो सके। जब राजनीतिक सिद्धांत अपना कार्य अच्छे से सम्पन्न करता है तो यह मानवीय प्रगति के महासंग्राम में हमारा सबसे अधिक महत्वपूर्ण हथियार बन जाता है यदि मनुष्यों को सही सिद्धांतों का ज्ञान न हो तो वह अपने ध्येय और उनकी प्राप्ति के साधनों के चयन में ऐसी कोई भूल नहीं करेंगे जिससे बाद में पछताना पड़े।

डेविड ईस्टन ने लिखा है कि, राजनीतिक सिद्धांत एक विज्ञान के रूप में निम्न प्रकार से कार्य कर सकता है।

1. महत्वपूर्ण राजनीतिक कारकों की पहचान और उनके अन्तर्संबंधों की व्याख्या करना। इस कार्य के लिए एक विश्लेषण की योजना का होना आवश्यक है। उसी से शोध अर्थपूर्ण बनेगा और तथ्यों को क्रम से लगाने के बाद सामान्यीकरण सम्भव हो सकेगा।

2. विभिन्न शोधकर्ताओं के बीच सैद्धान्तिक रूप-रेखा पर आम सहमति का होना आवश्यक है इससे विभिन्न अध्ययनों के निष्कर्षों की तुलना हो पाएगी। इससे पुराने अध्ययनों के निष्कर्षों की समीक्षा में सहायता तो मिलेगी साथ ही यह भी ज्ञान हो पायेगा कि किन-किन क्षेत्रों में और शोध की आवश्यकता है।

3. अन्ततः एक सैद्धान्तिक रूप रेखा या कम-से कम सुसंगत संकल्पना के समूह की आवश्यकता होती है, जिससे शोध विश्वसनीय लगे।

सी.राइट मिल्स (द मार्क्सस्सिटस) राजनीतिक सिद्धांत का महत्व कुछ प्रकार समझते हैं।

1. राजनीतिक सिद्धांत अपने आप में राजनीतिक विज्ञान की एक राजनीतिक वास्तविकता है। यह एक ऐसी विचारधारा के रूप में है जो कुछ संस्थाओं और कार्यों को उचित ठहराती है तथा अन्यों पर प्रहार करती है। यह उन शब्दों की रचना करता है, जिससे लोग अपनी माँगें बुलन्द करते है, आलोचना करते है और आह्वान करते हैं। इन शब्दों में कई बार नीतियाँ निर्धारित होती है।

2. यह एक नीति-शास्त्र भी है। आदर्शों की वह रूपरेखा है जिसके आधार पर मनुष्यों घटनाओं, आन्दोलनों को परखा जाता है और आकाक्षाओं, नीतियों और उद्देश्यों की सम्पूर्ति के लिए मार्गदर्शन और मानदण्ड निर्धारित होते हैं।

3. यह एक क्रिया है जो कि संस्थाओं, सुधार, क्रांति और संरक्षण के साधनों का निर्धारण करता है। यह ऐसा चक्र-व्यूह और कार्यक्रम बनाता है जिसमें साध्य और साधन दोनों ही समाहित होते हैं। संक्षेप में यह, उन ऐतिहासिक स्तरों का निर्माण करता है जिसके आधार परं आदर्शो की प्राप्ति और उन्हें पाने के बाद उनका अनुरक्षण सम्भव होता है।

4.राजनीतिक सिद्धांत में हम मनुष्य समाज और इतिहास के सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं इसमें हम उन मान्यताओं का भी अध्ययन करते हैं जो कि हमें यह बताती है कि समाज का निर्माण कैसे हुआ और किस प्रकार से समाज चलता है समाज के प्रमुख तत्व क्या है और वे किसी प्रकार एक दूसरे से सम्बन्धित है। इसमें हम समाज में संघर्ष के मुख्य विषयों को ढूँढ़ते और इन संघर्षों को सुलझाने का प्रयत्न करते हैं। राजनीतिक सिद्धांत के लिए उपयुक्त अध्ययन विधि राजनीति विज्ञान ही सझाती है और उन्ही विधियों से अपेक्षाओं का निर्धारण होता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि राजनीतिक सिद्धांतों के निर्माण में राजनीति विज्ञान का एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


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