Monday, 3 January 2022

एकल नागरिकता से क्या अभिप्राय है

एकल नागरिकता से क्या अभिप्राय है ? विवेचना कीजिए।

एकल नागरिकता का अर्थ

एकल नागरिकता से आशय संघ तथा राज्य के लिए एक ही नागरिकता से हैं। भारत में एकल नागरिकता को अपनाया गया है अर्थात भारत में कोई भी नागरिक चाहे वह किसी भी राज्य में निवास करता हो, वह 'भारत का नागरिक' कहलाता है। जबकि अधिकांश संघात्मक राष्ट्रों में राज्यों व संघ की दोहरी नागरिकता होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है जिसमे लोगों को देश के साथ साथ राज्य विशेष की भी नागरिकता लेनी होती है। एकल' नागरिकता एकात्मक शासन प्रणाली वाले देशों में ही पायी जाती है। अतः इस दृष्टि से भारतीय संविधान में एकात्मकता की प्रबल प्रवृत्ति दृष्टिगोचर होती है।

भारत में प्रत्येक व्यक्ति को एकल नागरिकता ही प्राप्त है चाहे वह किसी भी राज्य का निवासी हो। किसी भारतीय नागरिक के लिए भारत के किसी राज्य विशेष में रहने की कोई बाध्यता नहीं है। चूंकि अनुच्छेद 15 (1) केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेद की मनाही करता है और इसमें निवास संबंधी किसी शर्त का कोई उल्लेख नहीं है। संविधान निर्माताओं ने एकीकृत भारतीय राष्ट्र तथा संयुक्त बंधुत्व का निर्माण करने के लक्ष्य को सामने रखकर इकहरी भारतीय नागरिकता का प्रावधान किया था। भारत के सभी नागरिकों को चाहे उसका जन्म किसी भी राज्य में हुआ बिना किसी भेदभाव के देश भर में एक से अधिकार तथा कर्तव्य प्राप्त हैं। इस प्रकार भारत में एकल नागरिकता को भारत की एकता, अखंडता और बंधुत्व का प्रतीक माना जा सकता है।


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