Sunday, 24 November 2019

Write a Letter to your Friend about an Accident in Hindi - सड़क दुर्घटना का वर्णन करते हुए पत्र

Write a Letter to your Friend about an Accident in Hindi - सड़क दुर्घटना का वर्णन करते हुए मित्र को पत्र

प्रिय मित्र रतन,
   आशा है कि तुम सकुशल होगे। मैं बहुत अरसे के पश्चात तुम्हें यह पत्र लिख रहा हूं क्योंकि 1 महीने पूर्व आगरा मथुरा रोड पर एक अत्यंत गंभीर मोटरसाइकिल दुर्घटना को देख कर मैं सदमे में डूबा रहा। मैं इस हृदयविदारक दुर्घटना को देखकर इतना स्तब्ध हो गया कि 1 महीने तक सिवाय इसके मैं अन्य कोई बात नहीं सोच पाया। मैं दुर्घटना का संक्षिप्त वर्णन यहां कर रहा हूं।

जैसे ही मैं जीप से मथुरा जा रहा था कि मथुरा रिफाइनरी से केवल एक मील पहले मैंने देखा कि एक पेट्रोलियम गाड़ी एक मोटरसाइकिल जिस पर दो व्यक्ति सवार थे, को रौंदते हुई निकल रही थी। पेट्रोलियम की गाड़ी और मोटरसाइकिल आमने-सामने से आ रहे थे और बहुत तेज गति से चल रहे थे। जैसे ही बिल्कुल करीब आए वैसे ही एक भैंस जिसके पीछे ग्वाला था बीच में आ गई। मोटरसाइकिल वाले ने अपनी मोटर साइकिल का हैंडल थोड़ा सा मोड़ा किंतु गति बहुत तेज होने के कारण अब तक पेट्रोलियम की गाड़ी इस स्थान पर पहुंच चुकी थी। सड़क के आधे हिस्से में भैंस और ग्वालिया थे। दूसरी साइड में आमने सामने से पेट्रोलियम की गाड़ी और मोटरसाइकिल आ गए जोकि बहुत तेज गति में थे। दोनों गाड़ियों के चालक नियंत्रण खो बैठे और टकरा गए जिससे बहुत जोर की आवाज हुई। दोनों ही यात्री मोटरसाइकिल ड्राइवर और पीछे की सीट पर बैठा व्यक्ति चलती हुई गाड़ी से गिर पड़े, पेट्रोलियम गाड़ी के आगे के हिस्से  से बुरी तरह टकराए। मोटरसाइकिल पेट्रोलियम गाड़ी के नीचे अंदर घुस गई, जिसने मोटरसाइकिल को कुचल दिया और बुरी तरह ध्वस्त कर दिया। वे यात्री और मोटरसाइकिल लगभग एक फलांग तक खिंचते चले गए तब कहीं जाकर पेट्रोलियम की गाड़ी रूकी। दोनों यात्रियों की शक्ल बिगड़ गई थी और बहुत ही हृदयविदारक दृश्य हो गया था, उनकी बाँहें और टांगें टूट गई थी और उनके बदन बुरी तरह कुचल गए थे। निष्कर्ष यहीं निकाला जा सकता था कि जैसे ही वह पेट्रोलियम की गाड़ी से टकराए होंगे उनकी आत्मा स्वर्ग में पहुंच गई होगी।

पूछताछ करने पर पता चला कि मोटरसाइकिल के इन यात्रियों में एक तो अपने मित्रों के पास अपनी शादी के निमंत्रण पत्र बांटने जा रहा था। शादी 2 दिन बाद होने जा रही थी। दूसरा यात्री उसका छोटा भाई था जिसने अभी हाल ही में फौज की नौकरी शुरू की थी सेकेंड लेफ़्टीनेंट के रूप में। कौन जानता था कि दोनों शीघ्र ही स्वर्ग में मिलेंगे। यह मेरे द्वारा देखा गया एक अत्यंत बुरा एक्सीडेंट था। मेरे दिल को बहुत तकलीफ हुई। मेरा दिल उन दोनों भाइयों के माता-पिता के बारे में सोचकर भी कांपता है जिन्होंने अपने नौजवान और होनहार पुत्रों के विषय में सुंदर सपने संजोए होंगे। उस लड़की की दशा को कौन बयां कर सकता है जिसकी नवयुवक के साथ मंगनी हो चुकी थी और जो आने वाली शादी के लिए दिन और घंटे गिनती होगी, सोच सोच कर मैं कांप उठता हूं कि कितनी भयानक त्रासदी थी कि इस तकनीकी दुनिया में हम लोगों की जिंदगी कितनी निश्चित हो गई है। शेष अगले पत्र में।
भवनिष्ठ
अरुण प्रकाश

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